जशपुर: कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों और प्रशिक्षण संस्थानों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले के युवाओं को उनकी रुचि के साथ-साथ वर्तमान और भविष्य में रोजगार बाजार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण तभी सार्थक होगा, जब उसके माध्यम से युवाओं को बेहतर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हों।
बैठक में राज्य कौशल विकास निगम (SDC) के स्टेट हेड वैभव अग्रवाल तथा सुबोध कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा जिले के सभी शासकीय आईटीआई, शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य, पंजीकृत शासकीय एवं निजी प्रशिक्षण प्रदाता (VTP) तथा संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में जिले के युवाओं के लिए उपलब्ध रोजगार संभावनाओं, उद्योगों की मांग और प्रशिक्षण की गुणवत्ता को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान सुबोध कुमार ने एमआरएफ (MRF) जैसे प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थानों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों की जानकारी साझा की। साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित उद्योगों के अधिकारियों से प्रशिक्षण संस्थानों और अधिकारियों की सीधी बातचीत भी कराई गई, ताकि रोजगार की वास्तविक आवश्यकताओं और चयन प्रक्रिया की जानकारी मिल सके।
समीक्षा के दौरान वेल्डर, मेसन सहित विभिन्न तकनीकी ट्रेडों में विदेशों में उपलब्ध रोजगार अवसरों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि यदि युवाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाए तो उन्हें विदेशों में भी बेहतर रोजगार मिल सकता है।
बैठक में जिले की दो शासकीय आईटीआई संस्थाओं की प्रयोगशालाओं को भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप मॉडल लैब के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। आधुनिक मशीनों और तकनीकी संसाधनों से लैस प्रयोगशालाएं तैयार कर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण व्यावहारिक प्रशिक्षण देने की योजना पर चर्चा की गई।
कलेक्टर रोहित व्यास ने कृषि एवं उससे जुड़े क्षेत्रों (एग्रीकल्चर एंड एलाइड सेक्टर) में भी रोजगार की संभावनाओं को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिले की परिस्थितियों और बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए ऐसे नए उत्पादों की पहचान की जाए, जिनकी अच्छी मांग हो। इसके अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए भी तैयार किया जाए।
कलेक्टर ने सभी शासकीय एवं निजी प्रशिक्षण प्रदाताओं को निर्देशित किया कि वे पारंपरिक प्रशिक्षण तक सीमित न रहें, बल्कि आने वाले समय में जिन क्षेत्रों में रोजगार की मांग बढ़ने वाली है, उन्हीं ट्रेडों में युवाओं को प्रशिक्षित करें। उन्होंने कहा कि कौशल विकास योजनाओं का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार से जोड़ना होना चाहिए।
बैठक में वैभव अग्रवाल ने उपस्थित अधिकारियों और प्रशिक्षण संस्थानों को प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) तथा पीएम विश्वकर्मा योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ युवाओं तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से युवाओं को आधुनिक कौशल प्रशिक्षण, प्रमाणन और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
बैठक के अंत में कलेक्टर ने सभी प्रशिक्षण संस्थानों से उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने, प्रशिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाने और अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।