पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के 25 वर्ष पूरे, छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने पारित किया अभिनंदन प्रस्ताव

रायपुर : छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार के मुखिया के रूप में निरंतर 25 वर्ष पूर्ण होने पर अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री के नेतृत्व, जनसेवा, सुशासन, गरीब कल्याण, अंत्योदय और राष्ट्रहित में लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों का उल्लेख किया गया। मंत्रिपरिषद ने केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में हुए विकास कार्यों और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभाव को भी रेखांकित किया।

प्रेस वार्ता में कहा गया कि यह अवसर केवल उपलब्धि का नहीं, बल्कि राष्ट्र प्रथम, जनसेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और अंत्योदय के सिद्धांतों पर आधारित एक असाधारण कर्मयात्रा का ऐतिहासिक पड़ाव है। छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता और मंत्रिपरिषद की ओर से प्रधानमंत्री के कर्मयोग, जनसेवा और दूरदर्शी नेतृत्व का अभिनंदन करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और सुदीर्घ राष्ट्रसेवा की कामना की गई।

मंत्रिपरिषद ने जैम से जीएसटी तक, अनुच्छेद 370 की समाप्ति, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर और नक्सलवाद से मुक्ति जैसे विषयों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रहित में लिए गए निर्णयों का अभिनंदन किया। साथ ही सहकारी संघवाद के माध्यम से छत्तीसगढ़ को अधिक संसाधन और भागीदारी देने तथा आवास, नल-जल, स्वच्छता, राशन, स्वास्थ्य और स्वच्छ ईंधन जैसी सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सहयोग के लिए केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

गुजरात के प्रशासनिक प्रयोगों से लेकर पीएम गतिशक्ति तक का उल्लेख

प्रेस वार्ता में कहा गया कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने शासन में टेक्नोलॉजी, जनसंवाद और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली के कई प्रयोग किए, जिन्हें बाद में देश के अन्य हिस्सों में भी अपनाया गया। वर्ष 2000 में गठित छत्तीसगढ़ ने अपनी शुरुआती विकास यात्रा में गुजरात के सफल अनुभवों से सीखते हुए आगे बढ़ने का प्रयास किया। राज्य में संवाद और चिंतन शिविर की परंपरा भी लागू हुई।

इसी क्रम में पीएम गतिशक्ति के माध्यम से परियोजनाओं की योजना और निगरानी को टेक्नोलॉजी से जोड़ा गया है। छत्तीसगढ़ के लगभग 20 हजार गांवों में से करीब 14 हजार गांव जियो-रेफरेंस्ड किए जा चुके हैं।

8.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिलने का दावा

राज्य में निवेश का अनुकूल वातावरण बनाने के संदर्भ में ‘वाइब्रेंट गुजरात’ से मिली प्रेरणा का उल्लेख किया गया। प्रेस वार्ता के अनुसार, निवेश आकर्षित करने के लिए छत्तीसगढ़ में संरचनात्मक नीतियां लागू की गई हैं।

ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026 के माध्यम से औद्योगिक अनुमतियों को सरल बनाने और निर्धारित समय-सीमा में निर्णय नहीं होने पर स्वतः स्वीकृति यानी डीम्ड अप्रूवल का प्रावधान किया गया है। वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम से भी प्रक्रियाओं को आसान बनाया गया है।

दो जनविश्वास अधिनियमों के माध्यम से 279 गैर-जरूरी प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को 24 घंटे, सातों दिन संचालन की अनुमति दी गई। प्रेस वार्ता में कुल 450 से अधिक प्रशासनिक सुधार किए जाने की जानकारी देते हुए कहा गया कि इन प्रयासों के परिणामस्वरूप राज्य को 8.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे 1.60 लाख से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है।

टेक्नोलॉजी से आम नागरिकों तक पहुंचीं सरकारी सुविधाएं

प्रेस वार्ता में जनधन-आधार-मोबाइल यानी जैम त्रयी को वित्तीय समावेशन का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया। इसके जरिए देश में 60 करोड़ लोगों के बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने का उल्लेख किया गया। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि सीधे हितग्राहियों के खातों में पहुंचने और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होने की बात कही गई।

यूपीआई से छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों तक डिजिटल भुगतान की सुविधा पहुंची है। किसानों के लिए एग्रीस्टैक के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में 42 लाख फार्मर आईडी बनने की जानकारी दी गई। वहीं ड्रोन आधारित स्वामित्व योजना के तहत 7.51 लाख ग्रामीणों को उनकी संपत्ति के अधिकार अभिलेख उपलब्ध कराए गए हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना में 22.90 लाख पक्के आवास पूर्ण

