जशपुरनगर 26 फरवरी 2026/ असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार बनकर उभर रही है। श्रम विभाग जशपुर के माध्यम से जिले में इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। जिससे उन मेहनतकश श्रमिकों को लाभ मिल रहा है, जो देश के विकास में योगदान देने के बावजूद सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक असुरक्षा का सामना करते हैं। प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना एक स्वैच्छिक एवं अंशदायी पेंशन योजना है, जिसमें श्रमिक द्वारा जमा की गई मासिक राशि के बराबर योगदान केंद्र सरकार द्वारा भी किया जाता है। योजना के अंतर्गत श्रमिक को 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने के पश्चात न्यूनतम 3000 रुपए प्रतिमाह सुनिश्चित पेंशन प्रदान की जाती है। साथ ही यदि लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके जीवनसाथी को पेंशन राशि का 50 प्रतिशत अर्थात 1500 रुपए प्रतिमाह पारिवारिक पेंशन के रूप में प्राप्त करने का अधिकार होता है। योजना का लाभ लेने के लिए यह आवश्यक है कि आवेदक असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हो, उसकी आयु 18 से 40 वर्ष के बीच हो तथा उसकी मासिक आय 15 हजार रुपए या उससे कम हो।
अंशदान की राशि आयु अनुसार-
योजना में शामिल होने की आयु के आधार पर मासिक योगदान निर्धारित किया गया है। उदाहरण के रूप में यदि कोई श्रमिक 18 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ता है, तो उसे 55 रुपए प्रति माह अंशदान करना होता है और केंद्र सरकार द्वारा समान 55 रुपए का योगदान किया जाता है। इसी प्रकार 25 वर्ष की आयु में 80 रुपए, 30 वर्ष की आयु में 105 रुपए, 35 वर्ष की आयु में 150 रुपए तथा 40 वर्ष की आयु में 200 रुपए मासिक अंशदान निर्धारित है, जिसमें प्रत्येक स्थिति में केंद्र सरकार समान राशि का योगदान करती है।
आसान है नामांकन प्रक्रिया-
नामांकन प्रक्रिया को सरल बनाते हुए पात्र श्रमिक अपने निकटतम लोक सेवा केंद्र में आधार कार्ड और बैंक खाते के माध्यम से पंजीयन करा सकते हैं। प्रथम अंशदान राशि जमा करने के पश्चात आगामी किस्तें बैंक खाते से ऑटो-डेबिट के माध्यम से नियमित रूप से जमा होती रहती हैं। योजना का संचालन श्रम एवं रोजगार मंत्रालय भारत सरकार द्वारा किया जा रहा है तथा भारतीय जीवन बीमा निगम पेंशन निधि प्रबंधक के रूप में कार्यरत है।
किन-किन को मिल सकता है लाभ-
यह योजना विशेष रूप से रिक्शा चालक, स्ट्रीट वेंडर, ईंट भट्ठा मजदूर, घरेलू कामगार, कृषि श्रमिक, मनरेगा श्रमिक, निर्माण श्रमिक, मोची, बीड़ी श्रमिक, कूड़ा बीनने वाले, कृषि श्रमिक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, छोटे दुकानदार, सब्जी एवं फल विक्रेता, मछुआरे, पशुपालक, स्वयं सहायता समूह के सदस्य तथा अन्य असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों के लिए लागू है।
योजना से निकासी के लचीले नियम-
योजना में श्रमिकों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निकास प्रावधान भी लचीले बनाए गए हैं। यदि कोई श्रमिक 10 वर्ष से पहले योजना छोड़ देता है, तो उसे ब्याज सहित उसका अंशदान वापस प्राप्त हो जाता है। वहीं स्थायी विकलांगता अथवा मृत्यु की स्थिति में जीवनसाथी के पास योजना को जारी रखने अथवा जमा अंशदान वापस लेने का विकल्प उपलब्ध होता है। योजना से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी अथवा शिकायत के लिए सरकार द्वारा 24×7 टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-267-6888 उपलब्ध कराया गया है। प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए न केवल सामाजिक सुरक्षा का माध्यम बन रही है, बल्कि उनके भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित एवं सम्मानजनक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हो रही है।




















