भगवान श्रीकृष्ण पर कथित विवादित टिप्पणी को लेकर सर्व यादव समाज छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष ने जताई कड़ी नाराजगी, धार्मिक मंचों से भाषा और मर्यादा का ध्यान रखने की दी नसीहत
जशपुर। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई कथित विवादित टिप्पणी का मामला अब छत्तीसगढ़ तक पहुंच गया है। सर्व यादव समाज छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश यदु ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस बयान की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि धार्मिक मंचों से बोलते समय संतों और कथावाचकों को अपनी भाषा, मर्यादा और शब्दों के चयन का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
रमेश यदु ने स्पष्ट कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों ही सनातन धर्म के आराध्य हैं। किसी एक को अपना और दूसरे को पराया बताने की मानसिकता उचित नहीं है। लोकप्रियता किसी भी व्यक्ति को दूसरों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का अधिकार नहीं देती।
क्या है पूरा मामला?
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में श्रीराम कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना करते हुए कथित तौर पर कहा था कि भगवान श्रीराम सीधे खड़े होते हैं, जबकि भगवान श्रीकृष्ण तीन जगह से टेढ़े होकर खड़े होते हैं। उन्होंने बांसुरी बजाने और धनुष चलाने को लेकर भी तुलना की थी।
इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कृष्ण भक्तों, ब्रज क्षेत्र के संतों और यादव समाज के लोगों ने आपत्ति जताई। नईदुनिया, जी न्यूज, टीवी9 यूपी, नवभारत टाइम्स और एनडीटीवी इंडिया सहित कई समाचार माध्यमों ने इस विवाद और उसके बाद धीरेंद्र शास्त्री की सफाई को लेकर खबरें प्रकाशित की हैं।
भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप पर टिप्पणी अनुचित : रमेश यदु
प्रदेश अध्यक्ष रमेश यदु ने भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप को लेकर टेढ़े-मेढ़े जैसे शब्दों के प्रयोग पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण हमारे आराध्य हैं। उनका संपूर्ण जीवन धर्म, नीति, ज्ञान, प्रेम, न्याय और लोककल्याण का संदेश देता है।
महाभारत के युद्ध में अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश देकर भगवान श्रीकृष्ण ने पूरी मानवता को कर्म, कर्तव्य और धर्म का मार्ग दिखाया। ऐसे आराध्य के स्वरूप और व्यक्तित्व को लेकर अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।
भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण में भेद करना उचित नहीं
रमेश यदु ने कहा कि भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, तो भगवान श्रीकृष्ण योगेश्वर हैं। दोनों ही सनातन परंपरा के महान आदर्श और करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक हैं।
यादव समाज भगवान श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानता है, वहीं भगवान श्रीराम के प्रति भी उतनी ही श्रद्धा और सम्मान रखता है। किसी भी धार्मिक व्यक्ति या कथावाचक को अपनी व्यक्तिगत मान्यताओं के आधार पर देवी-देवताओं के बीच विभाजन की बात नहीं करनी चाहिए।
लोकप्रियता के अहंकार में मर्यादा न भूलें
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री की लोकप्रियता देशभर में है और लाखों लोग उनकी कथा एवं प्रवचन सुनते हैं। ऐसे में उनके द्वारा कही गई प्रत्येक बात का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।
उन्हें अपनी लोकप्रियता और धार्मिक मंच की गरिमा को समझते हुए ऐसी किसी भी टिप्पणी से बचना चाहिए, जिससे किसी समाज, समुदाय अथवा श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हों।
उन्होंने कहा कि धार्मिक मंच समाज को जोड़ने का माध्यम होना चाहिए, न कि सामाजिक और धार्मिक मतभेद पैदा करने का। संतों और कथावाचकों की जिम्मेदारी है कि वे प्रेम, सद्भाव, भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश दें।
सार्वजनिक स्पष्टीकरण और माफी की मांग
रमेश यदु ने धीरेंद्र शास्त्री को अपनी वाणी पर संयम रखने की सलाह देते हुए मांग की कि वे अपनी कथित टिप्पणी पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण दें और समस्त संत समाज, यादव समाज तथा सनातन धर्मावलंबियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
उन्होंने कहा कि लोकप्रियता किसी भी व्यक्ति को दूसरों की धार्मिक आस्थाओं को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं देती। धार्मिक कथाओं और प्रवचनों में किसी भी समाज के आराध्य देवताओं के प्रति अपमानजनक अथवा उपेक्षापूर्ण भाषा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
दोनों हमारे आराध्य, आस्था और सम्मान अटूट
अंत में प्रदेश अध्यक्ष रमेश यदु ने कहा कि भगवान श्रीराम भी हमारे आराध्य हैं और भगवान श्रीकृष्ण भी हमारे आराध्य हैं। दोनों के प्रति हमारी आस्था, श्रद्धा और सम्मान अटूट है।
उन्होंने समाज में एकता, सद्भाव और धार्मिक मर्यादा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि धर्म का उद्देश्य लोगों को बांटना नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सद्भाव की भावना विकसित करना होना चाहिए।