पमशाला में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव पर उमड़ा आस्था का सैलाब, मटकी फोड़ ने बढ़ाया उत्साह

मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कौशल्या साय ने की पूजा-अर्चना, लड्डू गोपाल को झूला झुलाकर लगाया माखन-मिश्री का भोग

जशपुरनगर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर अखिल भारतीय कंवर धाम स्थित श्री राधा-कृष्ण मंदिर पमशाला में भव्य श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन किया गया। धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। महोत्सव में बड़ी संख्या में समाज के लोग, श्रद्धालु एवं महिलाएं शामिल हुईं और भगवान श्रीकृष्ण की आराधना कर सुख-समृद्धि की कामना की।

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्री राधा-कृष्ण की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल को श्रद्धापूर्वक झूला झुलाया और माखन-मिश्री का भोग लगाया। मंदिर परिसर भक्ति गीतों, भजनों और श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंजता रहा।

कौशल्या साय ने की पूजा-अर्चना, लिया भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद

महोत्सव में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय भी शामिल हुईं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की विधिवत पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया और लड्डू गोपाल को झूला झुलाया।

इस दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। पूरे भक्तिभाव और उल्लास के साथ लोगों ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व मनाया।

मटकी फोड़ आयोजन ने महोत्सव में भरा उत्साह

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान मटकी फोड़ कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। मटकी फोड़ने के लिए श्रद्धालुओं और युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला।

आयोजन स्थल पर मौजूद लोगों ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। मटकी फोड़ कार्यक्रम ने जन्माष्टमी महोत्सव में विशेष रंग भर दिया और लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।

कथा वाचन से सुनाए भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंग

महोत्सव में कथा वाचक राजकुमारी तिवारी जी ने भगवान श्रीकृष्ण की महिमा और उनके जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का कथा वाचन किया। श्रद्धालु भक्तिभाव से कथा का श्रवण करते रहे।

वहीं पंडित केयूर भूषण तिवारी जी के मार्गदर्शन में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और कार्यक्रम संपन्न कराए गए।

प्रेम, सत्य, धर्म और कर्म का संदेश देता है जन्माष्टमी पर्व

इस अवसर पर श्रीमती कौशल्या साय ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह हमें प्रेम, सत्य, धर्म और कर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज में एकता को मजबूत करते हैं तथा भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों और संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनते हैं।

महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं। पूजा-अर्चना, लड्डू गोपाल को झूला झुलाने, माखन-मिश्री का भोग, कथा वाचन और मटकी फोड़ सहित विभिन्न कार्यक्रमों के साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव हर्षोल्लास और भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ।

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