जशपुर। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के नेतृत्व में पुलिस प्रशासन एवं यूनिसेफ एग्रीकोन के संयुक्त तत्वावधान में शासकीय प्री मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास जशपुर में साइबर सुरक्षा, बॉडी शेमिंग, बाल-विवाह, पढ़ाई का कोना और लिंग भेदभाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर एक व्यापक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने, सामाजिक चुनौतियों को समझने तथा व्यक्तिगत सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना था।
कार्यक्रम में उपस्थित साइबर सेल अधिकारी हरि शंकर राम ने छात्राओं को साइबर सुरक्षा की मूल अवधारणा समझाई और बताया कि इंटरनेट पर अपनी निजी जानकारी, पहचान और बैंक विवरण की सुरक्षा क्यों महत्वपूर्ण है। अधिकारियों ने साइबर अपराधों के बढ़ते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए फिशिंग लिंक, फर्जी कॉल, गलत OTP मांगने, नकली वेबसाइट और सोशल मीडिया हैकिंग से बचने के तरीकों को विस्तार से समझाया। साथ ही साइबर हेल्पलाइन 1930, संयोग ऐप, आरोग्य सेतु ऐप और अन्य डिजिटल सुरक्षा संसाधनों के सुरक्षित उपयोग की प्रक्रिया भी बताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी साइबर घटना के होने पर तुरंत रिपोर्ट करना जरूरी है ताकि समय रहते नुकसान से बचा जा सके।
कार्यक्रम में जिला समन्वयक शालिनी गुप्ता ने छात्राओं को बाल-विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बताया कि कम उम्र में विवाह होने से शिक्षा बाधित होती है और उनके करियर तथा आत्मनिर्भरता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। बाल-विवाह से उनके स्वास्थ्य पर भी गंभीर दुष्प्रभाव पड़ते हैं, जैसे कुपोषण, एनीमिया, जटिल प्रसव और मानसिक तनाव। उन्होंने यह भी बताया कि यह प्रथा लड़कियों की स्वतंत्रता व पहचान को सीमित करती है और समाज में असमानता को बढ़ावा देती है। बाल-विवाह रोकने के लिए बनाए गए कानूनों और हेल्पलाइन जैसे 1098,112,1930 नंबरों की जानकारी भी छात्राओं को प्रदान की गई।

इसके साथ ही बॉडी शेमिंग और लिंग भेदभाव जैसे सामाजिक मुद्दों पर भी चर्चा की गई। छात्राओं को बताया गया कि बॉडी शेमिंग मानसिक उत्पीड़न का एक रूप है, जो व्यक्ति के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसलिए स्वयं को जैसे हैं वैसे स्वीकार करना और दूसरों की शारीरिक विशेषताओं का सम्मान करना जरूरी है। लिंग भेदभाव के संदर्भ में यह संदेश दिया गया कि समाज में मौजूद पूर्वाग्रहों को शिक्षित होकर, जागरूक रहकर और अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखकर चुनौती दी जा सकती है।
ब्लॉक समन्वयक गुरुदेव प्रसाद ने साइबर अपराध से जुड़ी एक वास्तविक घटना साझा की, जिससे छात्राओं को यह समझने में मदद मिली कि छोटी-सी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। उन्होंने सभी को डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते समय सतर्क रहने की अपील की।
कार्यक्रम में छात्रावास अधीक्षक रंथू राम भगत, साइबर सेल से सोन साय भगत, स्वयंसेवक नेहा एक्का, पूजा गुप्ता और छात्रावास की सभी छात्राएँ उपस्थित रहे। छात्राओं ने कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें डिजिटल सुरक्षा, सामाजिक समानता और मानसिक सशक्तिकरण के बारे में गहरी जानकारी प्राप्त हुई।
कार्यक्रम का समापन सभी को सुरक्षित डिजिटल भविष्य, समानता और आत्म-सशक्तिकरण अपनाने के संदेश के साथ किया गया।




