जशपुर/रायपुर, 30 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए संचालित योजनाएं महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के सहयोग से महिलाएं पारंपरिक आजीविका गतिविधियों से आगे बढ़कर नए व्यवसायों में अपनी पहचान बना रही हैं। इसकी प्रेरणादायक मिसाल जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड की ग्राम पंचायत छेरडाढ़ निवासी संगीता देवी हैं, जो आज स्वयं ई-रिक्शा चलाकर हर महीने 15 से 18 हजार रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं।
कभी परिवार की जरूरतों और कृषि कार्यों के लिए स्व-सहायता समूह से छोटे-छोटे ऋण लेने वाली संगीता देवी ने अपनी मेहनत, इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के बल पर आत्मनिर्भरता का सफर तय किया है। आज वे ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं और दूसरी महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
बिहान मिशन से जुड़कर शुरू हुआ आत्मनिर्भरता का सफर
संगीता देवी वर्ष 2018 में दीपक स्व-सहायता समूह के माध्यम से बिहान मिशन से जुड़ी थीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें नियमित बचत, ऋण सुविधा और आजीविका संवर्धन के विभिन्न अवसरों की जानकारी मिली। शुरुआत में उन्होंने समूह से छोटे-छोटे ऋण लेकर कृषि कार्यों और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा किया।
धीरे-धीरे उनके मन में स्वयं का व्यवसाय शुरू करने और परिवार की आय बढ़ाने की इच्छा मजबूत होने लगी। संगीता ने महसूस किया कि खेती-किसानी के साथ यदि आय का कोई स्थायी वैकल्पिक साधन विकसित किया जाए, तो परिवार की आर्थिक स्थिति को और बेहतर बनाया जा सकता है।
इसी सोच के साथ उन्होंने दुलदुला के संकुल संगठन के समक्ष ई-रिक्शा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने बताया कि दुलदुला से पतराटोली मार्ग पर यात्रियों की अच्छी आवाजाही रहती है और इस मार्ग पर ई-रिक्शा संचालन से रोजगार की बेहतर संभावनाएं हैं। उनकी इस पहल ने आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का नया रास्ता खोला।
मुख्यमंत्री के हाथों मिला ई-रिक्शा, जीवन में आया बड़ा बदलाव
संगीता देवी की इच्छाशक्ति, स्वरोजगार के प्रति रुचि और आजीविका की संभावनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री जशपुर एक्सप्रेस योजना के अंतर्गत वर्ष 2025 में उन्हें बैटरी से संचालित ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया। रक्षाबंधन के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के हाथों ई-रिक्शा प्राप्त करना उनके जीवन का यादगार क्षण बन गया।
ई-रिक्शा मिलने के बाद संगीता ने इसे केवल यात्रियों के आवागमन का साधन नहीं, बल्कि अपनी आर्थिक स्वतंत्रता और परिवार की खुशहाली का आधार बना लिया। उन्होंने स्वयं ई-रिक्शा चलाने का निर्णय लिया और पूरे आत्मविश्वास के साथ इस व्यवसाय की शुरुआत की।
आज वे दुलदुला से पतराटोली मार्ग पर ई-रिक्शा का संचालन कर रही हैं और अपने परिश्रम से नियमित आय अर्जित कर रही हैं।
प्रतिदिन 700 से 800 रुपये की आमदनी, हर महीने 18 हजार रुपये तक शुद्ध आय
पिछले करीब एक वर्ष से ई-रिक्शा चला रहीं संगीता देवी को प्रतिदिन लगभग 700 से 800 रुपये की आमदनी हो रही है। ई-रिक्शा संचालन से जुड़े सभी खर्चों को निकालने के बाद वे प्रतिमाह लगभग 15 से 18 हजार रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं।
इस प्रकार उनकी वार्षिक शुद्ध आय लगभग 1 लाख 80 हजार से 2 लाख 16 हजार रुपये तक पहुंच रही है।
स्वरोजगार से मिली इस आर्थिक मजबूती ने संगीता के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। पहले जहां उन्हें परिवार की जरूरतों के लिए ऋण का सहारा लेना पड़ता था, वहीं अब वे अपनी कमाई से घरेलू खर्चों में योगदान दे रही हैं।
उनकी उपलब्धि बताती है कि ग्रामीण महिलाओं को उचित अवसर और सहयोग मिलने पर वे गैर-कृषि गतिविधियों में भी सफलतापूर्वक स्वरोजगार स्थापित कर सकती हैं।
परिवार को मिला आर्थिक संबल, बच्चों के बेहतर भविष्य की राह हुई आसान
ई-रिक्शा से होने वाली नियमित आय ने संगीता देवी के परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है। अब वे अपनी कमाई से बच्चों के पालन-पोषण और उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने में योगदान दे रही हैं। परिवार के दैनिक खर्चों में सहयोग देने के साथ ही आवश्यकता पड़ने पर अपने पति की भी आर्थिक मदद करती हैं।
संगीता के लिए यह उपलब्धि केवल आय बढ़ने तक सीमित नहीं है। स्वयं का रोजगार होने से उनके आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूती मिली है। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में बराबर की भागीदारी निभाते हुए वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए प्रयास कर रही हैं।
बिहान की ताकत से बनीं लखपति दीदी, दूसरी महिलाओं को भी दिखा रहीं नई राह
संगीता देवी बताती हैं कि बिहान मिशन से जुड़ने के बाद उन्हें स्व-सहायता समूह की सामूहिक शक्ति, बचत और ऋण सुविधा के साथ आजीविका के नए अवसरों के बारे में जानकारी मिली। स्व-सहायता समूह ने उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर दिया, वहीं मुख्यमंत्री जशपुर एक्सप्रेस योजना ने स्वयं का व्यवसाय शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आज संगीता ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। वे अन्य बिहान दीदियों को भी केवल खेती और पारंपरिक आजीविका गतिविधियों तक सीमित नहीं रहने, बल्कि अपनी रुचि और स्थानीय जरूरतों के अनुसार गैर-कृषि व्यवसाय तथा स्वरोजगार के नए अवसर अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
उनका मानना है कि महिलाएं यदि आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और उपलब्ध अवसरों का सही उपयोग करें, तो वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति जताया आभार
संगीता देवी ने अपनी सफलता के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन जशपुर के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री जशपुर एक्सप्रेस योजना से मिले ई-रिक्शा ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया है। इससे न केवल परिवार की आमदनी बढ़ी है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और सम्मान के साथ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिली है।
संगीता की सफलता ग्रामीण महिला सशक्तीकरण की एक प्रेरक कहानी है। उन्होंने साबित किया है कि स्वरोजगार के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और सही अवसर मिलने पर महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल कर सकती हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित आजीविका संवर्धन की पहल और बिहान मिशन से मिल रहे सहयोग का लाभ उठाकर संगीता जैसी महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अपनी भागीदारी बढ़ा रही हैं।
दुलदुला की संगीता देवी का ‘लखपति दीदी’ बनने का सफर यह संदेश देता है कि आत्मनिर्भरता के लिए बड़े संसाधनों से अधिक महत्वपूर्ण है आगे बढ़ने का संकल्प और उपलब्ध अवसरों का सदुपयोग। उनकी सफलता आज गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है।