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सफलता की कहानी : कम लागत में अधिक मुनाफा: रबी फसल से बदली किसान की तस्वीर

जशपुरनगर, 23  जनवरी 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य में किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाएँ ज़मीन पर सकारात्मक परिणाम दे रही हैं। विभाग द्वारा किसानों को उचित तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराते हुए खरीफ के साथ-साथ रबी फसल की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय के अवसर मिल रहे हैं।

इसी क्रम में जशपुर जिले के मनोरा विकासखण्ड के ग्राम सोगड़ा निवासी सीमांत किसान श्री कीना राम ने खरीफ फसल के साथ-साथ रबी फसल की खेती अपनाकर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

सरकारी योजना से मिला संबल

कृषक श्री कीना राम ने बताया कि कृषि विभाग मनोरा के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा उन्हें रबी फसल की खेती के लिए मार्गदर्शन दिया गया। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) योजना के अंतर्गत उन्हें एक एकड़ भूमि के लिए उन्नत किस्म का गेहूं बीज अनुदान पर प्राप्त हुआ।

वैज्ञानिक खेती से बेहतर उत्पादन

किसान ने खेत की अच्छी तरह से तैयारी कर पर्याप्त मात्रा में गोबर खाद का उपयोग किया। समय-समय पर सिंचाई एवं खरपतवार प्रबंधन करने से फसल स्वस्थ रही। गेहूं की फसल में किसी भी प्रकार के कीट या रोग का प्रकोप नहीं हुआ, जिससे उत्पादन अच्छा होने की प्रबल संभावना है।

आय में बढ़ोतरी, आत्मनिर्भरता की ओर कदम

श्री कीना राम ने बताया कि उनके पास कुल 0.800 हेक्टेयर कृषि भूमि है। पूर्व में वे केवल खरीफ मौसम में धान की खेती करते थे तथा रबी में भूमि खाली छोड़ दी जाती थी। इससे चावल तो मिल जाता था, लेकिन गेहूं एवं अन्य खाद्य सामग्री बाजार से खरीदनी पड़ती थी।

अब रबी में गेहूं की खेती करने से न केवल अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है, बल्कि अपने उपयोग के लिए गुणवत्तायुक्त गेहूं और आटा भी उपलब्ध हो रहा है।

रबी फसल के प्रमुख लाभ

धान के बाद गेहूं की बिक्री से अतिरिक्त आमदनी

चावल के साथ-साथ गेहूं/आटे की घरेलू उपलब्धता

खाली समय व संसाधनों का बेहतर उपयोग

गुणवत्तापूर्ण उत्पादन

रबी में पड़ती भूमि का पूर्ण उपयोग

अन्य किसानों के लिए संदेश

कृषक श्री कीना राम ने जिले के सभी किसान भाइयों से अपील की है कि वे खरीफ फसल के साथ-साथ रबी फसल को भी अपनाएँ तथा रबी मौसम में दलहन और तिलहन फसलों की खेती करें, ताकि कम समय और कम लागत में अधिक आमदनी प्राप्त हो सके और खाद्य आत्मनिर्भरता सुनिश्चित की जा सके।

अंत में उन्होंने रबी फसल की खेती हेतु मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए कृषि विभाग एवं छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।


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