जशपुर में आज होगा “ख़ौफ़ – द डिजिटल वॉर” का भव्य विमोचन, साइबर अपराधों के खिलाफ जागरूकता का बड़ा अभियान ,- द डिजिटल वॉर”, SSP शशिमोहन सिंह खुद बने पीड़ित शिक्षक

जशपुर, 04 अप्रैल 2026। रायगढ़ के एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह द्वारा लिखित, निर्देशित एवं अभिनीत बहुप्रतीक्षित शॉर्ट फिल्म “ख़ौफ़ – द डिजिटल वॉर” का आज 4 अप्रैल को जशपुर के विशिष्ट कम्युनिटी हॉल में रात्रि 8:00 बजे भव्य विमोचन किया जाएगा। यह कार्यक्रम मुख्य अतिथि श्रीमती कौशल्या देवी साय, धर्मपत्नी माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित होगा, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और भी बढ़ गई है।

इस फिल्म के माध्यम से एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह एक बार फिर सामाजिक सरोकारों से जुड़ी अपनी प्रतिबद्धता को दर्शा रहे हैं। पुलिस अधिकारी के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के साथ-साथ वे समाज में जागरूकता लाने के लिए रचनात्मक माध्यमों का उपयोग करते रहे हैं। इससे पहले भी वे विभिन्न सामाजिक विषयों पर आधारित शॉर्ट फिल्मों के जरिए लोगों को जागरूक कर चुके हैं।

इस बार उनकी फिल्म का विषय है तेजी से बढ़ते साइबर अपराध। डिजिटल युग में जहां ऑनलाइन बैंकिंग, सोशल मीडिया और मोबाइल एप्लिकेशन ने जीवन को आसान बनाया है, वहीं इनका दुरुपयोग कर साइबर अपराधी लोगों को ठगने के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। फिल्म में इन्हीं खतरों को बेहद वास्तविक और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

फिल्म की कहानी एक ऐसे स्कूल शिक्षक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अनजाने में साइबर फ्रॉड का शिकार बन जाता है। इस किरदार को स्वयं एसएसपी शशि मोहन सिंह ने निभाया है, जिससे फिल्म और अधिक प्रभावशाली बन जाती है। कहानी के माध्यम से यह दिखाया गया है कि कैसे सामान्य लोग छोटी-छोटी गलतियों के कारण बड़े आर्थिक नुकसान का सामना कर बैठते हैं।

फिल्म में ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी, फर्जी कॉल, केवाईसी अपडेट के नाम पर ठगी, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम के जरिए स्कैम, ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड, स्क्रीन शेयरिंग एप्लिकेशन और संदिग्ध लिंक के माध्यम से होने वाले अपराधों को विस्तार से दर्शाया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि किस प्रकार साइबर अपराधी स्वयं को पुलिस अधिकारी, बैंक अधिकारी, आरबीआई, सीबीआई या साइबर सेल का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और ठगी को अंजाम देते हैं।

Take 3 Studios द्वारा निर्मित इस फिल्म में रायपुर, दुर्ग, कोरबा और जशपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के स्थानीय कलाकारों ने अभिनय किया है, जिससे यह फिल्म न केवल जागरूकता का माध्यम बनी है बल्कि स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने का भी कार्य कर रही है।

फिल्म में डिजिटल सुरक्षा के महत्वपूर्ण उपायों को भी सरल भाषा में समझाया गया है। इसमें स्पष्ट संदेश दिया गया है कि ओटीपी साझा करना, अनजान लिंक पर क्लिक करना, बिना जांचे-परखे ऐप डाउनलोड करना या घबराकर जल्दबाजी में निर्णय लेना आर्थिक अपराध का मुख्य कारण बन सकता है।

इसके साथ ही फिल्म में छत्तीसगढ़ पुलिस की साइबर सेल, शिकायत पंजीकरण प्रक्रिया और त्वरित कार्रवाई प्रणाली को भी वास्तविक रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे आम नागरिकों में पुलिस के प्रति विश्वास और सहयोग की भावना मजबूत हो सके।

फिल्म के तकनीकी पक्ष की बात करें तो इसके डीओपी (छायांकनकर्ता) श्री अनुज कुमार हैं। कलाकारों में एसएसपी रायगढ़ श्री शशि मोहन सिंह, सुश्री आरवी सिन्हा, दीपा महंत, राम प्रकाश पाण्डेय, ऋभु समर्थ सिंह, कुंदन सिंह, प्रवीण अग्रवाल, विजय सिंह राजपूत, अंकित पांडे, आकर्ष, मनीषा, वंशिका गुप्ता सहित कई अन्य कलाकार शामिल हैं। फिल्म की कहानी स्वयं शशि मोहन सिंह द्वारा लिखी गई है, जबकि स्क्रीनप्ले श्री तोरण राजपूत और संवाद घनश्याम द्वारा तैयार किए गए हैं। कैमरा सहायक परमेश्वर नाग, मेकअप आर्टिस्ट वर्षा सोनी और सहायक सुचिता भगत ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

एसएसपी रायगढ़ श्री शशि मोहन सिंह ने कहा कि “डिजिटल फ्रॉड के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और छत्तीसगढ़ पुलिस इस पर सख्ती से कार्रवाई कर रही है। इस फिल्म का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है ताकि वे सतर्क रहें और साइबर अपराध का शिकार होने से बच सकें। साथ ही स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करना भी हमारी प्राथमिकता रही है।”

फिल्म का मूल संदेश स्पष्ट है —
“डिजिटल दुनिया में जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।”

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