रायपुर: राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग दिवस (12 अगस्त) के अवसर पर इंडिया स्पेस लैब द्वारा “रिमोट सेंसिंग एंड जीआईएस फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट” विषय पर एक विशेष ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, सरकारी अधिकारियों तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न हितधारकों के बीच भू-स्थानिक (जियोस्पेशियल) प्रौद्योगिकी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आपदा प्रबंधन में इसके प्रभावी उपयोग की जानकारी उपलब्ध कराना है।
कार्यशाला के दौरान देश के विशेषज्ञ प्रतिभागियों को रिमोट सेंसिंग, जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (GIS), अर्थ ऑब्जर्वेशन टेक्नोलॉजी, जियो-एआई (GeoAI), ड्रोन मैपिंग, मशीन लर्निंग आधारित अनुप्रयोगों तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े वास्तविक केस स्टडी की विस्तृत जानकारी देंगे। प्रतिभागियों को यह भी बताया जाएगा कि प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी, जोखिम मूल्यांकन, राहत एवं बचाव कार्यों की योजना तथा संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन में आधुनिक जियोस्पेशियल तकनीकों का उपयोग किस प्रकार किया जाता है।
आयोजकों के अनुसार यह कार्यशाला विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों, सरकारी अधिकारियों तथा आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी। प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी मिलेगी, जिससे वे भविष्य में अनुसंधान, शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों में इन तकनीकों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे।
कार्यशाला के लिए ऑनलाइन पंजीयन की अंतिम तिथि 30 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले सभी प्रतिभागियों को ई-प्रमाण पत्र (E-Certificate) भी प्रदान किया जाएगा, जिससे उन्हें अपने शैक्षणिक एवं व्यावसायिक प्रोफाइल को मजबूत करने का अवसर मिलेगा।
इंडिया स्पेस लैब ने छत्तीसगढ़ के सभी स्कूलों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों, राज्य एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों, शासकीय विभागों, स्वायत्त संस्थाओं, शोध एवं प्रशिक्षण संस्थानों से इस कार्यशाला की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का आग्रह किया है। इसके लिए विभागीय वेबसाइटों, पोर्टलों, सूचना पट्टों, समाचार पत्रिकाओं तथा अन्य संचार माध्यमों के जरिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने की अपील भी की गई है।
आयोजकों का मानना है कि इस पहल से विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं में वैज्ञानिक सोच, जियोस्पेशियल शिक्षा, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों और आधुनिक डिजिटल उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही सरकारी अधिकारियों और आपदा प्रबंधन से जुड़े संस्थानों की क्षमता में भी वृद्धि होगी।
इच्छुक प्रतिभागी 30 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन पंजीयन कर इस राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला में भाग ले सकते हैं।
पंजीयन लिंक: https://isl.ac.in/workshop/