नया छत्तीसगढ़, नई उम्मीदें: पर्यटन से गांवों की तस्वीर बदलने वाले नायकों की अनकही कहानी
लेखक: धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक जनसंपर्क, रायपुर
छत्तीसगढ़ उत्तर से दक्षिण तक नैसर्गिक विरासत की अमूल्य धरा है। यहां की नदियां, पहाड़, घने जंगल, जलप्रपात, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और जनजातीय परंपराएं राज्य को विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य दुनिया को छत्तीसगढ़ की वास्तविक सुंदरता, सांस्कृतिक समृद्धि और प्राकृतिक विविधता से परिचित कराना है।
छत्तीसगढ़ का बस्तर पर्यटन के नक्शे पर अपनी विशिष्ट पहचान, समृद्ध संस्कृति और प्रकृति की अनुपम छटा वाले क्षेत्र के रूप में उभर रहा है। बस्तर का वन क्षेत्र बेहद निराला है। यहां की प्राकृतिक हरियाली और स्वच्छता पर्यटकों को आकर्षित करती है। धीरे-धीरे बस्तर न केवल विकास की धारा से जुड़ रहा है, बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी तेजी से बदल रहा है। यहां का खूबसूरत इलाका, अनूठी आदिवासी संस्कृति और घने जंगलों की छटा सबका ध्यान खींच रही है। साथ ही, यहां के लोगों का आत्मीय व्यवहार और अतिथि सत्कार भी देश-दुनिया के पर्यटकों को लुभा रहा है।
जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए ‘छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति’ तैयार
छत्तीसगढ़ अब अपनी माटी की खुशबू, समृद्ध जनजातीय परंपराओं और गांवों के नैसर्गिक सौंदर्य के दम पर देश-दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर छाने को तैयार है। राज्य सरकार ने पर्यटन के विकास के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने के लिए नई औद्योगिक नीति 2024-2030 में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया है। साथ ही, जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए ‘छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति’ तैयार की है।
इसी कड़ी में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ की शुरुआत की गई है। इन तीनों निर्णयों से गांवों में रोजगार, आजीविका और सांस्कृतिक संरक्षण का नया अध्याय शुरू होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार का यह त्रिआयामी मॉडल पर्यटन के माध्यम से स्थानीय लोगों के आर्थिक सशक्तिकरण की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत करेगा।
विश्व प्रसिद्ध बस्तर का दशहरा
बारिश का मौसम बीतने के बाद बस्तर के हरे-भरे जंगल, पहाड़ और उफनते जलप्रपात पर्यटकों का मन मोह लेते हैं। यही वजह है कि बस्तर आज देश के बेहतरीन पर्यटन स्थलों में अपनी जगह बना रहा है।
बस्तर का दशहरा पहले से ही विश्व प्रसिद्ध है। 75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा अपनी अनूठी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। हाल के वर्षों में इस अवसर पर पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या में भी खासा इजाफा दर्ज किया गया है। इस वर्ष भी बस्तर दशहरा देखने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद है। नवरात्रि और दशहरा के अलावा दीपावली के अवसर पर भी यहां बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं।
बस्तर के सहज जीवन से वैश्विक पहचान तक
बस्तर के बालक चेन्दरू मंडावी की बाघ ‘टेंबू’ के साथ दोस्ती ने कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ के सहज ग्रामीण जीवन की पहचान स्थापित की थी। इसी नाम से राज्य सरकार ने ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ की शुरुआत की है।
इसके लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार नियम, 2025’ लागू किया गया है, जो पूरे छत्तीसगढ़ में प्रभावी होगा। इस पुरस्कार के तहत ग्रामीण पर्यटन, लोककला, हस्तशिल्प और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण में जुटे जमीनी नायकों अथवा संस्थाओं को एक लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय ज्यूरी पुरस्कार विजेता का चयन करेगी। विजेता को राज्योत्सव के मंच पर सम्मानित किया जाएगा और उनके कार्यों पर आधारित एक सचित्र स्मारिका भी जारी की जाएगी।
‘टाइगर बॉय’ चेन्दरू मंडावी की स्मृति में ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार
छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘चेन्दरू’ राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार की शुरुआत की है। यह पुरस्कार बस्तर के ‘टाइगर बॉय’ के नाम से मशहूर चेन्दरू मंडावी की स्मृति में शुरू किया गया है। चेन्दरू मंडावी ने स्वीडिश फिल्म ‘जंगल सागा’ के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की थी।
इस पुरस्कार का उद्देश्य गांवों की संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय जीवनशैली को पर्यटन से जोड़ना तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना है। यह पुरस्कार उन लोगों और संस्थाओं को पहचान देने का प्रयास है, जो जमीनी स्तर पर पर्यटन के माध्यम से अपने गांव और क्षेत्र की तस्वीर बदल रहे हैं।
होमस्टे से पर्यटक जानेंगे गांवों की जीवनशैली
