छत्तीसगढ़: कैबिनेट में लिए गए बड़े फैसले—UCC समिति गठन से लेकर महिलाओं, सैनिकों और उद्योग क्षेत्र को राहत

रायपुर, 15 अप्रैल 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्यहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय लिए गए। इन फैसलों का प्रभाव सामाजिक व्यवस्था, महिला सशक्तिकरण, औद्योगिक विकास, खनन क्षेत्र, पशुपालन तथा वित्तीय प्रबंधन जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ेगा।

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में पहल को लेकर रहा। मंत्रिपरिषद ने Uniform Civil Code का प्रारूप तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है। समिति के अन्य सदस्यों के मनोनयन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है। वर्तमान में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण, भरण-पोषण जैसे पारिवारिक मामलों में अलग-अलग धर्मों के अनुसार विभिन्न पर्सनल लॉ लागू हैं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में असमानता और जटिलता उत्पन्न होती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश दिया गया है। इसी परिप्रेक्ष्य में गठित यह समिति नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विधि विशेषज्ञों से व्यापक सुझाव लेकर एक समावेशी और न्यायसंगत प्रारूप तैयार करेगी। समिति वेब पोर्टल के माध्यम से भी सुझाव आमंत्रित कर सकेगी और तैयार प्रारूप को विधिक प्रक्रिया के तहत मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के बाद विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा निर्णय लेते हुए मंत्रिपरिषद ने महिलाओं के नाम पर संपत्ति के पंजीयन पर लगने वाले शुल्क में 50 प्रतिशत की कमी करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय का उद्देश्य महिलाओं को संपत्ति अर्जन के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाना है। हालांकि इस फैसले से राज्य सरकार को लगभग 153 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा, लेकिन सामाजिक दृष्टि से इसे एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक पहल माना जा रहा है।

राज्य के सेवारत सैनिकों, भूतपूर्व सैनिकों एवं उनकी विधवाओं के हित में भी एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इसके तहत उन्हें जीवनकाल में एक बार छत्तीसगढ़ राज्य के भीतर 25 लाख रुपये तक की संपत्ति खरीदने पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी। यह निर्णय उन सैनिकों के लिए विशेष रूप से सहायक होगा, जिनका जीवन निरंतर स्थानांतरण और अस्थिरता में बीतता है और सेवानिवृत्ति के बाद वे स्थायी निवास की व्यवस्था करना चाहते हैं।

औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015 में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। इस संशोधन के माध्यम से सेवा क्षेत्र को भूमि आवंटन के लिए स्पष्ट वैधानिक पात्रता प्रदान की जाएगी। साथ ही भूमि आवंटन की न्यूनतम और अधिकतम सीमाओं में तार्किक संतुलन स्थापित किया जाएगा। लैंड बैंक में उपलब्ध भूखंडों के लिए एप्रोच रोड का वैधानिक प्रावधान किया गया है, जिससे औद्योगिक इकाइयों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके। इसके अतिरिक्त NBFC सहित विभिन्न वित्तीय संस्थाओं को शामिल करने से उद्योगों को ऋण प्राप्त करने के अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे। कंपनियों में शेयरधारिता परिवर्तन संबंधी नियमों को भी स्पष्ट किया गया है, जिससे प्रक्रियात्मक पारदर्शिता बढ़ेगी और Ease of Doing Business को बढ़ावा मिलेगा। PPP मॉडल को स्पष्ट प्रावधानों के साथ प्रोत्साहित करने से निजी निवेश में वृद्धि और औद्योगिक अवसंरचना के विकास को बल मिलेगा।

खनन क्षेत्र में सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए भी मंत्रिपरिषद ने महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत (उत्खनन एवं व्यवसाय) नियम, 2025 में संशोधन करते हुए यह प्रावधान किया गया है कि केंद्र या राज्य सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों, जैसे छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड को रेत खदानें आरक्षित की जा सकेंगी। इस निर्णय से रेत आपूर्ति में सुधार होगा और निजी पट्टेदारों के एकाधिकार को समाप्त करने में मदद मिलेगी, जिससे दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में भी रेत की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

इसके साथ ही छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 में व्यापक संशोधन को भी स्वीकृति दी गई है। इन संशोधनों का उद्देश्य अवैध खनन पर नियंत्रण, राजस्व में वृद्धि और प्रक्रियाओं का सरलीकरण है। बंद या निष्क्रिय खदानों पर सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं, जिनमें 30 वर्षों के बाद भाटक दर में वृद्धि तथा खदानों को व्यपगत घोषित करने की व्यवस्था शामिल है। अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के मामलों में न्यूनतम 25 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 5 लाख रुपये तक का जुर्माना निर्धारित किया गया है। इसके अलावा जमानत राशि निर्धारण और रॉयल्टी चुकता प्रमाण पत्र को पूरे प्रदेश में एकसमान लागू करने जैसे प्रावधान भी किए गए हैं। उत्खनन पट्टों के समामेलन, अनुबंध के बाद भू-प्रवेश तथा पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप संचालन को भी सुदृढ़ किया गया है, जिससे खनिज संसाधनों का व्यवस्थित दोहन सुनिश्चित हो सके।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के उद्देश्य से दुधारू पशु प्रदाय संबंधी पायलट परियोजना में संशोधन किया गया है। अब इस योजना का लाभ सभी सामाजिक वर्गों को मिलेगा, जिससे विशेष रूप से अनुसूचित जनजाति सहित अन्य वर्गों के हितग्राहियों को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और उनकी आय में वृद्धि होगी।

पशुपालन क्षेत्र में रोग नियंत्रण के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। पशुओं को संक्रामक रोगों से बचाने हेतु आवश्यक टीकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए National Dairy Development Board की सहायक कंपनी Indian Immunologicals Limited से सीधे टीकों की खरीदी करने की अनुमति दी गई है। निविदा प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिस्पर्धा न होने और जेम पोर्टल पर दर उपलब्ध न होने के कारण टीकों की आपूर्ति में बाधा आ रही थी। इस निर्णय से वर्ष 2026-27 में पशुओं के टीकाकरण में नियमितता आएगी, जिससे उनकी मृत्यु दर में कमी और दुग्ध, अंडा एवं मांस उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित होगी।

वित्तीय प्रबंधन से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच पेंशन दायित्वों के बंटवारे के संदर्भ में छत्तीसगढ़ द्वारा पूर्व में किए गए 10,536 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भुगतान की वापसी पर सहमति बनी है। बैंकिंग त्रुटियों के कारण यह अतिरिक्त भुगतान हुआ था, जिसका संयुक्त सत्यापन किया गया। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 2,000 करोड़ रुपये की राशि पहले ही दी जा चुकी है, जबकि शेष 8,536 करोड़ रुपये आगामी छह वार्षिक किश्तों में प्रदान किए जाएंगे। मंत्रिपरिषद ने इस व्यवस्था को स्वीकार करते हुए वित्त विभाग को आवश्यक कार्रवाई के लिए अधिकृत किया है।

बैठक में इसके अतिरिक्त आगामी खरीफ सीजन के लिए उर्वरक की उपलब्धता तथा राज्य में एलपीजी गैस आपूर्ति की स्थिति की भी समीक्षा की गई, ताकि आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता समय पर सुनिश्चित की जा सके।

इन सभी निर्णयों को राज्य के समग्र विकास, सामाजिक न्याय और आर्थिक सुदृढ़ता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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