जशपुर: जिले के सभी आश्रम एवं छात्रावासों में बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण आवासीय वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने सभी चिन्हांकित आश्रम एवं छात्रावासों का नियमित और प्रभावी निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए जिले में 182 नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जो अपने-अपने चिन्हांकित आश्रम एवं छात्रावासों का औचक निरीक्षण करेंगे तथा निरीक्षण से संबंधित समस्त जानकारी ऑनलाइन चेकलिस्ट के माध्यम से दर्ज करेंगे।
कलेक्टर ने सोमवार को आयोजित साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक में आश्रम-छात्रावासों के निरीक्षण की प्रगति की समीक्षा करते हुए सभी नोडल अधिकारियों को गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले के सभी आश्रम एवं छात्रावासों में बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और मूलभूत सुविधाओं का नियमित मूल्यांकन आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके।
बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार, अपर कलेक्टर श्री प्रदीप कुमार साहू, सभी एसडीएम, जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
कलेक्टर ने बताया कि जिले में संचालित बालक छात्रावासों के लिए पुरुष अधिकारियों तथा बालिका छात्रावासों के लिए महिला अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जिससे निरीक्षण अधिक प्रभावी एवं संवेदनशील तरीके से किया जा सके।
उन्होंने निर्देशित किया कि निरीक्षण के दौरान अधिकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई चेकलिस्ट के प्रत्येक बिंदु की जानकारी अनिवार्य रूप से भरें। निरीक्षण रिपोर्ट में निरीक्षण की तिथि के साथ-साथ छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था, अधीक्षक एवं अधीक्षिका की उपस्थिति और निवास, सीसीटीवी कैमरों की उपलब्धता, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, खिड़कियों में ग्रिल एवं जाली, विद्युत तारों, स्विच एवं अन्य विद्युत व्यवस्थाओं की सुरक्षा का परीक्षण किया जाएगा।
इसके अलावा छात्रावास में उपलब्ध बेड, गद्दे, मच्छरदानियां, पंखे, प्रत्येक कमरे में पानी की उपलब्धता, बच्चों के पीने के स्वच्छ पानी की व्यवस्था, शौचालयों एवं स्नानागारों की संख्या, उनकी कार्यशील स्थिति तथा साफ-सफाई की भी विस्तृत जानकारी ऑनलाइन दर्ज करनी होगी।
कलेक्टर ने कहा कि अधिकारी यह भी सुनिश्चित करें कि आश्रम-छात्रावास परिसर पूरी तरह झाड़ियों, कचरे और जलभराव से मुक्त हो। परिसर की समग्र स्वच्छता की स्थिति का भी मूल्यांकन किया जाए। वहीं बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता, रसोईघर एवं खाद्यान्न भंडारण कक्ष की साफ-सफाई और सुव्यवस्थित व्यवस्था का भी विशेष रूप से निरीक्षण किया जाएगा।
उन्होंने निर्देश दिए कि निरीक्षण के दौरान यह भी देखा जाए कि छात्रावास में फर्स्ट एड किट उपलब्ध एवं उपयोग योग्य स्थिति में है या नहीं, बालिका छात्रावासों में सैनिटरी नैपकिन की पर्याप्त उपलब्धता है या नहीं तथा लाइब्रेरी और स्टडी रूम बच्चों के अध्ययन के लिए उपयोग योग्य स्थिति में हैं या नहीं।
कलेक्टर ने यह भी कहा कि बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए छात्रावासों में समाचार पत्र एवं पत्रिकाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही आगंतुक पंजी का नियमित संधारण, आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों का प्रदर्शन तथा अन्य आवश्यक अभिलेखों की भी जांच की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि निरीक्षण केवल औपचारिकता न रहे, बल्कि प्रत्येक नोडल अधिकारी अपने निरीक्षण के आधार पर वास्तविक स्थिति की जानकारी ऑनलाइन दर्ज करें, ताकि प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई समय पर की जा सके। कलेक्टर ने कहा कि आश्रम एवं छात्रावासों में अध्ययनरत बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।