जशपुर के बगीचा में 119 स्कूलों से शुरू हुई ‘नींव’, सादरी भाषा बनेगी प्रारंभिक शिक्षा का आधार ,18 संकुलों में बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम लागू ,शिक्षकों का पांच दिवसीय प्रशिक्षण जारी

जशपुर बगीचा। “हमारी मातृभाषा, हमारी पहचान” की भावना को शिक्षा से जोड़ते हुए जशपुर जिले में बच्चों को उनकी घर की भाषा के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। जिले के बगीचा एवं कुनकुरी विकासखंड के कुल 202 विद्यालयों में ‘नींव’ बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम लागू किया जा रहा है। इसके तहत बगीचा विकासखंड के 18 संकुलों के 119 प्राथमिक विद्यालयों में कार्यक्रम की शुरुआत की जा रही है।

‘नींव’ कार्यक्रम के तहत बच्चों की घर की भाषा सादरी को प्रारंभिक शिक्षण का आधार बनाया जाएगा। इसके बाद उन्हें धीरे-धीरे हिंदी एवं पाठ्यपुस्तक की भाषा से जोड़ा जाएगा। इससे बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज होगी और वे अपनी भाषा में समझ विकसित करते हुए आगे की शिक्षा से बेहतर तरीके से जुड़ सकेंगे।

मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा मिलने से बच्चों को अपनी बात कहने, सवाल पूछने और कक्षा की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का अवसर मिलेगा। इससे उनकी भाषायी समझ, अभिव्यक्ति, आत्मविश्वास और बुनियादी साक्षरता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

119 शिक्षकों का पांच दिवसीय प्रशिक्षण

कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बगीचा विकासखंड के 119 शिक्षकों का पांच दिवसीय प्रशिक्षण 8 से 12 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण को तीन जोन में विभाजित किया गया है। जोन-1 एवं जोन-2 के शिक्षकों का प्रशिक्षण शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बगीचा तथा जोन-3 के शिक्षकों का प्रशिक्षण शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय, पंडरापाठ में आयोजित किया जा रहा है।

प्रशिक्षण का शुभारंभ विकासखंड शिक्षा अधिकारी सुदर्शन सिंह पटेल, विकासखंड स्त्रोत केंद्र समन्वयक कृष्ण कुमार राठौड़ एवं एमआईएस कोऑर्डिनेटर ममता शर्मा के मार्गदर्शन एवं उपस्थिति में हुआ। उन्होंने शिक्षकों से प्रशिक्षण में सक्रिय सहभागिता निभाने तथा ‘नींव’ कार्यक्रम को बेहतर ढंग से समझकर विद्यालयों में प्रभावी रूप से लागू करने का आग्रह किया।

खेल, कहानी और गतिविधियों से होगा प्रशिक्षण

प्रशिक्षण से पूर्व DIET के नेतृत्व में जशपुर, कुनकुरी एवं बगीचा के 20 डीआरजी सदस्यों की सक्रिय सहभागिता से बहुभाषी शिक्षा के लिए विभिन्न शिक्षण संसाधन तैयार किए गए हैं। इनमें शिक्षक संदर्शिका, कार्यपुस्तिका, बिग बुक, कहानी की गठरी, चित्र चार्ट, सादरी एवं हिंदी के कविता पोस्टर, अक्षर कार्ड और ग्रिड कार्ड शामिल हैं।

पांच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान इन संसाधनों का उपयोग खेल, कहानी, कविता, समूह कार्य एवं गतिविधि आधारित शिक्षण के माध्यम से समझाया जाएगा। शिक्षकों को यह बताया जाएगा कि बच्चों की स्थानीय भाषा, अनुभव और परिवेश को कक्षा-कक्ष की गतिविधियों से जोड़कर सीखने को किस तरह अधिक रोचक और प्रभावी बनाया जा सकता है।

सादरी से हिंदी तक बनेगा सीखने का सहज सेतु

प्रशिक्षण के बाद 18 संकुलों के 119 विद्यालयों में शिक्षक इन संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करेंगे। बच्चों की घर की भाषा सादरी को आधार बनाकर हिंदी और पाठ्यपुस्तक की भाषा के बीच सहज सामंजस्य स्थापित किया जाएगा।

‘नींव’ बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को अपनी भाषा में सीखने, समझने और अभिव्यक्त होने का अवसर मिलेगा। मातृभाषा को शिक्षा की पहली सीढ़ी बनाकर उन्हें हिंदी और अन्य भाषाओं की ओर आगे बढ़ाने की यह पहल प्रारंभिक शिक्षा को अधिक सहज, रोचक और बाल-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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