“कौशल ही आज के समय की सबसे बड़ी पूंजी है। जिस युवा के पास हुनर है, उसके लिए अवसरों की कोई कमी नहीं है।” आज के प्रतिस्पर्धी और तकनीक आधारित युग में यह विचार केवल प्रेरणादायक संदेश नहीं, बल्कि विकास की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था, नई तकनीकों का विस्तार और उद्योगों की बदलती जरूरतों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल शैक्षणिक डिग्री पर्याप्त नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल ही सफलता की असली कुंजी है। इसी सोच को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से युवाओं को रोजगारोन्मुखी एवं उद्योगों की मांग के अनुरूप आधुनिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।
विश्व युवा कौशल विकास दिवस के अवसर पर यह कहना उचित होगा कि छत्तीसगढ़ ने कौशल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। राज्य सरकार युवाओं को केवल प्रशिक्षण ही नहीं दे रही, बल्कि गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, रोजगार, स्वरोजगार, उद्योगों से साझेदारी और आधुनिक अधोसंरचना के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का व्यापक अभियान चला रही है।
लगभग पांच लाख युवाओं को मिला कौशल प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के प्रारंभ से अब तक प्रदेश के 4 लाख 94 हजार 330 युवाओं को विभिन्न रोजगारपरक ट्रेडों में कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। इनमें से 2 लाख 74 हजार 934 युवाओं को रोजगार से जोड़ा गया है। वर्तमान में राज्यभर में 375 व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता (199 शासकीय एवं 176 अशासकीय) राष्ट्रीय कौशल अर्हता फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाला प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 9 हजार 418 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें से 7 हजार 528 युवाओं को रोजगार प्राप्त हो चुका है, जबकि 6 हजार 679 युवा वर्तमान में विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
बदलते दौर के अनुरूप आधुनिक पाठ्यक्रम
समय के साथ रोजगार के स्वरूप में तेजी से बदलाव आया है। इसी परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पारंपरिक ट्रेडों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मेंटेनेंस, ड्रोन ऑपरेटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग (AI-ML), साइबर सुरक्षा, सूर्यमित्र (सौर ऊर्जा) जैसे 21वीं सदी के अत्याधुनिक पाठ्यक्रम प्रारंभ किए हैं।
इस वर्ष विशेष रूप से जल वितरण संचालक (Water Distribution Operator) पाठ्यक्रम शुरू किया गया है, जिसके अंतर्गत 2,770 युवाओं को मल्टी-स्किल प्रशिक्षण देकर सीधे रोजगार से जोड़ने की कार्ययोजना बनाई गई है।
गुणवत्ता पर विशेष जोर
छत्तीसगढ़ में कौशल विकास केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं।
अब प्रत्येक प्रशिक्षक के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता एवं अनुभव के साथ ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (TOT) प्रमाणन अनिवार्य किया गया है। प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी के लिए मूल्यांकन से पूर्व कम से कम सात दिवस का ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (OJT) भी अनिवार्य किया गया है, जिससे उन्हें उद्योगों की वास्तविक कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके।
प्रशिक्षण केंद्रों में फेस आधारित ऑनलाइन बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू की गई है तथा सभी केंद्रों में आई.पी. आधारित सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं, जिनके माध्यम से प्रशिक्षण गतिविधियों की सतत निगरानी की जा रही है। इससे पारदर्शिता, अनुशासन और प्रशिक्षण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आया है।
प्रशिक्षण के साथ रोजगार की भी गारंटी
मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रशिक्षण के बाद युवाओं के रोजगार पर विशेष ध्यान दिया जाता है। प्रशिक्षण संचालन की अनुमति देने से पहले प्रत्येक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता द्वारा रोजगार उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं का परीक्षण किया जाता है। परीक्षण के बाद ही प्रशिक्षण संचालन की अनुमति दी जाती है।
इतना ही नहीं, प्रशिक्षण संस्थानों को मिलने वाली राशि का 60 प्रतिशत भुगतान तभी किया जाता है, जब प्रशिक्षित युवाओं का नियोजन सुनिश्चित हो जाता है। यह व्यवस्था प्रशिक्षण संस्थानों को गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण देने के लिए प्रेरित करती है।
बस्तर के युवाओं तक पहुंच रहा कौशल विकास
प्रदेश के दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं तक कौशल विकास की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए बस्तर संभाग के प्रत्येक विकासखंड में स्किल डेवलपमेंट सेंटर (SDC) स्थापित किए जा रहे हैं।
जिला बीजापुर में असिस्टेंट मेसन कोर्स प्रारंभ किया जा चुका है। वहीं बस्तर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, कांकेर एवं बीजापुर सहित छह पुनर्वास केंद्रों का व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता के रूप में पंजीयन किया गया है तथा अन्य केंद्रों को भी शीघ्र जोड़ा जा रहा है।
उद्योगों के साथ साझेदारी से बढ़ रही रोजगार क्षमता