गरीब परिवारों को आवास और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के संदर्भ में बताया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत छत्तीसगढ़ में ग्रामीण क्षेत्रों में 20.65 लाख और शहरी क्षेत्रों में 2.25 लाख पक्के आवास पूरे हो चुके हैं। पिछले पौने तीन वर्षों में ही 11.78 लाख आवास बनने की जानकारी दी गई। प्रेस वार्ता में निर्माण की गति के मामले में राज्य को देश में प्रथम स्थान पर बताया गया।

स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत 2,437 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता से 36 लाख घरेलू और 14,970 सामुदायिक शौचालय बनाए गए। इसके साथ ही 18,653 गांव ओडीएफ प्लस घोषित हुए हैं।

उज्ज्वला योजना के तहत 39.73 लाख महिलाओं को निःशुल्क गैस कनेक्शन दिए गए। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत लगभग 2.49 करोड़, यानी करीब 92 प्रतिशत पात्र हितग्राहियों के कार्ड बनने की जानकारी दी गई। योजना के तहत 51.17 लाख हितग्राहियों को लगभग 11,877 करोड़ रुपये का निःशुल्क उपचार मिला है। वहीं 70 वर्ष से अधिक आयु के 6.21 लाख वरिष्ठ नागरिकों को वय-वंदना कार्ड जारी किए जा चुके हैं।

73 लाख परिवारों को निःशुल्क राशन

कोरोना महामारी से लेकर वैश्विक ऊर्जा संकट तक की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि भारत ने कठिन दौर का सामना आत्मविश्वास के साथ किया। कोरोना काल में दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियानों में शामिल अभियान चलाया गया और वैक्सीन मैत्री के माध्यम से 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए गए।

कोरोना काल में शुरू हुई निःशुल्क खाद्यान्न व्यवस्था को कमजोर परिवारों के लिए राहतकारी बताया गया। प्रेस वार्ता के अनुसार, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ के 73 लाख परिवारों यानी 1.99 करोड़ हितग्राहियों को निःशुल्क राशन मिल रहा है। केंद्र की इस योजना से राज्य को लगभग 5,600 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई है।

26.57 लाख किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ

किसानों को आर्थिक सहायता के संदर्भ में बताया गया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ छत्तीसगढ़ के 26.57 लाख किसानों के खातों में पहुंचा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत 5,064 करोड़ रुपये का केंद्रांश प्रीमियम प्राप्त हुआ है।

प्रेस वार्ता में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 की तुलना में पंजीकृत किसानों की संख्या 13.17 लाख से बढ़कर 27.53 लाख हो गई है। पंजीकृत कृषि रकबा 21.26 लाख से बढ़कर 33 लाख हेक्टेयर हुआ है।

धान उपार्जन भी 59 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 141 लाख मीट्रिक टन के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचने की जानकारी दी गई। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी के माध्यम से 33,431 करोड़ रुपये और बोनस के रूप में 10,292 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने का उल्लेख किया गया।

महतारी वंदन से 68 लाख महिलाओं को सहायता

महिला सशक्तीकरण के संदर्भ में बताया गया कि महतारी वंदन योजना के तहत लगभग 68 लाख महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये, यानी सालाना 12,000 रुपये की सहायता दी जा रही है। निर्धारित लक्ष्य से अधिक उपलब्धि के साथ 14 लाख महिलाएं लखपति दीदी बनी हैं।

बिहान यानी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से 32.39 लाख ग्रामीण परिवार 2.98 लाख स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वन धन विकास केंद्रों से 70 हजार से अधिक जनजातीय महिलाओं के जुड़ने की जानकारी भी दी गई।

खेलो इंडिया के तहत आठ जिलों के लिए 48 करोड़ रुपये

युवा खिलाड़ियों को अवसर उपलब्ध कराने के लिए खेलो इंडिया के तहत राज्य के आठ जिलों के लिए 48 करोड़ रुपये की सहायता और 33 खेलो इंडिया मिनी सेंटर स्वीकृत होने का उल्लेख किया गया। बिलासपुर में हॉकी, आर्चरी और एथलेटिक्स के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्वीकृत हुआ है।

जनजातीय समाज के लिए आवास, सड़क और पेयजल सुविधाओं का विस्तार

प्रेस वार्ता में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस घोषित किए जाने को जनजातीय समाज के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने वाला कदम बताया गया।

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत प्रदेश के 6,000 से अधिक जनजातीय बहुल गांवों में अधोसंरचना विकास का उल्लेख किया गया। पीएम जनमन योजना के अंतर्गत 18 जिलों में रहने वाली पांच विशेष पिछड़ी जनजातियों के 56 हजार से अधिक परिवारों तक पक्के आवास, सड़क और पेयजल सुविधाएं पहुंचने की जानकारी दी गई।

राज्य के 26 जिलों में 75 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित हैं। लघु वनोपज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य देकर छह लाख संग्राहकों को 500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। नवा रायपुर में देश का पहला डिजिटल जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय स्थापित होने का भी उल्लेख किया गया।

