रायपुर : तीजा-पोरा तिहार में दिखी छत्तीसगढ़ की संस्कृति और समरसता, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की 50 लाख की घोषणा

रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर के कबीर नगर स्थित दशहरा मैदान में मोर माटी सांस्कृतिक संगठन द्वारा आयोजित तीजा-पोरा तिहार कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि तीजा-पोरा तिहार छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं के प्रतीक हैं। तीजा हमारी माताओं-बहनों, परिवार और रिश्तों से जुड़ा पर्व है, जबकि पोरा अन्नदाता किसानों, खेती और पशुधन के सम्मान का पर्व है। ऐसे लोकपर्व संस्कृति को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत रखने के साथ समाज में आत्मीयता और समरसता को मजबूत करते हैं।

कबीर नगर में सर्व समाज भवन के लिए 50 लाख रुपए

मुख्यमंत्री श्री साय ने मोर माटी सांस्कृतिक संगठन की मांग पर कबीर नगर में सर्व समाज भवन के निर्माण के लिए 50 लाख रुपए देने की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले बच्चों को सम्मानित किया तथा माताओं-बहनों को तीजा पर्व के अवसर पर साड़ी भेंट की।

मुख्यमंत्री ने सभी को तीजा-पोरा तिहार की अग्रिम बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मोर माटी सांस्कृतिक संगठन द्वारा हर वर्ष इस पर्व को भव्यता और उत्साह के साथ मनाया जाना प्रसन्नता की बात है। आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता इसमें सभी समाजों की सहभागिता और समरसता का भाव है। हमारे तीज-त्योहार हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और एक-दूसरे के और करीब लाते हैं।

नारी सम्मान की परंपरा से जुड़ा तीजा तिहार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी संस्कृति में नारी को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है— ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।’ उन्होंने कहा कि तीजा तिहार माताओं-बहनों के त्याग, तप और परिवार के प्रति उनके समर्पण का पर्व है।

तीजा के दिन महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु की कामना के साथ व्रत रखती हैं। वे भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा, कथा श्रवण और रात्रि जागरण करती हैं।

पूर्वजों की अमूल्य विरासत हैं लोकपर्व

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत तीज-त्योहारों का देश है और छत्तीसगढ़ की संस्कृति में इन पर्वों की विशेष महत्ता है। एकादशी और करमा तिहार सहित प्रदेश के अनेक पर्वों के पीछे सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश निहित हैं। उन्होंने कहा कि ये परंपराएं हमारे पूर्वजों की अमूल्य विरासत हैं। इन्हें सहेजना और आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है, जिससे आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति और परंपराओं के महत्व को समझें और उनसे जुड़ी रहें।

गांव, गरीब, किसान और माताओं-बहनों के लिए योजनाओं पर जोर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार गांव, गरीब, किसान और माताओं-बहनों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार बनने के बाद पहली ही कैबिनेट में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति दी गई। बीते दो वर्षों में 11 लाख से अधिक आवास बन चुके हैं और प्रतिदिन लगभग 1600 आवासों का निर्माण हो रहा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है और किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदा जा रहा है।

महतारी वंदन योजना की 31 किश्तों का भुगतान

मुख्यमंत्री ने कहा कि माताओं-बहनों के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए महतारी वंदन योजना के माध्यम से हर महीने एक हजार रुपए की सहायता दी जा रही है। अब तक 31 किश्तों का भुगतान किया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि गांव की महिलाओं के लिए यह राशि आर्थिक संबल का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। महिलाएं इस राशि से किराना एवं सब्जी दुकान जैसे छोटे व्यवसाय शुरू करने, सिलाई मशीन खरीदने और बेटियों के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में बचत जैसे कार्य कर रही हैं।

नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ और आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास की पहल

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद छत्तीसगढ़ के विकास की राह में बड़ी बाधा रहा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में बनाई गई प्रभावी रणनीति और सुरक्षाबलों के अदम्य साहस से आज छत्तीसगढ़ नक्सलमुक्त हुआ है।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने 15 हजार आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए अलग से आवास स्वीकृत किए हैं। इससे वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत कर सकेंगे।

ई-फाइल से लेकर सेवा सेतु तक डिजिटल प्रशासन

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहां सुशासन एवं अभिसरण विभाग का गठन किया गया है। पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन के लिए ई-फाइल प्रणाली लागू की गई है और शासकीय प्रक्रियाओं को तेजी से डिजिटल तथा ऑनलाइन बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से नागरिक चौबीसों घंटे अपनी समस्याएं दर्ज करा सकते हैं। शिकायतों के समयबद्ध निराकरण के लिए चार स्तरों पर लगभग 8 हजार कर्मचारियों को जोड़ा गया है। वहीं सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से 36 विभागों की 700 से अधिक सेवाएं नागरिकों को मोबाइल पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।

रामलला दर्शन योजना से 50 हजार से अधिक श्रद्धालु लाभान्वित

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम का ननिहाल और माता कौशल्या का मायका है। रामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम में प्रभु श्रीराम के दर्शन कराए जा रहे हैं और अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु इसका लाभ ले चुके हैं।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत प्रदेश के बुजुर्गों को देश के चयनित 31 तीर्थ स्थलों की यात्रा कराई जा रही है।

गणमान्य नागरिकों और संगठन पदाधिकारियों की मौजूदगी

कार्यक्रम में विधायक श्री मोतीलाल साहू सहित श्री रमेश सिंह ठाकुर, श्री भगतराम हरबंस, श्री चंद्रशेखर शुक्ला, श्री टेकेश्वर चंद्रा, श्री धीरेन्द्र परगनिहा, श्री देवा साहू, श्री ओमप्रकाश मरावी, श्री मनोज जोशी, श्री मैक मिलन साहू, मोर माटी सांस्कृतिक संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

Please Share With Your Friends Also

संवाद छत्तीसगढ़ न्यूज़ पोर्टल बदलते भारत की सबसे विश्वसनीय न्यूज़ पोर्टल है। सबसे सटिक और सबसे तेज समाचार का अपडेट पाने के लिए जुडिए हमारे साथ" टीम :- Samvad Chhattisgarh

Leave a comment