छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा बनेगी देश के विकास का ग्रोथ इंजन: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध खनिज संपदा का समुचित, वैज्ञानिक और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग कर प्रदेश को देश के विकास का प्रमुख ग्रोथ इंजन बनाया जाएगा। खनिज संसाधनों से प्राप्त आर्थिक लाभ का सीधा फायदा स्थानीय लोगों, विशेषकर खनन प्रभावित क्षेत्रों और जनजातीय समुदायों तक पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री साय मंगलवार को अपने निवास कार्यालय रायपुर में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की उपस्थिति में आयोजित खनन एवं कोयला क्षेत्र की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में खनिज अन्वेषण, खनिज ब्लॉकों की नीलामी, कोयला उत्पादन, क्रिटिकल एवं रणनीतिक खनिजों के विकास, जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) की राशि के उपयोग तथा खनन गतिविधियों में आधुनिक तकनीक के समावेश सहित विभिन्न विषयों की विस्तृत समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में छत्तीसगढ़ की भूमिका महत्वपूर्ण है। देश की बढ़ती औद्योगिक और आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप खनिज संसाधनों का अन्वेषण और उपयोग आवश्यक है। राज्य सरकार केंद्र के साथ समन्वय स्थापित कर इस दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि खनन गतिविधियों के विस्तार के साथ पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय आवश्यकताओं, रोजगार के अवसरों और प्रभावित समुदायों के हितों को प्राथमिकता दी जा रही है। विकास का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब खनिज संपदा से प्राप्त आर्थिक लाभ प्रभावित व्यक्ति तक पहुंचे।

खनन क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के नवाचारों की केंद्रीय मंत्री ने की सराहना

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खनन क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों, राजस्व वृद्धि और तकनीक आधारित प्रशासनिक सुधारों की विशेष सराहना की।

उन्होंने खनिज ऑनलाइन 2.0 पोर्टल, ड्रोन आधारित निगरानी, खनन गतिविधियों की स्टार रेटिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था को महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि राज्य सरकार खनिज संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, पारदर्शिता और सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रही है।

केंद्रीय मंत्री ने खनिज राजस्व बढ़ाने और प्रशासनिक दक्षता में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने बस्तर के जनजातीय समुदायों से टिन अयस्क की पारदर्शी खरीदी और बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने के लिए विकसित TIN पोर्टल की विशेष प्रशंसा की।

खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास में डीएमएफ राशि का अधिकतम उपयोग करें: रेड्डी

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) की राशि के प्रभावी उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों और उनके निकटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना डीएमएफ का प्रमुख उद्देश्य है।

उन्होंने डीएमएफ राशि का अधिकतम उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आजीविका, अधोसंरचना और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित रहे जिलों को डीएमएफ राशि के उपयोग के संबंध में नियमों के तहत विशेष शिथिलता प्रदान की गई है। संबंधित जिलों में इस प्रावधान का अधिकतम लाभ उठाकर स्थानीय समुदायों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को गति दी जाए।

नए खनिजों की खोज और अन्वेषण गतिविधियों में तेजी लाने पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने प्रदेश में नए खनिज भंडारों की खोज और अन्वेषण गतिविधियों को तेज करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि देश की भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए परंपरागत खनिजों के साथ-साथ क्रिटिकल एवं रणनीतिक खनिजों के अन्वेषण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे बजट और संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। उन्होंने खनिज ब्लॉकों की नीलामी के बाद उन्हें शीघ्र संचालन में लाने के लिए आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों और प्रक्रियाओं में तेजी लाने के निर्देश भी दिए।

खनन पूर्ण होने के बाद खदानों का वैज्ञानिक तरीके से समापन सुनिश्चित हो

केंद्रीय मंत्री रेड्डी ने खनन पूर्ण हो चुकी खदानों के वैज्ञानिक और व्यवस्थित समापन पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि जिन खदानों में खनन कार्य पूरा हो चुका है, उनका समापन निर्धारित वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप किया जाए।

खनन समाप्त होने के बाद संबंधित भूमि का बेहतर और उपयोगी पुनः उपयोग सुनिश्चित करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने खनन गतिविधियों के दौरान और उनके समापन के बाद पर्यावरणीय संतुलन, भूमि पुनर्स्थापन और स्थानीय समुदायों के हितों का ध्यान रखने पर जोर दिया।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को खनिजों से मिला 16,738 करोड़ रुपये का राजस्व

बैठक में खनिज संसाधन विभाग के समन्वय से भू-विज्ञान एवं खनिकर्म संचालनालय द्वारा विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।

प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को खनिजों से 16,738 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रदेश में कोयला, लौह अयस्क, चूना पत्थर और टिन के उत्पादन में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है।

इस दौरान लिथियम और टिन सहित विभिन्न खनिज ब्लॉकों की नीलामी, आवंटित खदानों के संचालन की स्थिति और नए खनिज संसाधनों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई।

लिथियम, ग्रेफाइट और दुर्लभ मृदा तत्वों के विकास पर विशेष फोकस

बैठक में छत्तीसगढ़ में उपलब्ध संभावित क्रिटिकल एवं रणनीतिक खनिज संसाधनों के विकास पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

इनमें लिथियम, ग्रेफाइट, दुर्लभ मृदा तत्व, वैनेडियम, गैलियम, फॉस्फोराइट और टिन जैसे महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं।

