जशपुर। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक धार्मिक स्थल कैलाश गुफा स्थित शिव मंदिर को लंबे समय से बंद रखे जाने का मामला अब प्रशासनिक स्तर पर तूल पकड़ता जा रहा है। संत समाज और स्थानीय श्रद्धालुओं ने इस संबंध में जिला कलेक्टर जशपुर को लिखित आवेदन सौंपते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं और बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि कैलाश गुफा में स्थित यह शिव मंदिर पूज्य गहीरा गुरु महाराज द्वारा संतों एवं क्षेत्रीय श्रद्धालुओं के सहयोग से स्थापित किया गया था और वर्षों से यह मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। बावजूद इसके, कोरोना काल के बाद से मंदिर के कपाट आज तक श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोले गए, जिससे क्षेत्र में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
आश्वासन पर आश्वासन, लेकिन परिणाम शून्य
संत समाज का कहना है कि 05 अक्टूबर 2025 को समाज के प्रतिनिधियों द्वारा मंदिर खोलने का निवेदन किया गया था। उस समय मंदिर प्रबंधन की ओर से 45 दिनों के भीतर मंदिर खोलने का आश्वासन दिया गया, जिसे लिखित रूप में भी स्वीकार किया गया।
हालांकि, तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी मंदिर बंद रहा, जिससे संत समाज ने इसे आस्था के साथ छल करार दिया है।
सार्वजनिक मंच से की गई घोषणा भी नहीं निभी
मामले को लेकर 31 दिसंबर 2025 को ग्राम चुंदापाठ में एक विशाल आमसभा आयोजित की गई थी। इस आमसभा में सार्वजनिक रूप से यह घोषणा की गई कि 14 जनवरी 2026, मकर संक्रांति के दिन मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा।
संत समाज का आरोप है कि इस घोषणा के बावजूद मंदिर नहीं खोला गया, जिससे समाज में गहरा आक्रोश फैल गया और मंदिर प्रबंधन की नीयत पर सवाल खड़े हो गए हैं।
वृद्ध श्रद्धालु से मारपीट का गंभीर आरोप
आवेदन में एक बेहद गंभीर और संवेदनशील आरोप भी लगाया गया है। संत समाज के अनुसार, मंदिर खोलने की मांग को लेकर गए 81 वर्षीय वृद्ध श्रद्धालु के साथ कथित रूप से मारपीट की गई, जिससे समाज में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया।
इस घटना के बाद संत समाज ने इसे केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं पर सीधा हमला बताया है।
समिति गठन न होना भी बड़ा सवाल
आवेदन में यह भी कहा गया है कि अब तक कैलाश गुफा मंदिर के लिए नई समिति का गठन नहीं किया गया है, जबकि वर्तमान परिस्थितियों में समिति का गठन आवश्यक था। समिति न होने के कारण मंदिर संचालन को लेकर पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
आंदोलन की अंतिम चेतावनी
संत समाज ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 02 फरवरी 2026 तक मंदिर का कपाट श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोला गया, तो 05 फरवरी 2026 को कैलाश गुफा में विशाल जनआंदोलन आयोजित किया जाएगा।
आवेदन में यह भी कहा गया है कि आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
कैलाश गुफा स्थित शिव मंदिर को लेकर चल रहे विवाद और संत समाज द्वारा दिए गए आंदोलन की चेतावनी के बीच अब प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बगीचा प्रदीप राठिया ने संवाद छत्तीसगढ़ न्यूज को जानकारी देते हुए बताया कि कैलाश गुफा बंद रहने के विषय को लेकर कल एक बैठक आयोजित की जाएगी।
उन्होंने ने कहा कि बैठक में मंदिर प्रबंधन, संबंधित पक्षों एवं प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा की जाएगी और बैठक में जो भी निर्णय लिया जाएगा, उसी के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक बयान सामने आने के बाद अब यह देखना अहम होगा कि बैठक में क्या निर्णय निकलता है और क्या वर्षों से बंद कैलाश गुफा शिव मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल पाते हैं या नहीं। वहीं, संत समाज ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि तय समय सीमा तक ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपने घोषित आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।
कलेक्टर को दिए गए आवेदन को यहां से देखें
























