रायपुर। नक्सलवाद से प्रभावित बस्तर में अब पुनर्वास, आजीविका और विकास को गति देने पर जोर दिया जा रहा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद सबसे बड़ी जिम्मेदारी हिंसा से प्रभावित लोगों के घावों पर मरहम लगाने, उनका पुनर्वास करने और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराने की है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक तीन दिवसीय निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर आयोजित किया जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिविर के दूसरे चरण का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कार्यक्रम में शामिल हुए।
दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के 768 दिव्यांगजनों को मिलेगा लाभ
दंतेवाड़ा में आयोजित शिविर के माध्यम से तीन जिलों के कुल 768 दिव्यांगजनों को उनकी जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 हितग्राही शामिल हैं।
शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है। जरूरतमंद दिव्यांगजनों को कृत्रिम हाथ-पैर, कैलिपर्स, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र, स्मार्ट वॉकिंग स्टिक सहित विभिन्न सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
इससे पहले 5 से 7 अक्टूबर तक जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि ये आंकड़े बस्तर के उन गरीब और आदिवासी परिवारों की पीड़ा को भी सामने लाते हैं, जिन्होंने दशकों तक नक्सली हिंसा का सामना किया है।
‘नक्सलवाद समाप्त हुआ, अब पीड़ितों के घावों पर मरहम लगाना जरूरी’
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद ने पांच दशकों तक बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा पहुंचाई। नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटों में अनेक निर्दोष नागरिक दिव्यांग हुए और उनके जीवन पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा।
उन्होंने कहा कि केवल नक्सलवाद समाप्त कर देना पर्याप्त नहीं है। हिंसा से प्रभावित लोगों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करना, उनकी जरूरतों के अनुरूप सहायता देना और सम्मान के साथ जीवनयापन के अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
श्री शाह ने कहा कि दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण मिलने से उनके दैनिक जीवन को आसान बनाने में मदद मिलेगी। केंद्र सरकार, छत्तीसगढ़ सरकार, जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और सहयोगी संस्थाएं इस दिशा में मिलकर काम कर रही हैं।
उन्होंने बस्तर के पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व और स्थानीय समाज की भूमिका की भी सराहना की। उनके अनुसार, नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष और क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयासों में स्थानीय जनजातीय समाज का सहयोग महत्वपूर्ण रहा है।
आत्मसमर्पण करने वाले 8,526 लोगों के पुनर्वास का उल्लेख
अमित शाह ने नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।
उनके अनुसार, जिन 7,328 लोगों के बैंक खाते नहीं थे, उनके खाते खुलवाए गए हैं। 1,620 लोगों को इनामी राशि और 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि दी गई है। इसके अलावा 455 लोगों को नौकरी और 129 लोगों को भूमि आवंटित की गई है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 4,014 आवास उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं, 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे रोजगार और स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में 6,763 नए राशन कार्ड बनाए गए और 2,808 परिवारों को निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराई गई। आवागमन और संपर्क सुविधाओं के विस्तार के लिए 372 नई सड़क परियोजनाएं शुरू की गई हैं तथा 670 पुलियों का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही 48,526 लोगों के आधार कार्ड बनाए गए हैं और इलवाद पंचायत पुरस्कार के अंतर्गत 44 पंचायतों को पुरस्कृत किया गया है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने इन प्रयासों को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
200 से अधिक सुरक्षा शिविर बनेंगे ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’
बस्तर में विकास को गति देने के लिए 200 से अधिक सुरक्षा शिविरों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की योजना है। अमित शाह ने बताया कि नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान 500 से अधिक सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए थे। अब इनमें से 200 से अधिक शिविरों को जनसेवा और विकास के केंद्रों में बदलने की दिशा में काम किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर पहले सुरक्षा बलों के जवान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करते थे, अब वहीं केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी बैठकर विकास और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाएंगे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी कहा कि सुरक्षा शिविरों को सेवा केंद्रों में बदलने से स्थानीय लोगों तक सरकारी योजनाओं और सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी। इन केंद्रों के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि महान जननायक शहीद वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार में पहला सेवा डेरा शुरू किया गया है। यहां स्थानीय लोगों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही जंगलों में उपलब्ध इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी आजीविका गतिविधियां भी शुरू की गई हैं।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अन्य सेवा डेरों में भी स्थानीय संसाधनों और जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम और आजीविका गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
‘नियद नेल्लानार’ से दूरस्थ गांवों तक पहुंच रही विकास की सुविधाएं
