रायपुर। क्या आप जानते हैं कि भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का पहली बार प्रकाशन किसी सरकारी दस्तावेज या अखबार में नहीं, बल्कि एक साहित्यिक पत्रिका में हुआ था? जी हां, 7 नवंबर 1875 को बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा संपादित बंगाली पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में पहली बार वंदे मातरम् प्रकाशित हुआ था। आज इस ऐतिहासिक घटना को 151 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
उपन्यास में शामिल होने से पहले ही रचा जा चुका था गीत
वंदे मातरम् को लेकर एक दिलचस्प तथ्य यह है कि यह गीत मूल रूप से उपन्यास ‘आनंदमठ’ के लिए नहीं लिखा गया था। इसकी रचना पहले स्वतंत्र रूप से हुई थी। बाद में वर्ष 1882 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने इसे अपने प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया। धीरे-धीरे यह गीत अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ स्वतंत्रता सेनानियों की आवाज बन गया।
रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया
28 दिसंबर 1896 को कोलकाता में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने वंदे मातरम् को सार्वजनिक रूप से गाया। इसके बाद यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रमुख प्रतीक बन गया।
एक गीत, जिसने आंदोलन को दी नई पहचान
वर्ष 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में चले स्वदेशी आंदोलन के दौरान वंदे मातरम् एक प्रभावशाली नारे के रूप में सामने आया। इसकी गूंज देश के अलग-अलग हिस्सों में सुनाई देने लगी। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में सम्मानित स्थान प्रदान किया।
आज की तारीख से जुड़े दो महान वैज्ञानिक
7 नवंबर की तारीख विज्ञान के लिहाज से भी खास है। इसी दिन वर्ष 1888 में भारत के महान वैज्ञानिक सीवी रमन का जन्म हुआ था। वहीं वर्ष 1867 में इसी दिन नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक मैरी क्यूरी का जन्म हुआ था।
इस तरह 7 नवंबर भारतीय साहित्य, स्वतंत्रता आंदोलन और विज्ञान के इतिहास में अपनी अलग पहचान रखता है।