रायपुर, 12 फरवरी 2026/ वन, सहकारिता एवं परिवहन मंत्री श्री केदार कश्यप ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित पत्रकार वार्ता में राज्य सरकार द्वारा वन संरक्षण, हरित आवरण विस्तार, वन्यजीव संवर्धन, इको-टूरिज्म और वनवासियों की आजीविका सुदृढ़ीकरण के क्षेत्र में किए गए कार्यों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सतत विकास और जैव विविधता संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए वन संसाधनों के संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रयासरत है।
वन एवं वृक्ष आवरण में उल्लेखनीय वृद्धि
भारतीय वन सर्वेक्षण संस्थान की दिसंबर 2024 की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए मंत्री श्री कश्यप ने बताया कि छत्तीसगढ़ के वन एवं वृक्ष आवरण में 683 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा वनाच्छादित है। अत्यंत सघन वनों के क्षेत्र में 348 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी पारिस्थितिक संतुलन में सुधार का संकेत है।
हरित छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ते कदम
“एक पेड़ माँ के नाम 2.0” अभियान के अंतर्गत वर्ष 2024 में 4 करोड़ 20 लाख से अधिक तथा वर्ष 2025 में 2 करोड़ 79 लाख से अधिक पौधों का रोपण एवं वितरण किया गया। मंत्री ने इसे जनभागीदारी से जुड़े बड़े पर्यावरणीय आंदोलन के रूप में वर्णित किया।
किसान वृक्ष मित्र योजना से आय में वृद्धि
किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत निजी भूमि पर वाणिज्यिक वृक्षारोपण को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। पांच एकड़ तक की भूमि पर 100 प्रतिशत तथा उससे अधिक क्षेत्र में 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। पिछले दो वर्षों में 36 हजार 896 किसानों की 62 हजार 441 एकड़ भूमि पर 3 करोड़ 67 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया गया।
देव स्थलों का संरक्षण
आदिवासी आस्था केंद्रों के संरक्षण के लिए “मोदी की गारंटी” के तहत दो वर्षों में 435 देवगुड़ियों का निर्माण कराया गया, जिस पर लगभग 16.17 करोड़ रुपये व्यय हुए।
वन विभाग में भर्ती प्रक्रिया
वन विभाग में बीते दो वर्षों में तृतीय श्रेणी के 313 पदों पर भर्ती की गई है तथा 150 आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति दी गई है। वनरक्षक के 1484 पदों की शारीरिक परीक्षा पूर्ण हो चुकी है और आगे की प्रक्रिया प्रगति पर है।
बाघ संरक्षण में बड़ी सफलता
गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व के गठन का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि वर्ष 2022 में प्रदेश में 17 बाघ थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 35 हो गई है। अन्य टाइगर रिजर्व से बाघों के स्थानांतरण की अनुमति भी प्राप्त हो चुकी है।
वनभैंसा और पहाड़ी मैना संरक्षण
राजकीय पशु वनभैंसा के संरक्षण के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 14 से 17 वनभैंसे देखे गए हैं। वहीं राज्य पक्षी पहाड़ी मैना के संरक्षण हेतु ‘मैना मित्र’ कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय युवाओं को जोड़ा गया है, जिससे इनकी संख्या बढ़कर लगभग 600 से 700 तक पहुंची है।
बर्ड सफारी और रामसर साइट से बढ़ेगा पर्यटन
गिधवा-परसदा में बर्ड इंटरप्रिटेशन सेंटर एवं बर्ड सफारी की शुरुआत की गई है, जहां 270 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। बिलासपुर स्थित कोपरा जलाशय को राज्य का पहला और देश का 96वां रामसर स्थल घोषित किया गया है, जिससे इको-टूरिज्म और स्थानीय रोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा।
इको-टूरिज्म और आधारभूत ढांचा
प्रदेश में 240 नैसर्गिक पर्यटन केंद्र विकसित किए गए हैं, जिनमें से 50 से अधिक आत्मनिर्भर हो चुके हैं। वनवासियों की सुविधा के लिए 96 रपटा-पुलिया का निर्माण कराया गया है।
मानव-हाथी द्वंद नियंत्रण के उपाय
हाथी प्रभावित क्षेत्रों में ‘गज संकेत’ ऐप के माध्यम से निगरानी की जा रही है। ग्रामीणों को समय पर सूचना उपलब्ध कराने के लिए 90 हाथी मित्र दल गठित किए गए हैं। वर्तमान में प्रदेश में 355 हाथियों की उपस्थिति दर्ज की गई है।
औषधीय पौधों से महिला सशक्तिकरण
औषधि पादप बोर्ड के माध्यम से विभिन्न जिलों में औषधीय पौधों का रोपण कराया गया है, जिससे हजारों महिलाओं को रोजगार मिला है। पारंपरिक वैद्यों को भी प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
वन विकास निगम की पहल
राज्य वन विकास निगम द्वारा सतत वानिकी सिद्धांतों के तहत काष्ठ उत्पादन, वृक्षारोपण एवं अवैध अतिक्रमण हटाने के कार्य किए गए हैं। काष्ठीय वनोपज की बिक्री ई-ऑक्शन के माध्यम से की जा रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है। वन अधिकार अधिनियम के तहत आदिवासी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए 1165 प्रकरणों में वनभूमि उपयोग की स्वीकृति प्रदान की गई है।
एशिया का सबसे बड़ा समुद्रीय जीवाश्म पार्क
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में स्थित मरीन फॉसिल पार्क को एशिया का सबसे बड़ा समुद्रीय जीवाश्म पार्क बताया गया। हसदेव नदी के किनारे लगभग एक किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस पार्क में 29 करोड़ वर्ष पुराने जीवाश्म पाए गए हैं। देश में केवल चार स्थानों पर ऐसे समुद्रीय जीवाश्म मिले हैं।











