जशपुर में गूंजी विश्वशांति की धमक! कलेक्टर से की मुलाकात ,4.5 लाख किमी चलकर आए ये 4 योद्धा — एक साथी की शहादत भी झेली, अब जशपुर को जगाने आए हैं!

जशपुर, 09 जनवरी 2026 —
जशपुर के कलेक्ट्रेट कार्यालय में आज एक ऐसा शख्सियत आया, जिसने सिर्फ पैरों से नहीं… दिल से दुनिया घूमी है।
विश्वशांति विश्वपदयात्री टीम — जो देश-विदेश में पदयात्रा कर चुकी है, जो लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है, जिसने 11 देशों में 4 लाख 52 हजार किलोमीटर से ज्यादा चलकर विश्वशांति का संदेश दिया है — आज जशपुर में है!

इस टीम के चार सदस्य —
श्री अवध बिहारी लाल
श्री जितेन्द्र प्रताप
श्री महेन्द्र प्रताप
श्री गोविन्दानन्द

कलेक्टर श्री रोहित व्यास से सौजन्य भेंट करने पहुंचे।
फोटो खिंचवाई — राष्ट्रध्वज के साथ, हाथ में पदयात्रा की यादें, आंखों में जुनून।



क्यों आई है ये टीम जशपुर?

जशपुर में उनका 8 से 13 जनवरी 2026 तक प्रवास है।
इस दौरान:

स्कूल-कॉलेजों में — बच्चों को पर्यावरण, जल संरक्षण, सड़क सुरक्षा, स्वच्छ भारत का संदेश
ग्राम पंचायतों में — जल-वन संरक्षण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, मतदाता जागरूकता
सार्वजनिक स्थलों पर — संगोष्ठी, व्याख्यान, पौधरोपण अभियान



एक साथी की शहादत भी झेली

जितेन्द्र प्रताप ने भावुक होकर बताया —
हमारी यात्रा 30 जुलाई 1980 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से शुरू हुई। एक भयानक बाढ़ के दौरान हमारे साथी श्री अवध बिहारी लाल कई घंटों तक बरगद के वृक्ष से लटके रहे — जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। सेना और रेस्क्यू टीम ने उन्हें बचाया… उसी दिन हमने तय किया — अब जीवन पर्यावरण, जल, वन और लोगों के लिए समर्पित होगा।

और…
इस यात्रा में एक साथी ने अपनी जान भी दे दी। वो हमारे लिए शहीद हैं। उनकी याद में हम चलते हैं… जागरूक करते हैं… पौधे लगाते हैं।



14 करोड़ पौधे — सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, एक मिशन है

इस टीम ने अब तक लगभग 14 करोड़ 50 लाख पौधे लगवाए हैं —
जो भारत के हर जिले में, हर गांव में, हर स्कूल में, हर अस्पताल के सामने — एक पेड़, एक उम्मीद, एक जीवन का प्रतीक बनकर खड़े हैं।



600 जिले, 33 छत्तीसगढ़ जिले — पदयात्रा पूर्ण

अब तक देश के 600 जनपदों की पदयात्रा पूरी कर चुके हैं।
और छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में पदयात्रा करके आए हैं — जशपुर उनका आखिरी पड़ाव नहीं, बल्कि एक नया शुरुआत है।



माउंट एवरेस्ट बेस कैंप भी किया!

वर्ष 2018 में, टीम ने दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट बेस कैंप की यात्रा पूरी की — बिना किसी आधुनिक सुविधा के, सिर्फ पैदल चलकर।



कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने कहा:

जशपुर के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है। ये लोग सिर्फ पदयात्री नहीं… ये हमारे समय के सच्चे गुरुकुल हैं। इनके प्रयासों से बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, युवा जुड़ेंगे, और जशपुर भी विश्वस्तरीय पर्यावरण अभियान का हिस्सा बनेगा। हम हर संभव सहयोग करेंगे


टीम का संदेश:

हम पैरों से चलते हैं… लेकिन दिल से संदेश देते हैं।
जल बचाओ, वन बचाओ, पर्यावरण बचाओ — ये सिर्फ शब्द नहीं, जीवन है।
जशपुर के बच्चे, युवा, बुजुर्ग — सबको साथ लेकर चलेंगे।
क्योंकि — शांति नहीं, जागरूकता नहीं… जीवन है!

फोटो: कलेक्टर रोहित व्यास के साथ विश्वशांति पदयात्री टीम — राष्ट्रध्वज के साथ, स्मित हँसते हुए, लेकिन आंखों में गहरा संकल्प

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