रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में माइनिंग से हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ रहा छत्तीसगढ़, नई औद्योगिक नीति से बदल रही राज्य की पहचान

रायपुर। खनिज और प्राथमिक प्रसंस्करण आधारित औद्योगिक पहचान रखने वाला छत्तीसगढ़ अब वैल्यू एडेड और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के नए दौर की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की औद्योगिक रणनीति का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को केवल कच्चे संसाधनों के आपूर्तिकर्ता के बजाय उन्नत तकनीक और उच्च मूल्य वाले तैयार उत्पादों के निर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना है।

राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में इस बदलाव का आधार तैयार किया गया है। नई नीति के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स, रक्षा उपकरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी और ग्रीन स्टील जैसे क्षेत्रों में निवेश को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

सरकार की रणनीति स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और उनके मूल्य संवर्धन पर केंद्रित है, ताकि राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई तकनीक और आधुनिक विनिर्माण से जोड़ा जा सके।

करीब 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव

नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद राज्य में निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ी है। राज्य के निवेश प्रोत्साहन पोर्टल के अनुसार पिछले करीब 18 महीनों में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों से 1.5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

खास बात यह है कि निवेश प्रस्तावों का बड़ा हिस्सा पारंपरिक खनिज आधारित उद्योगों से आगे बढ़कर एआई, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे विशेष क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है।

नवा रायपुर में एआई और डेटा सेंटर से जुड़े निवेश तथा सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव राज्य की बदलती औद्योगिक दिशा को दर्शाते हैं।

इसी क्रम में राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC 2.0) को मंजूरी मिली है। इस परियोजना से 3 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश और करीब 9 हजार प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है।

स्टील उत्पादन से आगे ग्रीन स्टील की नई संभावनाएं

स्टील उत्पादन में मजबूत आधार रखने वाला छत्तीसगढ़ अब इस क्षेत्र में भी अगली पीढ़ी के उत्पादन और हरित विनिर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कार्बन उत्सर्जन कम करने और पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक उत्पादन को बढ़ावा देने के बीच ग्रीन स्टील राज्य के लिए एक बड़े अवसर के रूप में उभर रहा है।

हाल ही में आयोजित छत्तीसगढ़ ग्रीन स्टील डायलॉग के दौरान करीब 13 हजार 840 करोड़ रुपये की निवेश प्रतिबद्धताओं ने इस क्षेत्र की संभावनाओं को और मजबूत किया है।

राष्ट्रीय स्तर पर विशेष स्टील उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ अपने खनिज संसाधन, मौजूदा स्टील उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र की क्षमता का उपयोग उच्च मूल्य वाले विशेष स्टील उत्पादों के निर्माण में कर सकता है।

फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बढ़ रही संभावनाएं

फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र भी छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक तस्वीर का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभर रहा है। पिछले करीब 18 महीनों में फार्मा क्षेत्र में लगभग 992.53 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जबकि 216 करोड़ रुपये की लागत वाले चार प्रोजेक्ट कार्यान्वयन के चरण में हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से विस्तार हो रहा है। केंद्र सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत देशभर में 69 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है।

छत्तीसगढ़ में EMC 2.0 जैसी पहल राज्य को राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने का अवसर प्रदान कर सकती है।

बस्तर और सरगुजा में स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों पर जोर

राज्य की औद्योगिक विकास रणनीति केवल बड़े औद्योगिक शहरों तक सीमित नहीं है। बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में वन उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर विकसित हो सकते हैं। स्थानीय संसाधनों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण होने से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।

निवेश को जमीन पर उतारने के लिए मजबूत हो रहा तंत्र

बड़े निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने के लिए राज्य सरकार ने सिंगल विंडो व्यवस्था, राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड और ऑनलाइन स्वीकृति तंत्र को मजबूत किया है।

100 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली परियोजनाओं के लिए प्राथमिकता आधारित सुविधाएं और त्वरित अनुमोदन की व्यवस्था भी की गई है। इसका उद्देश्य निवेशकों को प्रक्रियागत बाधाओं से राहत देते हुए परियोजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारना है।

छत्तीसगढ़ के पास खनिज, ऊर्जा और मजबूत औद्योगिक आधार की ताकत पहले से मौजूद है। अब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य इन प्राकृतिक संसाधनों तक सीमित रहने के बजाय उनसे उच्च मूल्य वाले तैयार उत्पादों का निर्माण करना है।

इलेक्ट्रॉनिक्स से ग्रीन स्टील, फार्मा से सेमीकंडक्टर और एआई से डेटा सेंटर तक नए क्षेत्रों में बढ़ता निवेश इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ अपनी औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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