राज्य सरकार ने उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए कई प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ महत्वपूर्ण समझौते किए हैं।
महिंद्रा एंड महिंद्रा के सहयोग से ट्रैक्टर मैकेनिक प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है, जिसमें अब तक 101 युवा प्रशिक्षित हो चुके हैं तथा 60 युवा प्रशिक्षणरत हैं।
साइरोनिक्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से रायपुर के लाईवलीहुड कॉलेज में इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी के पांच जॉब रोल में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
नांदी फाउंडेशन के माध्यम से सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित महिलाओं को एम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 1,142 युवा प्रशिक्षित हो चुके हैं।
पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में लॉन्ड्री सुपरवाइजर सहित अन्य रोजगारपरक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। वहीं श्री सत्य साई हेल्थ एवं एजुकेशन ट्रस्ट के सहयोग से स्वास्थ्य सेवाओं एवं कार्डियक केयर से संबंधित उन्नत कौशल प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किए जा रहे हैं।
लाईवलीहुड कॉलेज बने कौशल विकास के सशक्त केंद्र
प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित लाईवलीहुड कॉलेज आज युवाओं के लिए कौशल विकास का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। वर्ष 2013 से अब तक इन कॉलेजों में 68 हजार 552 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है।
इनमें से 28 हजार 820 युवाओं को रोजगार तथा 10 हजार 632 युवाओं को स्वरोजगार प्राप्त हुआ है। इस प्रकार कुल 39 हजार 452 युवा आजीविका से जुड़ चुके हैं। वर्तमान में 2 हजार 413 युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
इसी प्रकार पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत वर्ष 2024 से अब तक 13 हजार 188 युवाओं को लाईवलीहुड कॉलेजों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया है।
आधुनिक अधोसंरचना का तेजी से विस्तार
राज्य के 26 जिलों में लाईवलीहुड कॉलेज भवन पूर्ण होकर संचालित हैं। नवीन जिलों में भी भवन निर्माण एवं भूमि आबंटन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।
प्रदेश में 26 बालिका छात्रावास तथा 20 बालक छात्रावास पूर्ण होकर संचालित हैं। शेष छात्रावासों के निर्माण एवं भूमि आबंटन का कार्य प्रगति पर है।
नवा रायपुर में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
छत्तीसगढ़ सरकार युवाओं को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।
नवा रायपुर में लाईवलीहुड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी, जहां अत्याधुनिक मशीनों, आधुनिक प्रयोगशालाओं, विशेष कार्यशालाओं तथा उद्योगों की मांग के अनुरूप इंजीनियरिंग एवं गैर-इंजीनियरिंग क्षेत्रों में विश्वस्तरीय कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भूमि लीज अनुबंध हेतु 2 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की बढ़ती पहचान
प्रदेश के युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर लगातार मिल रहा है। वर्ष 2025-26 में 19 कौशल ट्रेडों में आयोजित जिला एवं राज्य स्तरीय इंडिया स्किल प्रतियोगिता में 3,327 युवाओं ने भाग लिया, जिनमें से 381 प्रतिभागी राज्य स्तर तक पहुंचे।
भुवनेश्वर में आयोजित ईस्ट जोन क्षेत्रीय इंडिया स्किल प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के 38 प्रतिभागियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 1 स्वर्ण, 2 रजत, 5 कांस्य तथा 4 मेडल ऑफ एक्सीलेंस सहित कुल 12 पदक अर्जित किए।
राष्ट्रीय स्तर की इंडिया स्किल प्रतियोगिता में भी राज्य के 3 प्रतिभागियों ने प्रतिनिधित्व किया, जिनमें से 1 प्रतिभागी ने मेडल ऑफ एक्सीलेंस प्राप्त किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं सफल आयोजन के लिए भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को प्रशस्ति पत्र से भी सम्मानित किया गया।
कौशल विकास से आत्मनिर्भरता की नई दिशा
आज छत्तीसगढ़ का कौशल विकास मॉडल केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशिक्षण से लेकर रोजगार, स्वरोजगार, उद्योगों से साझेदारी, आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना और राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं तक युवाओं को एक समग्र अवसर प्रदान कर रहा है।
इलेक्ट्रिक व्हीकल, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, सौर ऊर्जा और जल वितरण संचालन जैसे भविष्य की तकनीकों में प्रशिक्षण देकर राज्य आने वाली पीढ़ी को नई अर्थव्यवस्था के लिए तैयार कर रहा है। वहीं बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों तक कौशल विकास की पहुंच सुनिश्चित कर सरकार समावेशी विकास की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य कर रही है।
विश्व युवा कौशल विकास दिवस पर छत्तीसगढ़ का अनुभव यह सिद्ध करता है कि कौशल विकास केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और रोजगारयुक्त बनाने का सशक्त अभियान है। नई तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, उद्योगों के साथ मजबूत साझेदारी, रोजगार सुनिश्चित करने की प्रभावी व्यवस्था तथा आधुनिक अधोसंरचना के माध्यम से छत्तीसगढ़ देश में कौशल विकास का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभर रहा है। आने वाले वर्षों में यह पहल न केवल लाखों युवाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।