रायपुर, 03 जुलाई 2026। सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पोलमपल्ली निवासी मड़कम भीमा की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सही मार्गदर्शन, पुनर्वास और शासकीय योजनाओं का लाभ किसी भी व्यक्ति के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है। हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतंत्र और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के बाद आज मड़कम भीमा सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं।
मुख्यधारा में लौटने के बाद जिला प्रशासन ने उन्हें विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत मिली सहायता से उन्होंने अपना पक्का घर बनाया, जिससे परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास मिला। यह घर उनके जीवन में स्थिरता और नए भविष्य की उम्मीद लेकर आया।
आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मड़कम भीमा को मनरेगा के तहत रोजगार भी उपलब्ध कराया गया। उन्होंने गांव में चल रहे विकास कार्यों में श्रमदान करते हुए नियमित मजदूरी अर्जित की, जिसकी राशि सीधे उनके बैंक खाते में जमा हुई। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और आत्मनिर्भरता की दिशा में उनका विश्वास बढ़ा।
आज मड़कम भीमा अपने परिवार के साथ सामान्य और सम्मानपूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उनका कहना है कि शासन की पुनर्वास नीति, जिला प्रशासन के सहयोग और शासकीय योजनाओं के लाभ ने उन्हें नई पहचान और बेहतर जीवन का अवसर प्रदान किया है।
मड़कम भीमा की सफलता की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो बेहतर भविष्य की तलाश में हैं। यह उदाहरण बताता है कि शिक्षा, रोजगार, विकास और आत्मनिर्भरता का मार्ग अपनाकर जीवन को नई दिशा दी जा सकती है। शासन की पुनर्वास नीति समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों को नया अवसर और सम्मानजनक जीवन प्रदान कर रही है।