CG Patwari Strike: छत्तीसगढ़ में पटवारियों की हड़ताल का 26वां दिन, 50 से अधिक निलंबित और 1000 से ज्यादा को नोटिस; 15 नवंबर से धान खरीदी पर बढ़ी चुनौती

रायपुर। छत्तीसगढ़ में राजस्व पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को शनिवार को 26 दिन पूरे हो गए, लेकिन शासन और पटवारी संघ के बीच जारी गतिरोध अब तक खत्म नहीं हुआ है। 13 अक्टूबर 2026 से शुरू हुआ यह आंदोलन अब प्रदेश में प्रशासन और कर्मचारी संगठन के बीच बड़े टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है। एक तरफ राजस्व पटवारी अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ शासन ने काम पर लौटने के निर्देश, कारण बताओ नोटिस, निलंबन और सेवा में व्यवधान (Break in Service) जैसी प्रशासनिक कार्रवाइयां शुरू कर दी हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब सबसे बड़ी चिंता 15 नवंबर 2026 से शुरू होने वाली समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदी को लेकर है। धान खरीदी से पहले गिरदावरी, डिजिटल क्रॉप सर्वे (Digital Crop Survey), फसल सत्यापन और किसानों के राजस्व अभिलेखों से जुड़े कार्य महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में पटवारियों की लगातार अनुपस्थिति से इन कार्यों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। प्रदेश में धान खरीदी की तैयारियों के बीच सरकार और पटवारी संघ के बीच सहमति नहीं बनने से प्रशासनिक चुनौती भी बढ़ती जा रही है।

50 से अधिक पटवारी निलंबित, प्रांतीय अध्यक्ष भागवत कश्यप पर भी कार्रवाई

पटवारियों की हड़ताल के बीच प्रदेश के अलग-अलग जिलों में निलंबन की कार्रवाई लगातार सामने आ रही है। 2 नवंबर को प्रकाशित हरिभूमि की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेशभर में 50 से अधिक पटवारियों को निलंबित किया जा चुका था। निलंबित होने वालों में राजस्व पटवारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष भागवत कश्यप भी शामिल हैं।

बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर क्षेत्र में पांच पटवारियों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद रामानुजगंज क्षेत्र में तीन अन्य पटवारियों के निलंबन की खबर प्रकाशित हुई। वहीं कुसमी क्षेत्र के तीन पटवारियों के निलंबन की सूचना भी पटवारी संघ की ओर से दी गई, हालांकि इन तीन मामलों के आधिकारिक आदेशों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

धमतरी जिले में भी प्रशासन ने नगरी और मगरलोड क्षेत्र के दो पटवारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है।

इस तरह आंदोलन के दौरान निलंबन की कार्रवाई प्रदेश के कई जिलों तक पहुंच चुकी है। प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध करते हुए पटवारी संघ लगातार निलंबित कर्मचारियों और संगठन के पदाधिकारियों की बहाली की मांग कर रहा है।

1000 से ज्यादा पटवारियों को नोटिस, ब्रेक इन सर्विस की चेतावनी से बढ़ा विवाद

सरकार की कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित नहीं है। हड़ताल पर गए पटवारियों को काम पर लौटने के निर्देश देते हुए बड़ी संख्या में कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए हैं।

2 नवंबर की नईदुनिया की रिपोर्ट के अनुसार बिलासपुर जिले के 259 पटवारियों को नोटिस जारी किए गए थे। वहीं सरगुजा संभाग के छह जिलों के 819 पटवारियों को काम पर लौटने के निर्देश के साथ नोटिस जारी किए गए।

सरगुजा संभाग में नोटिस प्राप्त करने वाले पटवारियों का जिलेवार विवरण इस प्रकार है: जिला नोटिस प्राप्त पटवारी सरगुजा 216 सूरजपुर 192 बलरामपुर 150 जशपुर 150 कोरिया 60 मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर 51 कुल819

इसके अलावा 5 नवंबर को द रूरल प्रेस की रिपोर्ट में प्रदेशभर में 1000 से अधिक पटवारियों को ब्रेक इन सर्विस (Break in Service) का नोटिस दिए जाने का दावा किया गया है।

ब्रेक इन सर्विस की कार्रवाई को लेकर पटवारी संघ में नाराजगी है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों का समाधान करने के बजाय प्रशासनिक कार्रवाई के जरिए आंदोलन को समाप्त कराने का प्रयास किया जा रहा है।

