रायपुर। छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर स्थित दंतेवाड़ा जिले के सुदूर और दुर्गम इलाकों में अब विकास की नई तस्वीर उभरने लगी है। कभी नक्सलवाद के प्रभाव और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आधुनिक सुविधाओं से कटे रहे कुआकोंडा विकासखंड के लावा गांव में पहली बार टेलीविजन की आवाज गूंजी है। जिला प्रशासन के सहयोग से छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (CREDA) द्वारा यहां कम्युनिटी सोलर टीवी (सामुदायिक सौर टीवी) स्थापित किया गया है।
महज 21 परिवारों की आबादी वाले इस आदिवासी गांव के लिए यह पहल किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। ग्रामीण अब पहली बार अपने ही गांव में टेलीविजन के माध्यम से देश-दुनिया की खबरों, ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों और मनोरंजन से जुड़ सकेंगे।
अंतिम छोर तक विकास पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री
इस पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर के दूरदराज और अंतिम छोर पर बसे गांवों तक विकास, शिक्षा और आधुनिक तकनीक की रोशनी पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि दंतेवाड़ा के सुदूर लावा गांव में सामुदायिक सोलर टीवी की स्थापना इस बात का प्रमाण है कि विकास अब नक्सलवाद के अंधेरे को पीछे छोड़कर हर आदिवासी भाई-बहन के जीवन तक पहुंच रहा है। जब इन सुदूर इलाकों के बच्चे और ग्रामीण पहली बार टीवी स्क्रीन पर देश-दुनिया की खबरें और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम देखेंगे, तो उनके सपनों को नई उड़ान मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बस्तर के समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
बैलाडीला की पहाड़ियों के पीछे बसा है लावा गांव
लावा गांव बैलाडीला की ऊंची पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच बसा हुआ है। भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह गांव लंबे समय तक बाहरी दुनिया से अलग-थलग रहा। किरंदुल के मुख्य लौह-अयस्क खनन क्षेत्र (NMDC) से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव तक पहुंचने के लिए आज भी पक्की सड़क उपलब्ध नहीं है।
ग्रामीणों को राशन दुकान (PDS) से चावल जैसी बुनियादी जरूरतों का सामान लाने के लिए भी पहाड़ी और पथरीले रास्तों से मीलों पैदल सफर करना पड़ता है।
दशकों तक नक्सलवाद के साये में रहा क्षेत्र
लावा और आसपास का पुरेंगल क्षेत्र दशकों तक नक्सल प्रभावित इलाका रहा है। घने जंगलों और दुर्गम रास्तों के कारण यह क्षेत्र लंबे समय तक प्रशासनिक पहुंच से दूर रहा। सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के चलते यहां सरकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं का पहुंचना भी मुश्किल था।
हालांकि, सुरक्षा बलों के लगातार अभियान और मुस्तैदी के बाद अब क्षेत्र की परिस्थितियों में बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां कभी भय और असुरक्षा का माहौल था, वहां अब प्रशासनिक गतिविधियां बढ़ रही हैं।
हाल के दिनों में जिला कलेक्टर और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने भी गांव पहुंचकर ग्रामीणों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। इसी बदले हुए माहौल में प्रशासन अब ग्रामीणों तक विकास योजनाएं पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है।
बिजली के अभाव में सौर ऊर्जा बनी सहारा
लावा गांव पारंपरिक बिजली ग्रिड से काफी दूर है। ऐसे में जिला प्रशासन और CREDA (छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण) ने सौर ऊर्जा के माध्यम से ग्रामीणों को आधुनिक सुविधा से जोड़ने की पहल की है।
कम्युनिटी सोलर टीवी की स्थापना से अब गांव के लोगों को एक ही स्थान पर टेलीविजन देखने की सुविधा मिलेगी। सौर ऊर्जा आधारित यह व्यवस्था पारंपरिक बिजली कनेक्शन पर निर्भरता को भी कम करेगी।
खबरों से लेकर शिक्षा तक मिलेगा लाभ
देश-दुनिया की जानकारी: अब ग्रामीण छत्तीसगढ़, देश और दुनिया में होने वाली गतिविधियों और खबरों से जुड़ सकेंगे। इसके साथ ही शासन की योजनाओं, कृषि तकनीकों और स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रमों की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे।
बच्चों को मिलेगी नई सीख: गांव के बच्चों को मनोरंजन के साथ शैक्षणिक और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम देखने का अवसर मिलेगा। इससे उनका सामान्य ज्ञान बढ़ाने और नई चीजें सीखने में मदद मिलेगी।
सामाजिक मेलजोल को मिलेगा बढ़ावा: सामुदायिक टीवी होने के कारण गांव के सभी 21 परिवार एक स्थान पर एकत्रित होकर कार्यक्रम देख सकेंगे। इससे ग्रामीणों के बीच आपसी संवाद और सामाजिक जुड़ाव भी बढ़ेगा।
सौर ऊर्जा से मिलेगी सुविधा: दुर्गम क्षेत्र और पारंपरिक बिजली व्यवस्था से दूरी को देखते हुए सोलर पैनल आधारित यह व्यवस्था उपयोगी साबित होगी। इससे बिजली की पारंपरिक लाइन पर निर्भरता के बिना टीवी संचालन संभव हो सकेगा।
विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा बस्तर का अंतिम छोर
दशकों तक नक्सलवाद और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों से जूझने वाले लावा गांव में सामुदायिक सोलर टीवी की स्थापना ग्रामीणों के जीवन में बदलाव की एक नई शुरुआत है। यह पहल बताती है कि विकास केवल सड़क, बिजली और भवनों तक सीमित नहीं है, बल्कि सूचना, शिक्षा और आधुनिक तकनीक तक पहुंच भी विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
21 परिवारों वाले इस छोटे से गांव में पहली बार टीवी की आवाज गूंजना बस्तर के दूरस्थ इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल के रूप में देखा जा रहा है।