मेहनत और नवाचार से खेती को दी नई पहचान, युवा किसान अंकित लकड़ा बने बहुफसली खेती की मिसाल

जशपुरनगर। खेती को अगर मेहनत, नई सोच और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग से जोड़ा जाए तो यह केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि बहुआयामी आय का मजबूत माध्यम बन सकती है। जशपुर जिले के ग्राम रतबा के युवा किसान अंकित लकड़ा ने अपनी मेहनत और नवाचार से इसे साबित कर दिखाया है।

पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए अंकित ने अपने खेत में मछली पालन, मुर्गी पालन, बागवानी और बहुफसली खेती को एक साथ जोड़ा है। शासन की योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने अपने खेत को ऐसी कृषि व्यवस्था में बदला है, जहां एक गतिविधि से निकलने वाला संसाधन दूसरी गतिविधि के काम आता है।

धान की खेती से शुरू हुआ सफर, अब बहुआयामी खेती तक पहुंची सोच

युवा किसान अंकित लकड़ा बताते हैं कि पहले वे बरसात के मौसम में मुख्य रूप से धान की खेती करते थे। इसके बाद उन्होंने मत्स्य विभाग से जानकारी प्राप्त की और अपने खेत में तालाब का निर्माण कराया।

तालाब बनने के बाद खेती का दायरा बढ़ा। अब वे गर्मी के मौसम में भी खेती कर रहे हैं। उन्होंने खेत में आम के पौधे लगाए हैं और तालाब के पानी का उपयोग गर्मी के दिनों में सिंचाई के लिए करते हैं।

तालाब के पानी का उपयोग करते हुए वे बागवानी भी कर रहे हैं, जिससे खेती के साथ अतिरिक्त आय का रास्ता तैयार हुआ है।

तालाब के ऊपर मुर्गी पालन, नीचे मछली पालन

अंकित लकड़ा की खेती की सबसे खास बात उनका नवाचार आधारित एकीकृत कृषि मॉडल है। उन्होंने अपने दो तालाबों के ऊपर मुर्गी पालन के लिए शेड तैयार किए हैं।

इन शेडों की क्षमता करीब 1000 से 1200 मुर्गियों की है। मुर्गी पालन से निकलने वाले अपशिष्ट का उपयोग तालाब में मछलियों के आहार के रूप में किया जाता है। इस तरह एक गतिविधि से निकलने वाला अपशिष्ट दूसरी गतिविधि के लिए उपयोगी संसाधन बन जाता है।

इस व्यवस्था से मुर्गी पालन और मछली पालन दोनों को एक-दूसरे से जोड़ा गया है, जिससे लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है।

तालाब की मेड़ पर आम और लीची के पेड़, अतिरिक्त आय के साथ मिट्टी का संरक्षण

अंकित ने तालाब की मेड़ पर आम के पेड़ भी लगाए हैं। उनका कहना है कि पेड़ों की जड़ें मिट्टी को मजबूती से बांधे रखती हैं और बारिश के दौरान मिट्टी के कटाव को रोकने में मदद करती हैं।

वहीं आम और लीची जैसे फलदार पेड़ भविष्य में उनके लिए अतिरिक्त आय का माध्यम भी बनेंगे। इस तरह तालाब की मेड़ का उपयोग भी उन्होंने खेती की आय बढ़ाने के साथ-साथ मृदा संरक्षण के लिए किया है।

प्रधानमंत्री मत्स्य योजना से मिला 8 लाख रुपये का अनुदान

युवा किसान अंकित लकड़ा ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत पॉन्ड लाइनर सहित अन्य आवश्यक संसाधनों का लाभ मिला है।

मत्स्य विभाग की ओर से उन्हें 8 लाख रुपये की अनुदान राशि प्राप्त हुई। इसके साथ ही पॉलीथिन, बोर, मोटर और फीड जैसी आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई गई, जिससे उनके लिए मछली पालन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना आसान हुआ।

बहुफसली खेती से बढ़ी आय की संभावनाएं

अंकित अब केवल एक फसल पर निर्भर नहीं हैं। मछली पालन, मुर्गी पालन, बागवानी और बहुफसली खेती को एक साथ अपनाकर उन्होंने खेती को आय के कई स्रोतों से जोड़ दिया है।

उनका यह प्रयोग बताता है कि यदि किसान शासकीय योजनाओं की जानकारी लेकर उनका सही उपयोग करें और पारंपरिक खेती के साथ नवाचार को अपनाएं, तो सीमित संसाधनों में भी कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

नई सोच से खेती को बनाया आत्मनिर्भरता का माध्यम

युवा किसान अंकित लकड़ा की कहानी उन किसानों के लिए प्रेरणा है, जो खेती को केवल एक पारंपरिक कार्य के रूप में देखते हैं। उन्होंने यह दिखाया है कि नई सोच, मेहनत, तकनीक और शासन की योजनाओं का सही उपयोग खेती की तस्वीर बदल सकता है।

अंकित की पहल यह संदेश देती है कि खेत का हर संसाधन यदि सही तरीके से उपयोग किया जाए तो एक ही जमीन से आय के कई रास्ते तैयार किए जा सकते हैं। उनका एकीकृत कृषि मॉडल जशपुर के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण बन रहा है।

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