पटवारियों की हड़ताल पर प्रशासन का बड़ा प्रहार!  8 पटवारी निलंबित , कुसमी में भी 3 के निलंबन की…

सरगुजा संभाग के 819 पटवारियों को शो-कॉज नोटिस, बलरामपुर जिले के 150 पटवारी भी कार्रवाई के दायरे में; राज्योत्सव के दिन निलंबन आदेशों की प्रतियां जलाकर संघ ने जताया विरोध

बलरामपुर-रामानुजगंज। छत्तीसगढ़ में राजस्व पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल अब प्रशासन और पटवारी संघ के बीच बड़े टकराव का रूप लेती दिखाई दे रही है। बलरामपुर जिले में प्रशासन ने कार्रवाई तेज करते हुए वाड्रफनगर क्षेत्र के पांच पटवारियों को निलंबित कर दिया है। इसके बाद रामानुजगंज एसडीएम द्वारा तीन अन्य पटवारियों के निलंबन की कार्रवाई भी सामने आई है। वहीं, कुसमी क्षेत्र के तीन पटवारियों के निलंबन की सूचना पटवारी संघ को मिली है।

लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से राजस्व विभाग में हलचल मची हुई है। दूसरी तरफ सरगुजा संभाग के सभी छह जिलों में हड़ताल कर रहे 819 पटवारियों को काम पर लौटने के निर्देश के साथ कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें अकेले बलरामपुर जिले के 150 पटवारी शामिल हैं।

वाड्रफनगर में पांच पटवारियों पर गिरी निलंबन की गाज

बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर राजस्व अनुभाग में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा पांच पटवारियों को निलंबित करने का आदेश जारी किया गया है। यह कार्रवाई नोटिस जारी किए जाने के बावजूद ड्यूटी पर वापस नहीं लौटने के मामले में की गई है।

निलंबित पटवारियों में शामिल हैं—

  1. गौतम पटेल – तहसील वाड्रफनगर
  2. पन्नेलाल सोनवानी – तहसील रघुनाथनगर
  3. कपिलदेव भगत – तहसील रघुनाथनगर
  4. धीरेन्द्र उरमलिया – तहसील रघुनाथनगर
  5. शैलेष मेहता – तहसील वाड्रफनगर

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित पटवारियों को पहले 15 अक्टूबर 2026 को कार्यभार ग्रहण करने के लिए नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद 31 अक्टूबर को दोबारा नोटिस जारी कर 1 नवंबर तक अनिवार्य रूप से कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए थे।

निर्धारित समय में कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर ब्रेक इन सर्विस की कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। इसके बावजूद ड्यूटी पर उपस्थित नहीं होने और जवाब प्रस्तुत नहीं करने के मामले में एसडीएम ने निलंबन आदेश जारी किए।

रामानुजगंज में एसडीएम ने तीन पटवारियों को किया निलंबित

वाड्रफनगर की कार्रवाई के बाद रामानुजगंज क्षेत्र में भी प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। हिन्दुस्थान समाचार की 3 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, रामानुजगंज एसडीएम द्वारा तीन पटवारियों को निलंबित किया गया है।

निलंबित पटवारियों में रामानुजगंज की रिनू पटेल तथा रामचंद्रपुर के अनिल भगत और रजनी सरोज खलखो शामिल हैं।

इस कार्रवाई के साथ ही जिले में निलंबित पटवारियों की संख्या और बढ़ गई है। वाड्रफनगर के पांच और रामानुजगंज के तीन पटवारियों को मिलाकर अब तक आठ पटवारियों के निलंबन की जानकारी मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है।

कुसमी में भी तीन पटवारियों के निलंबन की सूचना

इधर, कुसमी क्षेत्र से भी तीन पटवारियों के निलंबन की सूचना पटवारी संघ को मिलने की बात सामने आई है। हिन्दुस्थान समाचार की रिपोर्ट में संघ के पदाधिकारियों के हवाले से इसका उल्लेख किया गया है।

हालांकि, कुसमी के इन तीन पटवारियों के नाम और निलंबन आदेशों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए इस मामले को फिलहाल संघ को मिली सूचना के रूप में ही देखा जा रहा है।

यदि कुसमी की कार्रवाई की भी आधिकारिक पुष्टि होती है, तो बलरामपुर जिले में निलंबित पटवारियों की संख्या बढ़कर 11 हो सकती है।

