जशपुरनगर। नागरिकों को सुविधाजनक और सुरक्षित सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में जशपुर जिले में जन्म एवं मृत्यु पंजीयन की प्रक्रिया को और आसान किया गया है। अब पंजीयन के दौरान हितग्राही या आवेदक नए आधार ऐप के माध्यम से डिजिटल रूप में अपना पहचान विवरण प्रस्तुत कर सकेंगे, जिसे वैध एवं कानूनी पहचान साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
नए आधार ऐप में पहचान की गोपनीयता पर जोर
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI), नई दिल्ली द्वारा नागरिकों की सुविधा और डेटा गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए नया आधार ऐप लॉन्च किया गया है। यह ऐप Android और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।
जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय, जशपुर द्वारा जारी पत्र के अनुसार UIDAI के 30 अप्रैल 2026 के परिपत्र के तहत नए आधार ऐप में नागरिकों को अपनी पहचान संबंधी जानकारी की गोपनीयता बनाए रखते हुए डिजिटल रूप में पहचान सत्यापित करने की सुविधा दी गई है।
इस ऐप के माध्यम से नागरिकों को अपनी पहचान सत्यापित कराने के लिए 12 अंकों का आधार नंबर सीधे साझा करने की आवश्यकता नहीं होगी।
वेरिफिएबल क्रेडेंशियल से डिजिटल पहचान का सत्यापन
नए आधार ऐप की प्रमुख विशेषता वेरिफिएबल क्रेडेंशियल है। इसके माध्यम से नागरिक अपनी पहचान संबंधी जानकारी को पूर्ण या आवश्यकतानुसार आंशिक रूप से डिजिटल रूप में सुरक्षित तरीके से प्रदर्शित और साझा कर सकेंगे।
विभाग के अनुसार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आधार अधिनियम, 2016 के तहत ऐप से प्राप्त डिजिटल रिकॉर्ड की विधिक मान्यता भी सुनिश्चित की गई है।
जन्म-मृत्यु पंजीयन में डिजिटल आधार को मानना होगा वैध साक्ष्य
जिला रजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार जन्म अथवा मृत्यु पंजीयन के लिए प्राप्त आवेदनों की जांच, मिलान और ऑनलाइन प्रविष्टि के दौरान यदि कोई हितग्राही या आवेदक नए आधार ऐप के माध्यम से अपना पहचान विवरण डिजिटल रूप में प्रस्तुत करता है, तो उसे पूर्णतः वैध और कानूनी पहचान साक्ष्य के रूप में अनिवार्य रूप से स्वीकार करना होगा।
फिजिकल आधार कार्ड या छायाप्रति के लिए नहीं कर सकेंगे मजबूर
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि यदि हितग्राही डिजिटल क्रेडेंशियल के माध्यम से अपनी पहचान प्रस्तुत करता है, तो उससे अनावश्यक रूप से मूल 12 अंकों वाला भौतिक आधार कार्ड या उसकी छायाप्रति जमा करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
हालांकि, भौतिक आधार कार्ड, आधार पत्र, ई-आधार, मास्क्ड ई-आधार और एम-आधार पहले की तरह पहचान के प्रमाण के रूप में मान्य रहेंगे।
लापरवाही पर रजिस्ट्रार और उप-रजिस्ट्रार होंगे जिम्मेदार
जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि इन प्रावधानों के पालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही या नागरिकों को अनावश्यक असुविधा नहीं होनी चाहिए।
ऐसी स्थिति में संबंधित रजिस्ट्रार और उप-रजिस्ट्रार व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। सभी पंजीयन इकाइयों को निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
यह पहल कागज रहित, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।