केंद्रीय करों में हिस्सेदारी बढ़ने से राज्य को अधिक संसाधन

सहकारी संघवाद के तहत केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत किए जाने का उल्लेख किया गया। प्रेस वार्ता में बताया गया कि पिछले 12 वर्षों में छत्तीसगढ़ को केंद्रीय करों के हिस्से के रूप में 3,46,806 करोड़ रुपये मिले हैं। यह राशि वर्ष 2004 से 2014 के दशक में मिले 47,100 करोड़ रुपये की तुलना में 7.4 गुना अधिक बताई गई।

खनिज संसाधनों से प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बनी जिला खनिज न्यास यानी डीएमएफ व्यवस्था के माध्यम से राज्य को 17,887 करोड़ रुपये मिले और 81 हजार से अधिक विकास कार्य किए गए।

वहीं जीएसटी लागू होने से चेकपोस्ट की बाधाएं समाप्त होने तथा इस्पात, सीमेंट और कृषि उत्पादों के लिए देशभर में एक बाजार बनने की बात कही गई। राज्य को 22,600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त जीएसटी क्षतिपूर्ति सहायता मिलने का भी उल्लेख किया गया।

सड़क और रेल परियोजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये के कार्य

प्रेस वार्ता में बुनियादी ढांचे के विकास को रेखांकित करते हुए कहा गया कि देश का सार्वजनिक पूंजीगत व्यय लगभग दो लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हुआ है। छत्तीसगढ़ को भी लगभग 22 हजार करोड़ रुपये की सहायता मिलने की जानकारी दी गई।

राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए 35,766 करोड़ रुपये स्वीकृत होने तथा 18,215 करोड़ रुपये की लागत वाली 37 परियोजनाओं पर काम जारी होने का उल्लेख किया गया। सभी जिला मुख्यालयों के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ने की जानकारी देते हुए सिक्स-लेन रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे को प्रदेश के लिए बंदरगाहों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ने की महत्वपूर्ण परियोजना बताया गया।

इसके साथ ही 4,007 करोड़ रुपये की लागत वाले चार-लेन बिलासपुर-उरगा-पत्थलगांव मार्ग और 2,289 करोड़ रुपये के छह-लेन रायपुर-दुर्ग बायपास का निर्माण प्रगति पर होने की जानकारी दी गई।

रेलवे क्षेत्र में लगभग 54 हजार करोड़ रुपये की नई रेल लाइन, दोहरीकरण, फ्लाईओवर और पुल परियोजनाओं पर काम जारी है। डिजिटल भारत निधि के तहत सुदूर और जनजातीय क्षेत्रों में 1,643 मोबाइल टावर स्वीकृत हुए हैं।

ऊर्जा क्षेत्र में साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव

ऊर्जा क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को लगभग 3.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिलने की जानकारी दी गई। रायगढ़ स्थित लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट की क्षमता 4,000 मेगावाट से बढ़ाकर 4,800 मेगावाट किए जाने का उल्लेख किया गया।

प्रेस वार्ता के अनुसार, 2,808 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता से 9.30 लाख घरों को नए बिजली कनेक्शन मिले हैं। वहीं पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत 1.16 लाख से अधिक घरों में सोलर संयंत्र लगाए गए हैं, जिनके लिए 670 करोड़ रुपये की केंद्रीय सब्सिडी जारी हुई है।

बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान और विकास कार्यों का उल्लेख

प्रेस वार्ता में बस्तर में शांति और विकास को सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक बताया गया। केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों तथा सुरक्षाबलों के साहस का उल्लेख करते हुए कहा गया कि 31 मार्च 2026 को दशकों पुरानी नक्सल समस्या से निर्णायक मुक्ति मिली।

नक्सल उन्मूलन के लिए केंद्र से 2,080 करोड़ रुपये की विशेष सहायता मिलने तथा आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ित परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 15 हजार आवास स्वीकृत होने की जानकारी दी गई। इनमें से 5,671 आवासों का निर्माण जारी है।

सड़क संपर्क के क्षेत्र में आरसीपीएलडब्ल्यूई योजना के तहत 267 सड़कें और आठ पुल पूरे होने का उल्लेख किया गया। पीएमजीएसवाई-4 के अंतर्गत 699 करोड़ रुपये की लागत से 228 सड़कें बनाई जा रही हैं।

हिंसा के कारण वर्षों से बंद 421 स्कूल फिर से खोले गए हैं। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से दुर्गम गांवों तक स्वास्थ्य, शिक्षा और राशन की सुविधाएं पहुंचाने का उल्लेख करते हुए कहा गया कि शांति स्थापित होने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी और आजीविका के नए अवसर बढ़ रहे हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बड़े फैसलों का उल्लेख

राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को रेखांकित किया गया। वन रैंक वन पेंशन और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद का सृजन भी महत्वपूर्ण निर्णयों में शामिल बताया गया।