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से छत्तीसगढ़ को दशकों पुरानी नक्सलवाद की चुनौती से मुक्ति मिली है। उन्होंने इस उपलब्धि में सुरक्षा बलों के साहस, पराक्रम और बलिदान के साथ बस्तर की जनता के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में प्राण गंवाने वाले जवानों और हिंसा में मारे गए निर्दोष ग्रामीणों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि बस्तर के लोग भय और हिंसा से मुक्ति चाहते थे तथा शांति, सुरक्षा और विकास की मुख्यधारा से जुड़ना चाहते थे।
श्री साय ने कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास की दौड़ में पीछे रह गया था। अब सरकार की प्राथमिकता क्षेत्र को तेजी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाना और इसे देश के विकसित जनजातीय क्षेत्रों में अग्रणी बनाना है।
उन्होंने बताया कि ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उनके अनुसार, 500 से अधिक गांवों में सड़क और बिजली की सुविधाएं पहुंची हैं। पेयजल और दूरसंचार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है तथा इन क्षेत्रों में 431 स्कूल खोले गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले कई गांवों के लोगों को राशन प्राप्त करने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। अब गांवों में राशन दुकानों की व्यवस्था करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि लोगों को स्थानीय स्तर पर सुविधाएं मिल सकें।
कृषि, पशुपालन और सिंचाई से आजीविका को मजबूत करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर का समग्र विकास केवल सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक सीमित नहीं है। इसके साथ ही कृषि, पशुपालन और स्थानीय आजीविका के अवसरों को बढ़ाना भी जरूरी है।
उन्होंने बताया कि पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए परिवारों को दो-दो गायें उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है। डेयरी विकास के लिए भी समझौता किया गया है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में मदद मिल सके।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर लगभग 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसानों को लाभ होगा, कृषि उत्पादन बढ़ाने के अवसर मिलेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने की जिम्मेदारी हमारी : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि नक्सली हिंसा और आईईडी विस्फोटों के कारण अनेक निर्दोष ग्रामीणों ने अपने हाथ-पैर खोए हैं। ऐसे प्रभावित लोगों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराना, उनके दैनिक जीवन को सुगम बनाना और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने में सहयोग करना सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि दंतेवाड़ा के शिविर में कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण मिलने से दिव्यांगजनों को चलने-फिरने तथा दैनिक गतिविधियां करने में मदद मिलेगी। सरकार का उद्देश्य केवल उपकरण देना नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों को सम्मान के साथ जीवन जीने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और सहयोगी संस्थाओं के योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा बोले— पीड़ितों तक सहायता पहुंचाने का अभियान रहेगा जारी
उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटों ने अनेक निर्दोष ग्रामीणों के जीवन को प्रभावित किया। कोई बच्चा गांव में खेलते समय, कोई किसान खेत में जाते हुए और कोई ग्रामीण दैनिक कार्य करते समय विस्फोट का शिकार हुआ। कई लोगों ने अपने हाथ-पैर गंवाए, जबकि कुछ की आंखों की रोशनी चली गई।
उन्होंने कहा कि बस्तर की जनता ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद नक्सलवाद से मुक्ति का संकल्प बनाए रखा। अब नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और सहायता का अभियान लगातार जारी रखना जरूरी है।
श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार और बस्तर के जनप्रतिनिधियों का प्रयास है कि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति पुनर्वास और आवश्यक सहायता से वंचित न रहे।
कृत्रिम अंग मिलने से लाभार्थियों के जीवन में लौटी उम्मीद
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिव्यांगजनों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद किया और उनके अनुभव जाने।
सुकमा जिले के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायां पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके कारण पैर काटना पड़ा। अब कृत्रिम पैर मिलने से वे दोबारा चलने लगे हैं और देशसेवा के लिए फिर से तैयार हैं।
बीजापुर जिले के धर्मारम निवासी चंद्रैया सपका ने गोंडी बोली में अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में चिंतावागु नदी में मछली पकड़ने जाते समय आईईडी विस्फोट में उनका दायां पैर चला गया था। शिविर में कृत्रिम पैर मिलने के बाद वे फिर से चल पा रहे हैं।
इसी तरह दंतेवाड़ा जिले के जावंगा और मेटापाल के जन्मजात अस्थिबाधित दिव्यांगजन अजय सोरी और कोसी पोडियाम ने ट्राइसाइकिल मिलने पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि इससे दैनिक आवागमन में सुविधा होगी।
लाभार्थियों ने इस पहल के लिए केंद्र और राज्य सरकार तथा सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
विकसित बस्तर के निर्माण का संकल्प
कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद से प्रभावित लोगों के पुनर्वास, दिव्यांगजनों की सहायता और दूरस्थ क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास जारी रहेंगे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर में शांति और सुरक्षा के बाद अब शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, संस्कृति और अधोसंरचना के क्षेत्र में विकास को गति देना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य है कि बस्तर का प्रत्येक गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़े, युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलें और परिवारों के जीवन में खुशहाली आए।
कार्यक्रम में बस्तर सांसद महेश कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य ओजस्वी मंडावी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।