जशपुर: कोरोना काल में जशपुर के प्रभारी तहसीलदार रहे कमलेश मिरी को हुआ 3 साल सश्रम कारावास” साथ ही 50000 जुर्माना ” हस्ताक्षर के नाम पर मांगे थे 3 लाख… पढ़िए पूरी खबर

जशपुर:- जशपुर के विशेष न्यायाधीश सत्येन्द्र कुमार साहू की अदालत ने, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 07 के तहत दोषी करार देते हुए, कोरोना काल में जशपुर तहसीलदार के प्रभार में रहे, कमलेश कुमार मिरी को 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 50000, पचास हजार रुपए का जुर्माना सुनाया है। यह निर्णय 30 जून 2025 को आया, जो जिले में पहली बार किसी वरिष्ठ राजस्व अधिकारी को भ्रष्टाचार मामले में सश्रम सजा दिए जाने के रूप में दर्ज हुआ है।

भूमि के नामांतरण के लिए मांगी थी 3 लाख रुपए की रिश्वत


वर्ष 2020 में नायब तहसीलदार कमलेश कुमार मिरी, जो उस समय जशपुरनगर तहसील कार्यालय में प्रभारी तहसीलदार के रूप में पदस्थ थे ने, मामले के शिकायतकर्ता अनोज कुमार गुप्ता से ग्राम बालाछापर में खरीदी गई भूमि के नामांतरण, प्रमाणीकरण और ऋण पुस्तिका में हस्ताक्षर के लिए 3 लाख रुपए की रिश्वत की मांग की थी। प्रार्थी अनोज गुप्ता द्वारा जमीन की रजिस्ट्री पूरी होने के बाद जब नामांतरण की प्रक्रिया के लिए तहसील कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया, तो अधिकारी ने सरकारी कर्तव्य निभाने के बदले में निजी लाभ की मांग की। शिकायतकर्ता ने काफी विचार करने के बाद उक्त रिश्वत मांगने की सूचना, एंटी करप्शन ब्यूरो अंबिकापुर को दी थी।

एसीबी ने कमलेश कुमार मिरी को रंगे हाथों किया था गिरफ्तार

अंबिकापुर की टीम ने प्रारंभिक जांच में शिकायत को सत्य पाए जाने पर एक सूक्ष्म योजना बनाई। योजना के तहत प्रार्थी अनोज गुप्ता को 50,000 रुपए की पहली किस्त के साथ 19 अगस्त 2020 को तहसीलदार के पास भेजा गया। जैसे ही नायब तहसीलदार कमलेश मिरी ने यह रकम अपने हाथों में लिया, एसीबी की टीम ने तहसील कार्यालय में छापा मारकर उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। तुरंत उन्हें गिरफ्तार कर विशेष न्यायालय में पेश किया गया और विशेष प्रकरण क्रमांक 02/2021 के अंतर्गत विधिवत न्यायिक प्रक्रिया प्रारंभ हुई। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, जशपुर सत्येन्द्र कुमार साहू की अदालत में हुई। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक सीपी सिंह ने मजबूत साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए, जिनमें रिश्वत की रकम की बरामदगी, प्राथमिक शिकायत, एसीबी की कार्यवाही रिपोर्ट एवं रासायनिक परीक्षण रिपोर्ट शामिल थीं।

आखिरकार 30 जून को न्यायालय ने इस मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी कमलेश मिरी को दोषी मानते हुए 3 वर्ष की सश्रम कारावास और 50,000 रुपए के आर्थिक दंड से दंडित किया।

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