प्रेस वार्ता में अनुच्छेद 370 की समाप्ति को जम्मू-कश्मीर के भारत में पूर्ण संवैधानिक एकीकरण से जुड़ा कदम बताया गया। औपनिवेशिक कानूनों के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए जाने तथा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने का भी उल्लेख किया गया।

आस्था, संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देने वाली परियोजनाएं

प्रेस वार्ता में काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या में श्रीरामलला मंदिर के निर्माण एवं प्राण प्रतिष्ठा को सांस्कृतिक आत्मविश्वास के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। छत्तीसगढ़ में अयोध्या धाम श्रीरामलला दर्शन योजना संचालित होने की जानकारी भी दी गई।

प्रसाद योजना के तहत 48 करोड़ रुपये की सहायता से मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर, डोंगरगढ़ का विकास कार्य पूर्ण होने का उल्लेख किया गया।

स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत जशपुर, सरगुजा, बिलासपुर और जगदलपुर के जनजातीय पर्यटन सर्किट के लिए 94 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत कबीरधाम के भोरमदेव कॉरिडोर के लिए 146 करोड़ रुपये और जशपुर के मयाली-बगीचा इको-टूरिज्म के लिए 10 करोड़ रुपये स्वीकृत होने की जानकारी दी गई।

इसके अतिरिक्त चंपारण में संत श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की मूर्ति और कॉम्प्लेक्स की स्थापना के लिए स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत 73.42 करोड़ रुपये की स्वीकृति का उल्लेख किया गया। रायपुर में 200 करोड़ रुपये की लागत से पीएम एकता मॉल बनाने की योजना है, जो हथकरघा, हस्तशिल्प और ग्रामोद्योग को बढ़ावा देगा। नवा रायपुर में राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान यानी निफ्ट की स्थापना भी स्वीकृत होने की जानकारी दी गई।

वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका का उल्लेख

प्रेस वार्ता में कहा गया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका और प्रतिष्ठा का विस्तार हुआ है। जी-20 की अध्यक्षता, ब्रिक्स में भारत की भूमिका, अफ्रीकी संघ को जी-20 की स्थायी सदस्यता दिलाने की पहल और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती देने को भारत की कूटनीतिक क्षमता के उदाहरणों के रूप में प्रस्तुत किया गया।

दुनिया के 36 देशों द्वारा प्रधानमंत्री को सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिए जाने का भी उल्लेख किया गया। इंटरनेशनल सोलर अलायंस, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष जैसी पहलों से छत्तीसगढ़ को भी लाभ मिलने की बात कही गई। श्रीअन्न को वैश्विक पहचान मिलने से बस्तर और सरगुजा के कोदो, कुटकी और रागी उत्पादक जनजातीय किसानों के लिए नए बाजार और आर्थिक अवसर बनने का उल्लेख किया गया।

‘विकसित छत्तीसगढ़’ से ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प

प्रेस वार्ता के अंत में कहा गया कि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री के संकल्प में भागीदारी के लिए छत्तीसगढ़ ने ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ का रोडमैप तैयार किया है।

नक्सलमुक्त बस्तर, खनिज और ऊर्जा संसाधन, मेहनती किसान, सशक्त महिलाएं, युवा शक्ति, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और निवेश के अनुकूल वातावरण को राज्य की प्रमुख ताकत बताया गया। मंत्रिपरिषद ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ की भावना के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के माध्यम से विकसित भारत 2047 के निर्माण में पूर्ण योगदान देने का संकल्प दोहराया।

प्रेस वार्ता में विश्वास व्यक्त किया गया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत और छत्तीसगढ़ समृद्ध, सुरक्षित, आत्मनिर्भर और विकसित भविष्य की ओर आगे बढ़ते रहेंगे।

कैबिनेट के दो अहम फैसले

प्रधानमंत्री के नेतृत्व के 25 वर्ष पूरे होने पर अभिनंदन प्रस्ताव के अलावा मंत्रिपरिषद की बैठक में दो महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए।

1. पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षक के 36 पदों पर भर्ती को मंजूरी

छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने पूर्व अग्निवीर सैनिकों के अनुभव और दक्षता का लाभ राज्य की सेवाओं में लेने के उद्देश्य से गृह विभाग में आरक्षक के कुल 36 पदों पर उपलब्ध रिक्तियों के विरुद्ध भर्ती की अनुमति प्रदान की है।

उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा पूर्व अग्निवीरों के लिए इन पदों पर पहले ही 10 प्रतिशत श्रेणीवार आरक्षण का प्रावधान किया जा चुका है।

2. आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलकर होगा जनजातीय कार्य विभाग

मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत ‘आदिम जाति विकास विभाग’ का नाम बदलकर ‘जनजातीय कार्य विभाग’ किया जाएगा।

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