गोरिया में एकादशी करमा नृत्य अभ्यास वर्ग का आयोजन, कौशल्या साय ने कहा—नई पीढ़ी तक पहुंचाएं अपनी लोक संस्कृति और परंपरा
जशपुरनगर: गोरिया में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के तत्वावधान में एकादशी करमा नृत्य अभ्यास वर्ग का आयोजन किया गया। आयोजन में क्षेत्र के 22 गांवों के करमा नृत्य दलों ने हिस्सा लेकर पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय शामिल हुईं और उन्होंने विभिन्न करमा नृत्य दलों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम में हजारों ग्रामीणों एवं स्थानीय लोगों की मौजूदगी रही।
पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की जीवंत झलक
गोरिया में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विभिन्न गांवों से पहुंचे करमा दल पारंपरिक वेशभूषा और लोक वाद्ययंत्रों के साथ नजर आए।
मांदर की गूंज और लोकगीतों की धुन के बीच कलाकारों ने सामूहिक करमा नृत्य प्रस्तुत किया। नृत्य की प्रस्तुतियों ने आयोजन स्थल के वातावरण को उत्साह और उमंग से भर दिया।
विभिन्न गांवों के दलों ने करमा नृत्य का अभ्यास करते हुए पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक परंपरा की जीवंत प्रस्तुति दी।
करमा नृत्य सामाजिक एकजुटता और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक — कौशल्या साय
श्रीमती कौशल्या साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हिंदू धर्म की परंपराओं, तीज-त्योहारों और एकादशी करमा नृत्य के सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि लोक परंपराएं और तीज-त्योहार हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। करमा नृत्य को उन्होंने मनोरंजन से आगे बढ़कर सामाजिक एकजुटता, प्रकृति के प्रति आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में अपनी जड़ों से जुड़े रहना जरूरी है। युवा पीढ़ी को लोक संस्कृति, रीति-रिवाज और परंपराओं से परिचित कराने के साथ इन्हें आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी समाज की है।
उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
22 गांवों के दलों ने दी प्रस्तुति
अभ्यास वर्ग में क्षेत्र के 22 गांवों से पहुंचे करमा नृत्य दलों ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियां दीं। लोक वाद्ययंत्रों और मांदर की थाप पर कलाकारों के सामूहिक नृत्य ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
आयोजन के जरिए ग्रामीण क्षेत्र की लोक संस्कृति, परंपरा और सामूहिकता को मजबूत करने का संदेश दिया गया।
इनकी रही प्रमुख उपस्थिति
कार्यक्रम में सुनील गुप्ता, उपेंद्र यादव, अनिता सिंह, विश्वनाथ सिदार, रविशंकर यादव, सुमन नाग, वीर सिंह, तेजकुमार चौहान, भीम राम चौहान, दिलीप चौहान, कृष्ण यादव, बालमती नाग, निरपति बाई, कल्याण आश्रम जशपुर के मनिजर राम, रविन्द्र शेखर, नंदकुमार सिंह और गौतम राय सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण मौजूद रहे।
गोरिया का यह आयोजन करमा नृत्य और लोक परंपराओं के संरक्षण के साथ सामाजिक एकजुटता, सांस्कृतिक गौरव और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक सकारात्मक पहल बनकर सामने आया।