सरगुजा संभाग के 819 पटवारियों को शो-कॉज नोटिस

पटवारियों की हड़ताल को लेकर सरगुजा संभाग प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाया है। संभागायुक्त नरेंद्र दुग्गा ने संभाग के सभी छह जिलों के एसडीएम को हड़ताल पर गए पटवारियों को नोटिस जारी कर तत्काल कर्तव्य पर उपस्थित होने के निर्देश देने को कहा है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संभाग के कुल 819 पटवारियों को शो-कॉज नोटिस जारी किए गए हैं। जिलेवार आंकड़े इस प्रकार हैं— जिला पटवारियों की संख्या सरगुजा 216 सूरजपुर 192 जशपुर 150 बलरामपुर 150 कोरिया 60 एमसीबी 51 कुल819

निर्देशों के अनुसार, निर्धारित तिथि पर मुख्यालय में उपस्थिति नहीं देने और स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं करने वाले पटवारियों के खिलाफ एकपक्षीय कार्रवाई की जा सकती है।

राज्योत्सव के दिन भी जारी रहा धरना, निलंबन आदेशों की प्रतियां जलाईं

1 नवंबर को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर जहां प्रदेशभर में राज्योत्सव मनाया जा रहा था, वहीं बलरामपुर जिले में पटवारी अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे रहे।

3 नवंबर को प्रकाशित हिन्दुस्थान समाचार की रिपोर्ट के अनुसार, पटवारियों ने शाम को निलंबन आदेशों की प्रतियां जलाकर प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ विरोध जताया।

राजस्व पटवारी संघ के प्रांतीय प्रवक्ता विनय पांडेय ने आरोप लगाया कि मांगों का निराकरण करने के बजाय शासन आंदोलनरत पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। संघ के अनुसार, बलरामपुर जिले में पहले पांच पटवारियों पर कार्रवाई हुई और इसके बाद रामानुजगंज तथा कुसमी क्षेत्र में भी निलंबन की कार्रवाई की जानकारी सामने आई।

पीवी ऐप की समस्या, वेतन विसंगति और पदोन्नति प्रमुख मांगें

राजस्व पटवारी संघ 13 अक्टूबर 2026 से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन कर रहा है।

संघ की प्रमुख मांगों में—

  • पीवी ऐप की तकनीकी एवं व्यावहारिक समस्याओं का निराकरण।
  • वेतन विसंगति दूर करना।
  • राजस्व निरीक्षक (आरआई) पद पर पदोन्नति का अवसर देना।
  • निलंबित पटवारियों की बहाली।

संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि पीवी ऐप में आ रही तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं के कारण किसानों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए पटवारियों के पास कई बार अपने लॉगिन आईडी में आवश्यक विकल्प उपलब्ध नहीं होते।

संघ का यह भी कहना है कि पटवारी संवर्ग में पदोन्नति के पर्याप्त अवसर नहीं होने के कारण कई कर्मचारी पूरी सेवा अवधि एक ही पद पर रहते हुए सेवानिवृत्त हो जाते हैं।

धान गिरदावरी और डिजिटल क्रॉप सर्वे पर बढ़ता असर

पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर राजस्व विभाग के महत्वपूर्ण कार्यों पर पड़ रहा है। इनमें धान गिरदावरी, डिजिटल क्रॉप सर्वे, किसानों के भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन, नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्रों से जुड़े कार्य शामिल हैं।

विशेषकर आगामी धान खरीदी सीजन को देखते हुए गिरदावरी और डिजिटल क्रॉप सर्वे का समय पर पूरा होना बेहद जरूरी है। ऐसे में हड़ताल लंबी खिंचने पर किसानों और आम नागरिकों की परेशानियां बढ़ सकती हैं।

प्रशासन की सख्ती बनाम पटवारी संघ का आंदोलन, समाधान कब?

बलरामपुर जिले में लगातार सामने आ रही निलंबन की कार्रवाइयों और सरगुजा संभाग के 819 पटवारियों को जारी नोटिस के बाद यह मामला अब और गंभीर होता दिखाई दे रहा है।

एक तरफ प्रशासन शासकीय कामकाज प्रभावित होने और कर्मचारियों की मुख्यालय में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सख्ती बरत रहा है, वहीं दूसरी तरफ पटवारी संघ अपनी मांगों के निराकरण और निलंबित कर्मचारियों की बहाली पर अड़ा हुआ है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन की सख्ती से पटवारी काम पर लौटेंगे या आंदोलन और तेज होगा? किसानों की गिरदावरी, डिजिटल क्रॉप सर्वे और आम नागरिकों के जरूरी राजस्व कार्यों को लेकर बनी स्थिति का समाधान आखिर कब निकलेगा? फिलहाल प्रशासन और पटवारी संघ के बीच जारी गतिरोध पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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