रायपुर: बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली विरासत का प्रतीक ऐतिहासिक गोंचा महापर्व इस वर्ष भी पूरे श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। लगभग 600 वर्षों से चली आ रही इस ऐतिहासिक परंपरा को सहेजते हुए महापर्व की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।
महापर्व को लेकर कुशल कारीगर श्रद्धा और समर्पण के साथ भगवान की रथयात्रा के लिए भव्य रथ निर्माण को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुरूप तैयारियां की जा रही हैं, जिससे बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी।
16 जुलाई को आयोजित होने वाली भव्य रथयात्रा और बस्तर की अनूठी ‘तुपकी’ परंपरा इस महापर्व का प्रमुख आकर्षण होगी। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि बस्तर की लोक संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक भी माना जाता है।
हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक इस ऐतिहासिक महापर्व में शामिल होकर बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं का साक्षात्कार करते हैं। गोंचा महापर्व बस्तर की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाले प्रमुख आयोजनों में शामिल है।