रायपुर, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली, धान खरीदी, खाद्यान्न भंडारण, उज्ज्वला योजना, सिटी गैस वितरण, विधिक माप विज्ञान और उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में राज्य सरकार की उपलब्धियों एवं आगामी कार्ययोजनाओं की जानकारी दी।
विभाग के अनुसार राज्य में खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के साथ किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और उपभोक्ताओं के अधिकारों के संरक्षण के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है।
83.36 लाख राशनकार्डधारियों को मिल रहा खाद्य सुरक्षा का लाभ
जनवरी 2024 में राज्य में करीब 77 लाख राशनकार्ड प्रचलित थे, जिनमें 2.69 करोड़ सदस्य पंजीकृत थे। वर्तमान में राशनकार्डों की संख्या बढ़कर 83.36 लाख हो गई है और इनमें 2.73 करोड़ सदस्य पंजीकृत हैं।
विभाग के मुताबिक वर्तमान में राज्य की अनुमानित जनसंख्या के लगभग 87 प्रतिशत लोगों को खाद्य सुरक्षा का लाभ मिल रहा है। पिछले तीन वर्षों में करीब 10.44 लाख नए राशनकार्ड जारी किए गए तथा 16.93 लाख नए सदस्य राशनकार्डों में जोड़े गए हैं।
राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वर्तमान में 14,182 शासकीय उचित मूल्य दुकानें संचालित हैं। पिछले तीन वर्षों में 445 नई उचित मूल्य दुकानों का आवंटन किया गया है।
74.89 लाख टन चावल का वितरण
अंत्योदय, प्राथमिकता, निराश्रित एवं निशक्तजन परिवारों को पात्रता के अनुसार चावल निशुल्क तथा सामान्य श्रेणी के परिवारों को 10 रुपये प्रति किलो की दर से चावल उपलब्ध कराया जा रहा है।
जनवरी 2024 से जुलाई 2026 तक राशनकार्डधारियों को कुल 74.89 लाख टन चावल वितरित किया गया है।
इसके अलावा बस्तर संभाग के 7.97 लाख राशनकार्डधारी परिवारों को रियायती दर पर गुड़ उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी अवधि में 26,723 टन गुड़ वितरित किया गया।
अनुसूचित एवं माडा क्षेत्रों के करीब 31.64 लाख अंत्योदय एवं प्राथमिकता परिवारों को 5 रुपये प्रति किलो की दर से प्रतिमाह चना उपलब्ध कराया जा रहा है। जनवरी 2024 से जुलाई 2026 तक 1.43 लाख टन चना वितरित किया गया।
वहीं आयोडीनयुक्त नमक योजना के तहत 74.46 लाख राशनकार्डधारी परिवारों को लाभ मिल रहा है। इसी अवधि में 2.69 लाख टन नमक वितरित किया गया। अंत्योदय एवं प्राथमिकता परिवारों को 17 रुपये प्रति किलो की दर से प्रतिमाह एक किलो शक्कर भी उपलब्ध कराई जा रही है।
रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में शुरू हुआ ग्रेन एटीएम
छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को डिजिटल बनाने की दिशा में अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम की शुरुआत की गई है। रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में संचालित तीन ग्रेन एटीएम का संचालन 8 अगस्त 2026 से शुरू हुआ।
ग्रेन एटीएम में हितग्राही राशनकार्ड नंबर अथवा आधार नंबर दर्ज कर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के माध्यम से अपनी सुविधा के अनुसार 24 घंटे खाद्यान्न प्राप्त कर सकते हैं।
इस व्यवस्था से राशन लेने के लिए उचित मूल्य दुकानों में लगने वाली लंबी कतार से राहत मिलने की उम्मीद है। विभाग की आगामी योजना में राज्य के अन्य जिलों में भी ग्रेन एटीएम स्थापित करना शामिल है।
सिटी गैस वितरण योजना से 2030 तक 42 लाख घरों को जोड़ने का लक्ष्य
राज्य में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) व्यवस्था के लिए नीति 5 मई 2026 से प्रभावशील है। इसके तहत पाइपलाइन के माध्यम से घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक PNG तथा वाहनों के लिए CNG उपलब्ध कराने की योजना है।
वर्तमान में रायपुर और मनेन्द्रगढ़ के कुछ घरों में PNG की आपूर्ति शुरू हो चुकी है। आगामी छह महीनों में राज्य के सात अन्य शहरों तक इसका विस्तार करने की योजना है।
वर्ष 2030 तक 42 लाख घरों को इस योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
नियद नेल्लानार 2.0 के तहत 10 जिलों में खाद्यान्न वितरण
नियद नेल्लानार 2.0 योजना के तहत बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, मोहला-मानपुर, नारायणपुर, सुकमा, कोंडागांव, खैरागढ़-छुईखदान और गरियाबंद सहित 10 जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 11.41 लाख राशनकार्डधारी परिवारों को खाद्यान्न, चना, शक्कर, नमक और गुड़ का वितरण किया जा रहा है।
उज्ज्वला योजना के तहत 39 लाख महिलाओं को गैस कनेक्शन
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का संचालन किया जा रहा है। राज्य में अब तक 39 लाख महिलाओं को गैस कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं।
विभाग के अनुसार प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना 3.0 के तहत छत्तीसगढ़ गैस कनेक्शन वितरण के मामले में देश का चौथा अग्रणी राज्य है।
धान खरीदी में 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा
किसानों के हित में वर्ष 2023 से धान खरीदी की सीमा 15 क्विंटल से बढ़ाकर 21 क्विंटल प्रति एकड़ की गई है। उपार्जित धान के लिए राशि 2,300 रुपये से बढ़ाकर 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की गई है।
खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में प्रदेश के 2,739 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 25.49 लाख किसानों से रिकॉर्ड 149.25 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया।
वहीं खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 2,740 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 25.24 लाख किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई।
वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य एवं कृषक उन्नति योजना के तहत 25.49 लाख किसानों को 46,289 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2025-26 में 25.24 लाख किसानों को 43,723 करोड़ रुपये अंतरित किए गए।
धान खरीदी में डिजिटल तकनीक से फर्जीवाड़े पर नियंत्रण
धान खरीदी केंद्रों में किसानों की सुविधा के लिए पारदर्शी टोकन प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन, नमी मापक यंत्र और बायोमेट्रिक डिवाइस जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
बायोमेट्रिक एवं आधार सत्यापन के माध्यम से फर्जी धान उपार्जन पर नियंत्रण स्थापित किया गया है। वहीं इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर के जरिए धान खरीदी एवं निराकरण की प्रक्रिया की निगरानी की जा रही है।
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 9.73 लाख क्विंटल अवैध धान परिवहन जब्त किया गया, जिससे शासन को करीब 301.89 करोड़ रुपये की बचत होने का दावा विभाग ने किया है।
विभाग के अनुसार डिजिटल सुधारों के माध्यम से फर्जी पंजीयन, दूसरे राज्यों से धान की आवक, बिचौलियों की भूमिका, अवैध रीसाइक्लिंग और गैर-कृषकों की प्रविष्टियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है, जिससे शासन को करीब 4,000 करोड़ रुपये की प्रत्यक्ष बचत हुई है।
2026-27 के लिए किसान पंजीयन शुरू
खरीफ वर्ष 2026-27 में धान खरीदी के लिए किसान पंजीयन 1 जुलाई से 31 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित किया गया है।
एग्रिस्टेक आईडी वाले पिछले वर्ष के पंजीकृत किसानों को धान विक्रय के लिए मान्य किया गया है। ऐसे किसानों को अलग से पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी। नई भूमि खरीदी, बिक्री, नामांतरण अथवा बंटवारे की स्थिति में संबंधित भूमि की मैपिंग कराना आवश्यक होगा।
इस वर्ष डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से प्रत्येक खसरा एवं कम्पार्टमेंट स्तर पर वास्तविक फसल क्षेत्र का ऑनलाइन सत्यापन किए जाने की योजना है।
खाद्यान्न भंडारण क्षमता का विस्तार
पिछले तीन वर्षों में 27 जिलों के 55 स्थानों पर 2.94 लाख मीट्रिक टन क्षमता के नए गोदामों का निर्माण पूरा किया गया है।
वर्तमान में 8 जिलों के 13 स्थानों पर 89,088 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम निर्माण कार्य प्रगतिरत हैं।
आगामी दो वर्षों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली एवं धान से प्राप्त चावल के भंडारण के लिए 2.71 लाख टन क्षमता के नए गोदामों के निर्माण की कार्ययोजना है। इसके अलावा PEG योजना के तहत 3.5 लाख टन क्षमता के गोदाम निर्माण की भी योजना है।
विधिक माप विज्ञान में ऑनलाइन और स्व-घोषणा आधारित व्यवस्था
व्यापार सुगमता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ विधिक मापविज्ञान नियमों में प्रस्तावित संशोधनों के तहत निर्माताओं, मरम्मतकर्मियों एवं विक्रेताओं के लिए लाइसेंस व्यवस्था समाप्त कर ऑनलाइन पंजीयन और स्व-घोषणा आधारित प्रक्रिया लागू करने की पहल की गई है।
इसके साथ ही LPG, CNG, LNG, लिक्विड नाइट्रोजन, विभिन्न धातुओं और वन उत्पादों को भी दायरे में शामिल करने का प्रस्ताव है।
ई-हियरिंग से उपभोक्ता विवादों के निपटारे में तेजी
उपभोक्ता आयोगों को अधिक सुलभ बनाने के लिए राज्य में डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा दिया गया है। विभाग के अनुसार ई-हियरिंग सेवा भारत में पहली बार छत्तीसगढ़ से शुरू की गई और अब 18 जिलों में यह सुविधा उपलब्ध है।
अक्टूबर 2023 से जुलाई 2026 तक राज्य उपभोक्ता आयोग में प्राप्त 2,058 शिकायतों में से 1,720 मामलों का निराकरण किया गया। इसी अवधि में जिला उपभोक्ता आयोगों द्वारा 10,891 मामलों का निपटारा किया गया।
इस अवधि में कुल शिकायतों में 16.88 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति निर्धारित की गई, जिसमें से 16.02 करोड़ रुपये प्रभावित पक्षकारों को भुगतान किए जा चुके हैं।
अगले दो वर्षों में स्मार्ट पीडीएस और ग्रेन एटीएम का विस्तार
विभाग की आगामी कार्ययोजना में स्मार्ट-पीडीएस/सार्थक पीडीएस योजना का क्रियान्वयन, दूरस्थ क्षेत्रों की 704 ऑफलाइन उचित मूल्य दुकानों को ऑनलाइन करना, अन्य जिलों में ग्रेन एटीएम स्थापित करना और खाद्यान्न भंडारण क्षमता बढ़ाना शामिल है।
इसके साथ ही आगामी दो वर्षों में 12 जिलों में PNG गैस उपलब्ध कराने के लिए पाइपलाइन विस्तार की योजना बनाई गई है।
खाद्य विभाग के अनुसार इन योजनाओं का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता, डिजिटल सुविधा और बेहतर निगरानी सुनिश्चित करना है।