16 गवाहों के बयान और चिकित्सकीय रिपोर्ट सहित साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि, पीड़िता को प्रतिकर दिलाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजी गई अनुशंसा
जशपुर/पत्थलगांव। जशपुर जिले में नाबालिग से दुष्कर्म और उसके गर्भवती होने से जुड़े मामले में पत्थलगांव स्थित विशेष अपर सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) बलराम कुमार देवांगन की अदालत ने आरोपी श्याम लाल यादव को दोषी ठहराते हुए उसके शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी को नाबालिग को उसके माता-पिता की संरक्षा से ले जाने और विवाह का झांसा देकर यौन शोषण करने के मामले में भी दोषी पाया। फैसले में विभिन्न धाराओं के तहत कारावास और अर्थदंड निर्धारित किया गया है।
यह मामला थाना बागबहार क्षेत्र से संबंधित है। विशेष प्रकरण क्रमांक 10/2022 में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक आर.पी. होता ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता, उसके माता-पिता, चिकित्सकों और विवेचना अधिकारी सहित कुल 16 गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध आरोप सिद्ध पाए।
शादी का झांसा देकर नाबालिग को ले जाने का आरोप
अभियोजन के अनुसार, 5 अगस्त 2021 को आरोपी श्याम लाल यादव, निवासी महेशपुर टोंगरीटोला, थाना बागबहार, ने 16 वर्ष से कम आयु की नाबालिग को शादी करने का झांसा देकर उसके माता-पिता की संरक्षा से ले गया। आरोप था कि वह नाबालिग को ग्राम चोरनीटोंगरी ले गया, जहां उसके साथ कई बार जबरन शारीरिक संबंध बनाए।
इस घटना के बाद पीड़िता गर्भवती हो गई। कुछ समय बाद उसके शारीरिक बदलाव देखकर उसकी मां ने पूछताछ की, तब मामले का खुलासा हुआ। परिजनों ने कांसाबेल के शासकीय अस्पताल में जांच कराई, जहां पीड़िता के सात माह की गर्भवती होने की पुष्टि हुई।
इसके बाद 10 मार्च 2022 को थाना बागबहार में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की और 12 मार्च 2022 को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
16 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्यों पर सुनवाई
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता और उसके माता-पिता के अलावा चिकित्सकीय विशेषज्ञ डॉ. श्रद्धा तिर्की और डॉ. अजीत कुमार बंदे, विवेचना अधिकारी सहित कुल 16 गवाहों के बयान कराए। पीड़िता की उम्र से संबंधित स्कूल की दाखिल-खारिज पंजी, जिसमें जन्मतिथि 26 मई 2007 दर्ज थी, और चिकित्सकीय रिपोर्ट को भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया।
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता आनंद सिन्हा ने प्राथमिकी दर्ज कराने में हुए विलंब और शरीर पर चोट के निशान नहीं होने जैसे बिंदु उठाए। हालांकि, न्यायालय ने मामले में प्रस्तुत गवाहियों और साक्ष्यों का मूल्यांकन करते हुए अभियोजन के आरोपों को सिद्ध माना।
अदालत ने अपने निर्णय में पीड़िता की उम्र, उसके बयान और उपलब्ध साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना। न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया गया।
तीन धाराओं में सजा और अर्थदंड
विशेष न्यायालय ने आरोपी श्याम लाल यादव को भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए निम्नलिखित दंडादेश दिया है:
- भारतीय दंड संहिता की धारा 363: तीन वर्ष का सश्रम कारावास और 1,000 रुपये का अर्थदंड। अर्थदंड नहीं चुकाने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास।
- भारतीय दंड संहिता की धारा 366: पांच वर्ष का सश्रम कारावास और 1,000 रुपये का अर्थदंड। अर्थदंड नहीं चुकाने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास।
- पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(ठ) सहपठित धारा 6: शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास और 1,000 रुपये का अर्थदंड। अर्थदंड नहीं चुकाने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास।
न्यायालय ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। साथ ही, आरोपी द्वारा विचारण के दौरान पहले से जेल में बिताई गई अवधि को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के तहत सजा में समायोजित करने का निर्देश दिया गया है। फैसले में इस अवधि का उल्लेख 12 मार्च 2022 से 16 अक्टूबर 2026 तक चार वर्ष, सात माह और चार दिन के रूप में किया गया है।
पीड़िता को प्रतिकर दिलाने के लिए अनुशंसा
मामले में पीड़िता को हुई शारीरिक और मानसिक पीड़ा को ध्यान में रखते हुए अदालत ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 33(8) और पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत उचित प्रतिकर दिलाने के लिए सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जशपुर को अनुशंसा सहित निर्णय की प्रति भेजने का निर्देश दिया है।
इसके अतिरिक्त, फैसले की प्रतिलिपि जिला दंडाधिकारी, जशपुर और जेल अधीक्षक को आवश्यक कार्रवाई एवं अनुपालन के लिए भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
न्यायालय के इस फैसले में आरोपी को शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही, पीड़िता को क्षतिपूर्ति दिलाने की प्रक्रिया के लिए भी निर्देश जारी किए गए हैं।