रायपुर, 06 जुलाई 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि चिंतन शिविर अब केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं रह गया है, बल्कि शासन व्यवस्था में ठोस सुधार और नवाचारों का प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ से प्राप्त सुझाव विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई दिशा देंगे और इन्हें शीघ्र ही नीतिगत तथा प्रशासनिक पहलों के रूप में लागू किया जाएगा।
सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ का रविवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। शिविर में मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद के सदस्य, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तथा देश के प्रतिष्ठित नीति विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने शासन, विकास और जनसेवा के विभिन्न विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-संचालित और नागरिकों की आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील प्रशासन विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि पिछले दो चिंतन शिविरों से प्राप्त सुझावों को सफलतापूर्वक लागू किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु जैसी महत्वपूर्ण पहलें शुरू हुईं। सेवा सेतु के माध्यम से वर्तमान में 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं।
शिविर के दूसरे दिन ‘सतत समृद्धि के इंजन के रूप में पर्यटन’ विषय पर आयोजित सत्र में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं पर्यटन नीति विशेषज्ञ श्री सुमन बिल्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, जनजातीय और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में देश का अग्रणी हाई-वैल्यू और लो-इम्पैक्ट पर्यटन गंतव्य बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने पर्यटन अवसंरचना, सामुदायिक भागीदारी और निवेश आधारित विकास मॉडल पर विशेष जोर दिया।
‘सबका प्रयास के माध्यम से विकासपरक राजनीति’ विषय पर सांसद श्री शशांक मणि त्रिपाठी ने जिला-केंद्रित विकास मॉडल की वकालत करते हुए कहा कि प्रत्येक जिले की आर्थिक क्षमता के अनुरूप विकास रणनीति तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने जिला जीडीपी आधारित नियोजन, स्थानीय नवाचार, उद्यमिता और रोजगार सृजन को विकास का आधार बताया।
समापन सत्र में डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुशासन, नेतृत्व विकास और प्रभावी नीति-क्रियान्वयन के विभिन्न आयामों पर अपने विचार साझा किए।
शिविर के दौरान उभरती प्रौद्योगिकियों पर आयोजित सत्र में नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), 5जी, ड्रोन, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, ब्लॉकचेन और डेटा आधारित प्रशासन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि तकनीक शासन को अधिक पारदर्शी, दक्ष और नागरिक-केंद्रित बनाने का सशक्त माध्यम बन सकती है।
‘कृषि से समृद्धि’ विषयक सत्र में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद और कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु-अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन और आधुनिक तकनीक आधारित कृषि मॉडल प्रस्तुत किए। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव दिए।
शिविर के उद्घाटन सत्र में प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने नेतृत्व, जनसेवा, भावनात्मक संतुलन और नैतिक उत्तरदायित्व पर अपने विचार रखते हुए कहा कि संवेदनशील और मूल्य-आधारित नेतृत्व ही प्रभावी सुशासन की आधारशिला है।
दो दिवसीय चिंतन शिविर में मंत्रियों ने समूह आधारित विचार-मंथन के माध्यम से विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की। शासन, नेतृत्व विकास, उभरती प्रौद्योगिकियों, कृषि, पर्यटन और विकासपरक राजनीति पर प्राप्त सुझाव आने वाले समय में राज्य की नीतियों, प्रशासनिक सुधारों और विकास कार्यक्रमों का आधार बनेंगे। विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में चिंतन शिविर 3.0 को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।