जशपुर: बगीचा क्षेत्र में हाथी के हमले में 71 वर्षीय बुजुर्ग की मौत, वन विभाग ने बताया—विगत वर्षों की अपेक्षा जनहानि में कमी

जशपुर: बगीचा वन परिक्षेत्र में जंगली हाथियों के दल की मौजूदगी के बीच एक 71 वर्षीय बुजुर्ग की हाथी के हमले में मौत हो गई। घटना 9 अगस्त की रात ग्राम घुघरी के कदमटोली क्षेत्र में हुई। वन विभाग के अनुसार, मृतक अपनी निजी भूमि पर बनाई गई अस्थायी झोपड़ी में रह रहे थे। इसी दौरान जंगली हाथी ने झोपड़ी को क्षतिग्रस्त कर दिया और उन्हें करीब तीन मीटर तक घसीटकर पटक दिया, जिससे घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई।

वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, बगीचा वन परिक्षेत्र के परिसर महादेवडांड के वनकक्ष क्रमांक आरएफ-1259 में करीब 16 जंगली हाथियों का दल विचरण कर रहा था। हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में हाथी गश्ती दल और आरआरटी की तैनाती कर निगरानी एवं गश्त शुरू कर दी थी।

वन अमले द्वारा घोघर, सरईपानी, घुघरी, रेंगोला, महुआडीह और बोडापहरी सहित प्रभावित गांवों में लगातार गश्त की जा रही थी। ग्रामीणों को माइक और सायरन के माध्यम से हाथियों की मौजूदगी की जानकारी देकर सतर्क किया जा रहा था। साथ ही हाथियों के संभावित आवागमन वाले क्षेत्रों में नहीं जाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की जा रही थी।

झोपड़ी में रह रहे थे बुजुर्ग

इसी दौरान रात करीब 12:30 बजे वनकक्ष क्रमांक आरएफ-1096 से लगे क्षेत्र में ग्राम घुघरी कदमटोली निवासी मार्सेल लकड़ा (71 वर्ष), पिता सोमा लकड़ा अपनी निजी भूमि पर बनी अस्थायी झोपड़ी में मौजूद थे। वन विभाग के अनुसार, जंगली हाथी ने झोपड़ी को क्षतिग्रस्त किया और बुजुर्ग को झोपड़ी से करीब तीन मीटर दूर तक घसीटकर पटक दिया। घटना में उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटनास्थल पर मिले हाथी के पदचिह्न और गोबर

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम, हाथी गश्ती दल और आरआरटी मौके पर पहुंची। घटनास्थल के निरीक्षण के दौरान जंगली हाथी के पदचिह्न और गोबर मिले, जिससे आसपास हाथी की मौजूदगी की पुष्टि हुई।

वन विभाग के अनुसार, मौका पंचनामा और प्राप्त जानकारी में यह भी सामने आया कि मृतक की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं थी। उनके भाई जुलियस लकड़ा ने उन्हें क्षेत्र में हाथियों के विचरण की जानकारी देते हुए गांव घुघरी ले जाने का प्रयास किया था, लेकिन उन्होंने गांव जाने से इनकार कर दिया और अपनी अस्थायी झोपड़ी में ही रुक गए।

प्रभावित क्षेत्रों में बढ़ाई गई निगरानी

घटना के बाद वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ कर दी है। हाथियों के दल की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। हाथी गश्ती दल और आरआरटी द्वारा प्रभावित गांवों तथा हाथियों के संभावित आवागमन वाले क्षेत्रों में लगातार गश्त की जा रही है।

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथियों के विचरण की सूचना मिलने पर जंगल या हाथियों के संभावित मार्ग पर न जाएं। रात के समय अकेले घर से बाहर निकलने, हाथियों को देखने, उनका पीछा करने अथवा उनके करीब जाने का प्रयास न करें। हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर सुरक्षित स्थान पर रहें और वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें।

वन विभाग के अनुसार, हाथी प्रभावित क्षेत्रों में माइक, सायरन और अन्य माध्यमों से ग्रामीणों को लगातार सतर्क किया जा रहा है। मानव-हाथी द्वंद्व की घटनाओं को न्यूनतम करने के लिए विभाग द्वारा लगातार निगरानी और आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं।

विगत वर्षों की अपेक्षा जनहानि में कमी

वन विभाग ने बताया कि जशपुर वनमंडल में विगत वर्षों की अपेक्षा हाथियों के कारण होने वाली जनहानि में कमी आई है। इसके बावजूद हाथियों के विचरण वाले क्षेत्रों में ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर लगातार निगरानी, गश्त और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

वन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि जंगली हाथियों से संबंधित किसी भी प्रकार की सूचना मिलने पर तत्काल निकटतम वन अमले को सूचित करें और स्वयं हाथियों के नजदीक जाकर जोखिम न उठाएं।

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