रायपुर, 03 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए शुरू किया गया एआई आधारित ‘एलीफेंट अलर्ट सिस्टम’ बड़ी सफलता की कहानी बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग द्वारा लागू यह आधुनिक तकनीक हाथी-मानव संघर्ष को कम करने में प्रभावी साबित हो रही है। इस नवाचार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है और प्रतिष्ठित एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
हाथी प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग थर्मल सेंसर युक्त इन्फ्रारेड ड्रोन के माध्यम से दिन-रात हाथियों की गतिविधियों की निगरानी कर रहा है। यह तकनीक घने जंगलों और अंधेरे में भी हाथियों की सटीक लोकेशन का पता लगाने में सक्षम है। जैसे ही हाथियों का झुंड किसी गांव की ओर बढ़ता है, नियंत्रण कक्ष से ग्रामीणों और वन अमले को एसएमएस, फोन कॉल और व्हाट्सएप के जरिए तत्काल अलर्ट भेजा जाता है।
इस प्रणाली के तहत 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को पहले ही चेतावनी मिल जाती है, जिससे वे सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाते हैं। वहीं वन विभाग की टीम भी समय रहते मौके पर पहुंचकर हाथियों को जंगल की ओर मोड़ने का प्रयास करती है। परिणामस्वरूप हाथी-मानव संघर्ष की घटनाओं में कमी आई है और जनहानि का जोखिम भी काफी घटा है।
वन विभाग की इस अभिनव पहल ने ग्रामीणों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ाया है, वहीं हाथियों के संरक्षण को भी नई मजबूती मिली है। आधुनिक तकनीक, त्वरित सूचना प्रणाली और प्रशासनिक सक्रियता के बेहतर समन्वय से वन्यजीवों और लोगों के बीच संतुलन स्थापित करने में सफलता मिली है।
छत्तीसगढ़ का यह मॉडल अब अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। एआई आधारित एलीफेंट अलर्ट सिस्टम यह साबित करता है कि तकनीक, प्रभावी प्रशासन और जनभागीदारी के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ आम लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है। यह पहल आज छत्तीसगढ़ को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है।