नई दिल्ली। देश में जनगणना 2027 के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना (Population Enumeration) की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अधिकांश राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक घर-घर जाकर जनगणना की जाएगी।
इस दौरान प्रगणक घर-घर पहुंचकर नागरिकों से उनकी जनसंख्या, सामाजिक, आर्थिक और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाएंगे। जनगणना के लिए 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक ऑनलाइन स्व-गणना (Self-Enumeration) का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।
यह जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होगी। पहली बार देश में डिजिटल माध्यम से जनगणना की जाएगी और स्वतंत्रता के बाद पहली बार सभी जातियों की व्यापक गणना भी शामिल होगी।
40 सवालों के जरिए जुटाई जाएगी महत्वपूर्ण जानकारी
जनगणना के दूसरे चरण में प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे। इनके माध्यम से देश की जनसंख्या की सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय स्थिति का विस्तृत आंकड़ा तैयार किया जाएगा।
इन सवालों में प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- व्यक्ति का नाम और परिवार के मुखिया से संबंध
- जन्म तिथि, आयु और वैवाहिक स्थिति
- धर्म और जाति से संबंधित जानकारी
- माता-पिता का नाम और जन्म संबंधी विवरण
- शिक्षा, साक्षरता और डिजिटल साक्षरता
- रोजगार, व्यवसाय और आर्थिक गतिविधियां
- जन्म स्थान और पलायन से संबंधित जानकारी
- मातृभाषा और अन्य भाषाओं का ज्ञान
- बैंक खातों और कुछ अन्य पहचान संबंधी जानकारियां
इन आंकड़ों के आधार पर देश की जनसंख्या और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का विस्तृत आकलन किया जाएगा।
करीब 95 साल बाद सभी जातियों की व्यापक गणना
जनगणना 2027 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक सभी जातियों की गणना है।
इससे पहले वर्ष 1931 में ब्रिटिश शासन के दौरान सभी जातियों की व्यापक गणना की गई थी। स्वतंत्रता के बाद नियमित जनगणना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना होती रही, लेकिन अन्य जातियों की व्यापक गणना शामिल नहीं थी।
अब केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के दूसरे चरण में जाति संबंधी जानकारी शामिल करने का निर्णय लिया है।
इससे देश में विभिन्न जातियों की जनसंख्या और सामाजिक स्थिति से संबंधित आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे, जो भविष्य में नीतियों और योजनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना
जनगणना 2027 भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी। इस बार प्रगणक मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से लोगों की जानकारी दर्ज करेंगे।
इसके साथ ही नागरिकों को स्वयं ऑनलाइन जानकारी दर्ज करने का विकल्प भी दिया जाएगा। इस सुविधा को स्व-गणना यानी सेल्फ एन्यूमरेशन कहा जाता है।
ऑनलाइन जानकारी दर्ज करने के बाद एक विशेष स्व-गणना पहचान संख्या (SE ID) प्राप्त होगी। घर-घर पहुंचने वाले प्रगणक इस पहचान संख्या के माध्यम से दर्ज जानकारी का सत्यापन करेंगे।
इस व्यवस्था से जनगणना प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक, व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
10 जनवरी से 24 जनवरी तक मिलेगी स्व-गणना की सुविधा
जनगणना के दूसरे चरण में नागरिकों को घर बैठे अपनी जानकारी दर्ज करने का अवसर मिलेगा।
इसके लिए 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक स्व-गणना पोर्टल खुला रहेगा।
नागरिक इस अवधि में ऑनलाइन अपनी जानकारी भर सकेंगे। इसके बाद 25 जनवरी से शुरू होने वाले घर-घर सर्वेक्षण के दौरान प्रगणक संबंधित जानकारी का सत्यापन करेंगे।
यह सुविधा स्वैच्छिक होगी। जिन नागरिकों द्वारा ऑनलाइन जानकारी दर्ज नहीं की जाएगी, उनसे प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी प्राप्त करेंगे।
1 मार्च 2027 की रात 12 बजे होगी जनगणना की संदर्भ तिथि
भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की रात 12 बजे निर्धारित की गई है।
इसका अर्थ है कि जनगणना के आंकड़ों में लोगों की स्थिति निर्धारित संदर्भ समय के आधार पर दर्ज की जाएगी।
हालांकि, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों तथा कुछ अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जनगणना की तारीखें अलग निर्धारित की गई हैं।
कुछ राज्यों में अलग होगा जनगणना का कार्यक्रम
केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, उत्तराखंड, लद्दाख और कुछ बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य कार्यक्रम से अलग समय पर जनगणना कराई जाएगी।
इसके अलावा मणिपुर में जनगणना की तारीखों को लेकर अलग व्यवस्था निर्धारित की गई है।
इसलिए 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 की तारीख को पूरे देश के लिए एक समान कार्यक्रम मानना सही नहीं होगा।
जनगणना 2027 देश की जनसंख्या, सामाजिक संरचना और आर्थिक स्थिति का विस्तृत आंकड़ा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। डिजिटल व्यवस्था और जाति गणना के समावेश के कारण इस बार की जनगणना को विशेष महत्व दिया जा रहा है।