CG: कुपोषण और एनीमिया से लड़ने घर-घर लगेंगे मुनगा के पौधे, 23,500 स्कूलों में बनेंगी पोषण वाटिकाएं

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कुपोषण और एनीमिया की रोकथाम के प्रयासों को मजबूत करने के लिए ‘हर-घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान के तहत घरों से लेकर आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों और छात्रावासों तक मुनगा के पौधे लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है। राज्य शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग के नेतृत्व में संचालित इस पहल का उद्देश्य मुनगा के पोषण गुणों को जन-जन तक पहुंचाना और परिवारों को पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक करना है।

इस संबंध में 15 अक्टूबर को मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में पौधों की उपलब्धता, वितरण, रोपण, सुरक्षा और नियमित निगरानी के लिए विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई।

फरवरी-मार्च में घर-घर वितरित होंगे निःशुल्क पौधे

अभियान के तहत राज्य के प्रत्येक घर में मुनगा के पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराने और उनके रोपण के साथ देखभाल सुनिश्चित करने की योजना है। इसके लिए उद्यानिकी, कृषि एवं किसान कल्याण तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की नर्सरियों में पौधे तैयार किए जाएंगे।

तैयार पौधों का वितरण फरवरी से मार्च के दौरान घर-घर किया जाएगा। अभियान की प्रगति और पौधों की देखभाल की निगरानी की जिम्मेदारी सभी जिलों के कलेक्टरों को सौंपी गई है।

मुनगा की पत्तियों और फलियों में पोषक तत्व

बैठक में मुनगा यानी सहजन की पत्तियों और फलियों के पोषण संबंधी महत्व पर भी चर्चा की गई। इनमें आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-ए और विटामिन-सी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।

मुनगा को नियमित भोजन में शामिल करना संतुलित आहार का हिस्सा बन सकता है। विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पोषण की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए विविधतापूर्ण एवं पौष्टिक भोजन महत्वपूर्ण है। अभियान के माध्यम से घरों में मुनगा की उपलब्धता बढ़ाने के साथ पोषण संबंधी जागरूकता को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

23,500 स्कूलों में बनेंगी शाला पोषण वाटिकाएं

अभियान का दायरा केवल घरों तक सीमित नहीं रहेगा। प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, आश्रमों और छात्रावासों में भी मुनगा के पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराकर लगाए जाएंगे।

राज्य के लगभग 23 हजार 500 स्कूलों में मुनगा के पौधे रोपकर शाला पोषण वाटिकाएं विकसित करने की योजना है। इसके साथ ही स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मध्याह्न भोजन में मुनगा भाजी शामिल करने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य सामग्री को भोजन से जोड़ा जा सके।

पौधों की सुरक्षा और सिंचाई की होगी डिजिटल निगरानी

पौधे लगाने के साथ उनकी नियमित देखभाल सुनिश्चित करना भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। इसके लिए डिजिटल जियो-टैगिंग और लाइव डैशबोर्ड मॉनिटरिंग पर विशेष जोर दिया जाएगा।

इस व्यवस्था के माध्यम से पौधों के रोपण, उनकी सुरक्षा, सिंचाई और जीवित रहने की स्थिति पर नजर रखने का प्रयास किया जाएगा। इससे अभियान की प्रगति की समीक्षा करने और पौधों की देखभाल में आने वाली कमियों को पहचानने में मदद मिलेगी।

अलग-अलग विभागों को सौंपी गई जिम्मेदारी

अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा।

महिला एवं बाल विकास विभाग को अभियान का नोडल विभाग बनाया गया है। यह विभाग आंगनबाड़ी स्तर पर समन्वय, हितग्राहियों के चयन, पोषण शिक्षा और दैनिक निगरानी की जिम्मेदारी संभालेगा।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ग्राम पंचायत स्तर पर बाड़ियों की पहचान, नर्सरी तैयार करने और स्व-सहायता समूहों के सहयोग से अभियान की जानकारी लोगों तक पहुंचाने में भूमिका निभाएगा।

वहीं, उद्यानिकी एवं कृषि विभाग गुणवत्तापूर्ण मुनगा कलम और उन्नत पौधे तैयार करने, रोपण की तकनीक, जैविक खाद के उपयोग और पौधों की सुरक्षा के लिए तकनीकी सहयोग देंगे। इस कार्य में वन विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा।

उच्चस्तरीय बैठक में वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, आदिम जाति विकास विभाग के सचिव श्री भूवनेश यादव, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह सहित वन, उद्यानिकी और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

अभियान के माध्यम से घरों, शैक्षणिक संस्थानों और आंगनबाड़ी केंद्रों में मुनगा के पौधों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ पोषण जागरूकता, पौधों की देखभाल और विभागीय समन्वय को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा।

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