धमतरी में 148 पटवारी हड़ताल पर, नगरी और मगरलोड के दो पटवारी निलंबित

पटवारियों की हड़ताल का असर धमतरी जिले में भी देखने को मिल रहा है। 2 नवंबर की प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार जिले में कुल 168 पटवारी कार्यरत हैं, जिनमें से लगभग 148 पटवारी हड़ताल में शामिल थे। शेष 20 प्रशिक्षु पटवारी आंदोलन में शामिल नहीं बताए गए।

प्रशासन ने नगरी क्षेत्र के पटवारी चिम्मन लाल ध्रुव और मगरलोड क्षेत्र के पटवारी चेतन्य नेताम को निलंबित किया है।

इसके अलावा धमतरी, नगरी, मगरलोड, भखारा और कुरुद क्षेत्र के पटवारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए हैं। जिले में हड़ताल और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच राजस्व कार्यों को लेकर स्थिति लगातार चर्चा में बनी हुई है।

जांजगीर-चांपा में भी पटवारियों का आंदोलन जारी, निलंबन वापसी की मांग

जांजगीर-चांपा जिले में भी 13 अक्टूबर से पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। 3 नवंबर को अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार जिले के पटवारियों ने संगठन के पदाधिकारियों के निलंबन के विरोध में प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था।

पटवारी संघ ने निलंबन की कार्रवाई वापस लेने की मांग की है। संघ के सदस्यों का कहना है कि उनकी लंबित मांगों का निराकरण करने के बजाय संगठन के पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। इसी विरोध के चलते जिले में भी आंदोलन जारी है।

बलरामपुर में बढ़ा टकराव, निलंबन आदेशों की प्रतियां जलाकर जताया विरोध

बलरामपुर जिले में पटवारियों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति अधिक देखने को मिल रही है। वाड्रफनगर क्षेत्र में पांच पटवारियों के निलंबन के बाद रामानुजगंज क्षेत्र में तीन अन्य पटवारियों पर कार्रवाई की खबर सामने आई। कुसमी क्षेत्र के तीन पटवारियों के निलंबन की सूचना भी संगठन को मिली है।

इसके अलावा जिले के लगभग 150 पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।

प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में पटवारियों ने राज्योत्सव के दौरान निलंबन आदेशों की प्रतियां जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस घटना के जरिए पटवारी संघ ने निलंबन की कार्रवाई वापस लेने और अपनी मांगों के निराकरण की मांग उठाई।

राजधानी रायपुर में भी आंदोलन जारी, तूता से मठपुरैना पहुंचे पटवारी

राजधानी रायपुर में पटवारियों का धरना पहले तूता स्थित धरनास्थल पर चल रहा था। वहां से हटाए जाने के बाद आंदोलनकारी पटवारियों ने मठपुरैना स्थित हनुमान मंदिर परिसर में अपना आंदोलन जारी रखा।

6 नवंबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार यहां आंदोलनकारी पटवारियों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया और सरकार से अपनी मांगों पर विचार करने की अपील की।

संघ का कहना है कि प्रशासनिक दबाव और निलंबन की कार्रवाई के बावजूद आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। पटवारी अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखने की बात कह रहे हैं।

प्रदेश में आखिर कितने पटवारी हड़ताल पर?

छत्तीसगढ़ में पटवारियों की हड़ताल का दायरा कई जिलों तक पहुंच चुका है। बिलासपुर, सरगुजा संभाग, धमतरी, बलरामपुर और जांजगीर-चांपा से सामने आई जानकारियां आंदोलन की व्यापकता को दर्शाती हैं।

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार:

  • बिलासपुर: 259 पटवारियों को नोटिस जारी।
  • सरगुजा संभाग: छह जिलों के 819 पटवारियों को नोटिस।
  • धमतरी: लगभग 148 पटवारी हड़ताल में शामिल बताए गए।
  • जांजगीर-चांपा: 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी।
  • बलरामपुर: लगभग 150 पटवारियों को कारण बताओ नोटिस।

इन जिलों से सामने आ रहे आंकड़ों के बीच प्रदेशभर में हड़ताल पर बैठे पटवारियों की कुल संख्या का कोई प्रमाणित और अद्यतन राज्यस्तरीय आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। हालांकि अलग-अलग जिलों में नोटिस और निलंबन की कार्रवाई से साफ है कि आंदोलन का असर प्रदेश के राजस्व प्रशासन तक पहुंच चुका है।

क्या हैं पटवारी संघ की प्रमुख मांगें?

राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़ ने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया है। संघ की प्रमुख मांगों में निम्नलिखित मुद्दे शामिल हैं:

  1. पीवी ऐप (PV App) में आ रही तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं का समाधान।
  2. वेतन विसंगति दूर करना।
  3. पटवारियों को पदोन्नति के पर्याप्त अवसर देना।
  4. राजस्व निरीक्षक (Revenue Inspector – RI) पद पर पदोन्नति की व्यवस्था।
  5. निलंबित पटवारी संघ पदाधिकारियों और कर्मचारियों की बहाली।
  6. डिजिटल कार्यों और फसल सत्यापन से संबंधित व्यावहारिक समस्याओं का निराकरण।

पटवारी संघ का कहना है कि पीवी ऐप में कई ऐसी तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएं हैं, जिनका समाधान पटवारी अपने स्तर पर नहीं कर सकते। इन समस्याओं के कारण राजस्व संबंधी कामकाज और किसानों से जुड़े कार्यों में भी परेशानियां आती हैं।

संघ का तर्क है कि इन समस्याओं का निराकरण किए बिना पटवारियों पर लगातार अतिरिक्त डिजिटल कार्यों का दबाव बनाया जा रहा है।

15 नवंबर से धान खरीदी, गिरदावरी और डिजिटल क्रॉप सर्वे पर टिकी निगाहें

छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर 2026 से समर्थन मूल्य (MSP – Minimum Support Price) पर धान खरीदी शुरू होने वाली है। खरीफ विपणन वर्ष की धान खरीदी से पहले किसानों के पंजीयन, गिरदावरी, डिजिटल क्रॉप सर्वे और फसल संबंधी अभिलेखों का सत्यापन महत्वपूर्ण कार्य हैं।

पटवारियों की हड़ताल के चलते इन कार्यों की गति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। धान खरीदी की तैयारियों के बीच राजस्व अमले की अनुपस्थिति प्रशासन के लिए चुनौती बन सकती है।

इसका असर केवल धान खरीदी तक सीमित नहीं है। आम नागरिकों को भी राजस्व संबंधी सेवाओं में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इनमें आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों के सत्यापन, जमीन का नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और राजस्व अभिलेखों में सुधार जैसे कार्य शामिल हैं।

इसके अलावा फसल क्षति सर्वेक्षण और किसानों को राहत देने की प्रक्रिया पर भी पटवारियों की अनुपस्थिति का असर पड़ने की आशंका है।

ESMA लगाने की चर्चा, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की काम पर लौटने की अपील

पटवारियों की हड़ताल समाप्त कराने के लिए सरकार की ओर से प्रशासनिक सख्ती के बीच अब एस्मा (ESMA – Essential Services Maintenance Act) को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

6 नवंबर को प्रकाशित पीपुल्स अपडेट की रिपोर्ट के अनुसार सरकार हड़ताल समाप्त कराने के लिए एस्मा लागू करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। हालांकि 7 नवंबर 2026 तक एस्मा लागू करने का कोई आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है।

वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी पटवारियों से काम पर लौटने की अपील की है। सरकार की ओर से काम पर लौटने के निर्देश और प्रशासनिक कार्रवाई जारी है, जबकि पटवारी संघ अपनी मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहा है।

धान खरीदी से पहले समाधान निकलेगा या जारी रहेगा टकराव?

छत्तीसगढ़ में पटवारियों की हड़ताल अब केवल कर्मचारी संगठनों की मांगों तक सीमित नहीं रह गई है। इसका असर राजस्व प्रशासन, किसानों से जुड़े कार्यों और आगामी धान खरीदी की तैयारियों पर भी पड़ने की आशंका है।

एक तरफ शासन निलंबन, नोटिस और काम पर लौटने के निर्देशों के जरिए हड़ताल समाप्त कराने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पटवारी संघ निलंबित कर्मचारियों की बहाली और लंबित मांगों के निराकरण पर अड़ा हुआ है।

15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी अब इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव बन गई है। यदि इससे पहले शासन और पटवारी संघ के बीच सहमति नहीं बनती है तो आने वाले दिनों में प्रशासनिक व्यवस्था के सामने और चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

फिलहाल 7 नवंबर 2026 की स्थिति में प्रदेश में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है। अब देखना होगा कि धान खरीदी शुरू होने से पहले सरकार और पटवारी संघ के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या कर्मचारियों का आंदोलन आगे भी जारी रहता है।

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