पुरस्कार और प्रोत्साहन के साथ-साथ राज्य सरकार की होमस्टे नीति इस पूरी व्यवस्था को व्यावहारिक धरातल प्रदान कर रही है। इसके माध्यम से पर्यटक महंगे होटलों के बजाय गांवों में पारंपरिक घरों में ठहरने का अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।
होमस्टे के जरिए पर्यटकों को स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प, लोककला, लोकसंस्कृति, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर और समुदाय आधारित पर्यटन का अनुभव मिलेगा। छत्तीसगढ़ इस पहल के माध्यम से देश में ग्रामीण पर्यटन का एक विशिष्ट मॉडल बन सकता है।
पर्यटकों को ग्रामीण परिवारों के घरों में ठहरने, पारंपरिक भोजन करने, चारपाई का उपयोग करने, खेत-खलिहानों में घूमने और कुएं के पानी जैसी ग्रामीण जीवनशैली से जुड़ी चीजों को देखने और अनुभव करने का अवसर मिलेगा। इससे पर्यटक केवल पर्यटन स्थलों को देखने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्थानीय जीवन और संस्कृति को करीब से समझ सकेंगे।
होमस्टे नीति से ग्रामीण परिवारों को मिलेगा अतिरिक्त आय का अवसर
होमस्टे नीति 2025-30 के माध्यम से ग्रामीण, जनजातीय और पर्यटन क्षेत्रों के परिवारों को अपने घरों को पर्यटन सुविधा में बदलकर अतिरिक्त आय अर्जित करने और स्वरोजगार का अवसर मिलेगा। वहीं, पर्यटकों को स्थानीय खान-पान, कला, परंपरा, जनजातीय संस्कृति और जीवनशैली से सीधे जुड़ने का अवसर प्राप्त होगा।
इससे कम प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को भी नई पहचान मिलेगी। राज्य सरकार ने इस नीति के तहत नए होमस्टे की स्थापना तथा मौजूदा मकानों के उन्नयन के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान किया है। इसके साथ ही होमस्टे संचालकों को आतिथ्य, स्वच्छता और व्यवसाय संचालन का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी की गई है।
इस पहल से पर्यटन के माध्यम से होने वाली आय सीधे ग्रामीण परिवारों, महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों तक पहुंचेगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा। नीति के जरिए बस्तर और सरगुजा के अंचलों से लेकर मैदानी गांवों तक होमस्टे आधारित पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर समृद्धि के नए द्वार खोले
छत्तीसगढ़ सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान किया है। राज्य की नई औद्योगिक नीति के तहत पर्यटन, मनोरंजन और अन्य सामाजिक सेवा क्षेत्रों को विशेष रूप से शामिल किया गया है। पर्यटन परियोजनाओं को सामान्य उद्योगों की तरह न्यूनतम पूंजी निवेश पर विभिन्न प्रकार की रियायतें और सुविधाएं दी जा रही हैं।
छत्तीसगढ़ में पर्यटन उद्योग की अपार संभावनाएं हैं। राज्य सरकार इन संभावनाओं को साकार करने की दिशा में काम कर रही है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने से निवेश, रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के नए अवसर खुलेंगे।
सरगुजा से बस्तर तक और गांवों से शहरों तक पर्यटन सुविधाओं के विकास पर जोर दिया जा रहा है। पर्यटन क्षेत्र में नए रोजगारों का सृजन होने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार आधारभूत संरचना, सड़क संपर्क, आवासीय सुविधाओं और पर्यटक सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। पर्यटकों के लिए बेहतर ठहराव, परिवहन तथा आधुनिक सुविधाओं का विकास छत्तीसगढ़ को एक आकर्षक पर्यटन गंतव्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य में इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड द्वारा छत्तीसगढ़ में निवेश की इच्छा लगातार जताई गई है, जो प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के निवेश से पर्यटन अधोसंरचना मजबूत होगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर निर्मित होंगे।
गांव का युवा अपने ही क्षेत्र में बन सकेगा पर्यटन उद्यमी
राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को सेवा उद्योग का दर्जा देने का कदम भी इस क्षेत्र को गति प्रदान करेगा। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन संबंधी अधोसंरचना, इको-टूरिज्म और होमस्टे विकसित करने वाले युवाओं तथा स्वयं सहायता समूहों को विशेष कैपिटल सब्सिडी, ब्याज अनुदान और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस का लाभ मिलेगा।
इसके अलावा ग्रामीण युवाओं को आतिथ्य, टूर गाइडिंग और डिजिटल मार्केटिंग का प्रशिक्षण देने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य युवाओं को पर्यटन क्षेत्र से जुड़ी आवश्यक दक्षताओं से लैस करना है, ताकि वे अपने ही क्षेत्र में पर्यटन उद्यमी बन सकें।
इस प्रकार छत्तीसगढ़ सरकार की पर्यटन संबंधी पहलें ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, स्वरोजगार, स्थानीय संस्कृति के संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण की संभावनाओं को विस्तार दे रही हैं। गांवों की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय परंपराओं और स्थानीय जीवनशैली को पर्यटन से जोड़कर ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका के नए रास्ते खोले जा सकते हैं।