केंद्रीय मंत्री ने देश की बढ़ती औद्योगिक आवश्यकताओं और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इन खनिजों का अन्वेषण और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही खनिज आधारित उद्योगों के विकास और देश के भीतर मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई।

कोयला उत्पादन बढ़ाने और लंबित खनिज ब्लॉकों को शीघ्र संचालित करने पर चर्चा

समीक्षा बैठक में प्रदेश के चालू एवं गैर-संचालित कोयला ब्लॉकों की स्थिति, वैधानिक स्वीकृतियों, उत्पादन क्षमता तथा परिचालन संबंधी चुनौतियों की समीक्षा की गई।

केंद्रीय मंत्री रेड्डी ने कोयला उत्पादन में तेजी लाने, खनन परियोजनाओं के लिए आवश्यक अधोसंरचना विकसित करने और विभिन्न विभागों एवं एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया।

इस दौरान कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के साथ भी समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें कोयला उत्पादन, परिचालन प्रदर्शन, जिला स्तर पर लंबित विषयों और खदानों के संचालन में आने वाली समस्याओं पर चर्चा हुई। संबंधित जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

डिजिटल तकनीक से खनन गतिविधियों की निगरानी होगी प्रभावी

बैठक में खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित तकनीक आधारित पहलों की जानकारी दी गई।

प्रस्तुतीकरण में खनिज ऑनलाइन 2.0, डीएमएफ पोर्टल 2.0, ड्रोन आधारित निगरानी तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक से खनिज परिवहन की निगरानी जैसी व्यवस्थाओं को रेखांकित किया गया।

खनन गतिविधियों की स्टार रेटिंग जैसी पहल भी निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताई गई। इन पहलों का उद्देश्य नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाना, निगरानी व्यवस्था मजबूत करना तथा अवैध खनन एवं खनिज परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।

TIN पोर्टल से बस्तर के जनजातीय टिन संग्राहकों को मिल रहा बेहतर मूल्य

बैठक में बस्तर के जनजातीय समुदायों को खनिज संसाधनों से आर्थिक लाभ और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित TIN (ट्राइबल इंसेंटिव्स ऑन नेचुरल रिसोर्सेज) पोर्टल की जानकारी दी गई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 31 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम लिमिटेड द्वारा इंडियन ओवरसीज बैंक के सहयोग से विकसित इस पोर्टल का शुभारंभ किया था।

पोर्टल के माध्यम से बस्तर संभाग में जनजातीय समुदायों द्वारा संग्रहित टिन अयस्क की खरीदी, परिवहन, बिक्री, मूल्य निर्धारण और भुगतान की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल एवं पारदर्शी बनाया जा रहा है।

इसमें लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) आधारित मूल्य निर्धारण की व्यवस्था की गई है, जिससे टिन संग्राहकों को बाजार की स्थिति के अनुरूप पारदर्शी मूल्य मिल सकेगा। वहीं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में पहुंचाई जा रही है।

एक वर्ष में टिन संग्राहकों को मिलने वाले भुगतान में चार गुने से अधिक वृद्धि

छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में 8,707 किलोग्राम से अधिक टिन अयस्क की खरीदी के एवज में लगभग 90.82 लाख रुपये का भुगतान किया गया था।

वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 20,895 किलोग्राम से अधिक टिन अयस्क की खरीदी के लिए लगभग 3 करोड़ 81 लाख रुपये का भुगतान किया गया।

इस प्रकार एक वर्ष में जनजातीय संग्राहकों को टिन अयस्क की खरीदी के एवज में किए गए भुगतान में चार गुने से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।

वर्तमान में बस्तर संभाग में छह टिन क्रय केंद्रों के माध्यम से जनजातीय हितग्राहियों से टिन अयस्क की खरीदी की जा रही है। इनमें दंतेवाड़ा जिले के बचेली, कटेकल्याण और चिकपाल तथा सुकमा जिले के तोंगपाल, नामा और चिंतलनार शामिल हैं। इसके अतिरिक्त तीन नए क्रय केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।

पोर्टल में डिजिटल पंजीयन, क्यूआर कोड आधारित सत्यापन, एसएमएस अलर्ट और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

बैठक में बस्तर क्षेत्र में कोलंबाइट संसाधनों के विकास की पहल का भी उल्लेख किया गया। इन प्रयासों का उद्देश्य खनिज संसाधनों के जिम्मेदारीपूर्ण विकास के साथ स्थानीय जनजातीय समुदायों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है।

बैठक में केंद्र और राज्य सरकार ने खनन एवं कोयला क्षेत्र के विकास, क्रिटिकल मिनरल्स के अन्वेषण, निवेश आकर्षित करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और खनन प्रभावित क्षेत्रों के समावेशी विकास के लिए आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक में ये अधिकारी रहे उपस्थित

बैठक में छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव विकास शील, एसीएस मनोज कुमार पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, कोल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक बी. साईराम, एसईसीएल के सीएमडी हरीश दुहन तथा भारत सरकार और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

Please Share With Your Friends Also

संवाद छत्तीसगढ़ न्यूज़ पोर्टल बदलते भारत की सबसे विश्वसनीय न्यूज़ पोर्टल है। सबसे सटिक और सबसे तेज समाचार का अपडेट पाने के लिए जुडिए हमारे साथ" टीम :- Samvad Chhattisgarh

Leave a comment