जशपुर: जिले को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर प्रशासन ने मिशन मोड में अभियान चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। कलेक्टर रोहित व्यास की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में टीबी मुक्त भारत अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विकासखंडों एवं नगरीय निकायों के लिए नियुक्त नोडल अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि जिले की सभी 444 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त बनाने के लिए विभागीय समन्वय के साथ समयबद्ध और परिणामोन्मुखी कार्य किया जाए।
बैठक में कलेक्टर ने नोडल अधिकारियों को अपने-अपने आवंटित क्षेत्रों में टीबी उन्मूलन गतिविधियों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल बैठकें और योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर सक्रिय निगरानी और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। प्रत्येक अधिकारी को अपने क्षेत्र में अभियान की प्रगति पर लगातार नजर रखनी होगी ताकि कोई भी संभावित मरीज उपचार से वंचित न रहे।
घर-घर होगी टीबी मरीजों की पहचान
कलेक्टर ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एक्टिव केस फाइंडिंग (Active Case Finding) अभियान के तहत घर-घर जाकर संभावित टीबी मरीजों की पहचान की जाएगी। चिन्हित मरीजों की आवश्यक जांच कराकर समय पर उपचार शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मरीजों को सरकार की ओर से निशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे उनका नियमित इलाज सुनिश्चित हो सके।
निक्षय मित्र और पोषण योजना पर विशेष जोर
बैठक में टीबी मरीजों के उपचार के साथ-साथ उनके पोषण पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही गई। कलेक्टर ने निक्षय मित्र अभियान से अधिक से अधिक लोगों और संस्थाओं को जोड़ने तथा निक्षय पोषण योजना के तहत पात्र मरीजों को पोषण किट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समाज की सहभागिता से ही टीबी उन्मूलन अभियान को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
प्रति हजार आबादी पर 30 संदिग्ध मरीजों की जांच अनिवार्य
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी.एस. जात्रा ने बताया कि राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रति एक हजार की आबादी पर कम से कम 30 संदिग्ध मरीजों की NAAT मशीन से जांच कराना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि जिले की सभी 444 ग्राम पंचायतों में इस लक्ष्य को मिशन मोड में पूरा किया जाएगा ताकि समय रहते मरीजों की पहचान कर उनका उपचार शुरू किया जा सके।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
जिला टीबी नोडल अधिकारी ने बैठक में टीबी रोग के प्रमुख लक्षणों की जानकारी देते हुए बताया कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, बलगम में खून आना, लगातार वजन कम होना, शाम के समय बुखार आना या कमजोरी महसूस हो रही है, तो उसे तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर जांच करानी चाहिए।
इन लोगों की होगी प्राथमिकता से जांच
बैठक में बताया गया कि 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग, डायबिटीज के मरीज, धूम्रपान और शराब का सेवन करने वाले व्यक्ति तथा अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को हाई-रिस्क समूह में रखा गया है। ऐसे लोगों की प्राथमिकता के आधार पर जांच कराई जाएगी ताकि बीमारी की जल्द पहचान हो सके।
दिसंबर तक पूरा करना होगा लक्ष्य
कलेक्टर ने कहा कि जिले में टीबी उन्मूलन से जुड़े सभी निर्धारित लक्ष्य दिसंबर 2026 तक हर हाल में पूरे किए जाएं। इसके लिए सभी नोडल अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग, जनजागरूकता, जांच, उपचार और फॉलोअप पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों से ही जिले को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।
बैठक में जिला पंचायत, स्वास्थ्य विभाग, समाज कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, आदिवासी विकास विभाग, शिक्षा विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।