रायपुर: छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि जीवन में बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए अनुकूल परिस्थितियों से अधिक दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत जरूरी है। व्यक्ति की पारिवारिक पृष्ठभूमि, आर्थिक स्थिति और शुरुआती सुविधाओं की कमी उसके भविष्य की अंतिम सीमा तय नहीं करती। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और उसे हासिल करने के लिए ईमानदारी से प्रयास किया जाए, तो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सफलता का रास्ता बनाया जा सकता है।
वित्त मंत्री श्री चौधरी 25 अक्टूबर को नवा रायपुर स्थित हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचएनएलयू) में आयोजित कोलोसस, अंतरराष्ट्रीय मॉडल यूनाइटेड नेशंस एवं यूथ पार्लियामेंट 2026 के समापन समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए अपने बचपन, शिक्षा और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) तक पहुंचने की संघर्षपूर्ण यात्रा साझा की। उन्होंने युवाओं से जीवन में सकारात्मक सोच बनाए रखने, कठिनाइयों का सामना करने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में भारतीय हॉकी खिलाड़ी एवं ओलंपिक पदक विजेता श्री शमशेर सिंह, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर वी.सी. विवेकानंदन सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे। वित्त मंत्री ने विश्वविद्यालय द्वारा मॉडल यूनाइटेड नेशंस और यूथ पार्लियामेंट जैसे आयोजनों के माध्यम से युवाओं को संवाद, नेतृत्व और विचारों की अभिव्यक्ति का अवसर उपलब्ध कराने की सराहना की।
गांव के छोटे से सरकारी स्कूल से शुरू हुई सफलता की यात्रा
विद्यार्थियों के साथ अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने बताया कि उनका जन्म रायगढ़ जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनके पिता शासकीय विद्यालय में शिक्षक थे, लेकिन जब वे मात्र आठ वर्ष के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। उनकी माता ने केवल चौथी कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की थी। पारिवारिक संसाधन सीमित थे और परिस्थितियां भी कठिन थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी।
उन्होंने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल में हुई। जिस मिडिल स्कूल में वे पढ़ते थे, उसकी छत खपरैल की थी। बारिश के दौरान कक्षाओं में पानी भर जाता था। नौवीं से बारहवीं तक की पढ़ाई के दौरान भी शिक्षकों की भारी कमी थी। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि बारहवीं कक्षा में पूरे वर्ष गणित की केवल चार कक्षाएं ही आयोजित हो पाई थीं।
वित्त मंत्री ने कहा कि इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी अपनी कमजोरियों और संसाधनों की कमी को सपनों के रास्ते की बाधा नहीं बनने दिया। उनका मानना था कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, व्यक्ति को अपने लक्ष्य की दिशा में लगातार आगे बढ़ते रहना चाहिए।
आईएएस बनने का सपना लेकर मसूरी पहुंचे, अकादमी के गेट से लौटना पड़ा
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने अपने जीवन का एक प्रेरक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2000 में बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे भिलाई पहुंचे। उस समय आईएएस की तैयारी के लिए आवश्यक किताबें आसानी से उपलब्ध नहीं होती थीं। भिलाई और रायपुर के पुस्तक बाजारों में तलाश करने के बाद भी जब पर्याप्त अध्ययन सामग्री नहीं मिली, तो उन्होंने दिल्ली जाने का निर्णय लिया।
दिल्ली पहुंचने के बाद वे अपने एक मित्र के साथ मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी देखने पहुंचे। उस समय उनकी उम्र लगभग 18 वर्ष थी। उन्होंने अकादमी के प्रवेश द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मी से भीतर जाकर प्रशिक्षण संस्थान देखने की इच्छा जताई, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं मिला।
श्री चौधरी ने बताया कि उस घटना से वे भावुक हो गए थे, लेकिन उसी क्षण उन्होंने संकल्प लिया कि एक दिन वे भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित होकर इसी अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त करने आएंगे।
उन्होंने युवाओं से कहा कि जीवन में अपमान, असफलता और कठिन परिस्थितियों को निराशा का कारण बनाने के बजाय उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा बनाना चाहिए। असफलता से निराश होने के बजाय उससे सीख लेकर अपने लक्ष्य की ओर और मजबूती से बढ़ना चाहिए।
दिल्ली की तपती गर्मी और आर्थिक तंगी के बीच जारी रखी पढ़ाई
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने दिल्ली में अपनी पढ़ाई के दिनों का उल्लेख करते हुए बताया कि सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण उन्हें बेहद साधारण परिस्थितियों में रहना पड़ा। शुरुआत में वे दिल्ली के हकीकत नगर क्षेत्र में एक मकान की ऊपरी मंजिल पर किराए से रहते थे। कमरे की छत एस्बेस्टस शीट की थी, जिसके कारण गर्मियों में कमरा अत्यधिक गर्म हो जाता था। पढ़ाई करते समय लगातार पसीना बहता रहता था, फिर भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी।
उन्होंने बताया कि बाद में कम किराए के कारण उन्हें दिल्ली की एक कॉलोनी में कब्रिस्तान के समीप स्थित कमरे में भी रहना पड़ा। आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए वे लगभग 12 किलोमीटर दूर जाकर ट्यूशन पढ़ाते थे। ट्यूशन से मिलने वाली राशि और परिवार से प्राप्त सीमित आर्थिक सहयोग के सहारे उन्होंने अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जारी रखी।
श्री चौधरी ने कहा कि इन तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने कभी नकारात्मक सोच को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्हें हमेशा विश्वास रहा कि मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के बल पर वे अपने लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।
युवाओं से बोले—अपनी परिस्थितियों को नहीं, अपनी क्षमताओं को पहचानें
वित्त मंत्री ने कहा कि युवावस्था जीवन का वह महत्वपूर्ण समय है, जब व्यक्ति अपने भविष्य की दिशा तय करता है। इस दौरान चुनौतियों और असफलताओं का सामना करना स्वाभाविक है, लेकिन उनसे घबराने के बजाय सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति की पारिवारिक पृष्ठभूमि, आर्थिक स्थिति या शुरुआती शैक्षणिक सुविधाएं उसके भविष्य की अंतिम सीमा निर्धारित नहीं करतीं। सकारात्मक दृष्टिकोण, आत्मविश्वास, अनुशासन और निरंतर प्रयास से जीवन में नई ऊंचाइयों तक पहुंचा जा सकता है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी क्षमताओं को पहचानें, बड़े लक्ष्य निर्धारित करें और उन्हें हासिल करने के लिए पूरी ईमानदारी एवं समर्पण के साथ मेहनत करें। जीवन में कितनी भी कठिनाइयां आएं, सकारात्मक सोच और लक्ष्य के प्रति समर्पण कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
नेतृत्व क्षमता विकसित करने में सहायक हैं मॉडल यूनाइटेड नेशंस और यूथ पार्लियामेंट
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित मॉडल यूनाइटेड नेशंस और यूथ पार्लियामेंट जैसे कार्यक्रमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विषयों पर विचार-विमर्श करने, विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने और अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने का अवसर प्रदान करते हैं।
इन आयोजनों से युवाओं में संवाद कौशल, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की समझ विकसित होती है। उन्होंने आयोजन में शामिल विद्यार्थियों, विश्वविद्यालय प्रबंधन और आयोजकों को बधाई देते हुए युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।