रायगढ़, 19 मार्च 2026।जिले के तमनार थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मिलूपारा सिदारपारा नहर पार में चौकीदार की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने सूक्ष्म और वैज्ञानिक जांच के जरिए अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझा ली है। इस मामले में मृतक का साथी ही हत्यारा निकला, जिसने हत्या के बाद पुलिस को गुमराह करने के लिए मनगढ़ंत कहानी रची थी।
मामले में पुलिस ने आरोपी अजहर अली शेख समीरुद्दीन (63 वर्ष), निवासी ग्राम चउद्वार, थाना पुखुरिया, जिला मालदा (पश्चिम बंगाल), हाल मुकाम ग्राम खम्हरिया, थाना तमनार, जिला रायगढ़ को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
🔎 क्या है पूरा मामला
घटना 9 मार्च 2026 की रात की है। 10 मार्च की सुबह पुलिस को सूचना मिली कि बिजली कंपनी के टावर में चौकीदारी करने वाले लखन उर्फ धरभईया चौधरी (46 वर्ष) का शव खेत की मेड़ पर पड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। मृतक के मुंह, नाक, चेहरे, गले एवं शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोट के निशान पाए गए, जिससे प्रथम दृष्टया हत्या की आशंका पर थाना तमनार में अपराध क्रमांक 58/2026 धारा 103(1) भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
मौके पर एफएसएल टीम और डॉग स्क्वाड की भी सहायता ली गई।
❗ आरोपी ने रची झूठी कहानी
प्रारंभिक पूछताछ में मृतक का साथी अजहर अली स्वयं को प्रत्यक्षदर्शी बताते हुए पुलिस को गुमराह करता रहा। उसने बताया कि 9 मार्च की रात टावर की सुरक्षा के दौरान 4-5 अज्ञात लोग आए, जिन्होंने रस्सी काटने का प्रयास किया और विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की तथा मृतक लखन को पकड़कर ले गए। अगले दिन उसका शव मिला।
लेकिन पुलिस को उसकी कहानी पर संदेह हुआ क्योंकि आसपास के लोगों से पूछताछ में घटना के समय किसी बाहरी व्यक्ति के आने-जाने की पुष्टि नहीं हुई। पूछताछ के दौरान आरोपी बार-बार अपना बयान बदलता रहा।
🧪 वैज्ञानिक जांच से खुला राज
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टर ने मौत को “हॉमीसाइडल” बताया और मृतक के मुंह में प्लास्टिक का एक टुकड़ा मिलने की जानकारी दी। पुलिस ने इसे अहम सुराग मानते हुए जांच को आगे बढ़ाया। लगातार जांच में शक अजहर अली पर ही केंद्रित होता गया।
इसके बाद पुलिस ने वैज्ञानिक तरीके से सख्ती से पूछताछ की, जिसमें आरोपी टूट गया और उसने हत्या करना स्वीकार कर लिया।
⚖️ ऐसे की हत्या, फिर छुपाए सबूत
आरोपी ने बताया कि घटना दिनांक को खाना बनाने की बात को लेकर उसका मृतक लखन से विवाद हुआ था। विवाद बढ़ने पर उसने मारपीट कर लखन को जमीन पर गिरा दिया और हाथ में रखी टार्च से उसके चेहरे पर लगातार वार किए। इसके बाद गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।
हत्या के बाद आरोपी ने साक्ष्य छिपाने की नीयत से खून लगे टार्च को पानी से धोकर अपने पास रख लिया और घटना के समय पहने कपड़ों को जला दिया। साथ ही टावर की रस्सी काटकर एक झूठी कहानी गढ़ी ताकि संदेह उस पर न आए।
आरोपी के मेमोरेंडम कथन के आधार पर उसके किराये के मकान से टार्च बरामद की गई, जिसका प्लास्टिक का टुकड़ा मृतक के मुंह में मिला था। साक्ष्य छिपाने के कारण मामले में धारा 238 बीएनएस भी जोड़ी गई।
👮♂️ पुलिस टीम की बड़ी सफलता
इस अंधे कत्ल के सफल खुलासे में पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी एवं एसडीओपी धरमजयगढ़ सिद्धांत तिवारी के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी तमनार निरीक्षक प्रशांत राव आहेर, सहायक उपनिरीक्षक सुरीतलाल सिदार, प्रधान आरक्षक दिलदार कुरैशी, देव प्रसाद राठिया, आरक्षक पुष्पेंद्र सिदार, पुरुषोत्तम सिदार, रंजीत भगत सहित टीम के अन्य सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
💬 एसएसपी का संदेश
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि रायगढ़ पुलिस ने एक बार फिर प्रोफेशनल इन्वेस्टिगेशन के जरिए गंभीर मामले का खुलासा किया है और इस उत्कृष्ट कार्य के लिए पूरी टीम को पुरस्कृत किया जाएगा।
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