जशपुर, 12 जुलाई 2026। जशपुर जिले में प्राथमिक शिक्षा को अधिक प्रभावी, सहज और समावेशी बनाने के लिए ‘नींव’ (NEEV) बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। यह पहल राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के नेतृत्व में, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) जशपुर के मार्गदर्शन तथा लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (LLF), नई दिल्ली के सहयोग से संचालित होगी।
202 स्कूलों में सादरी भाषा के माध्यम से होगी पढ़ाई
कार्यक्रम के तहत कुनकुरी और बगीचा विकासखंड के 202 प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा 1 और 2 के विद्यार्थियों को उनकी मातृभाषा सादरी के माध्यम से शिक्षा दी जाएगी। इसका उद्देश्य बच्चों की घर की भाषा और विद्यालय की भाषा के बीच सहज सेतु बनाना है, ताकि वे विषयों को बेहतर ढंग से समझ सकें और आत्मविश्वास के साथ सीख सकें।
स्थानीय संस्कृति से जुड़ी शिक्षण सामग्री तैयार
कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए DIET के मार्गदर्शन में स्थानीय शिक्षकों ने सादरी भाषा में विशेष शिक्षण सामग्री तैयार की है। इसमें स्थानीय संस्कृति, परिवेश, लोककथाओं और बच्चों के दैनिक जीवन के अनुभवों को शामिल किया गया है।
शिक्षण सामग्री में बिग बुक, चित्र चार्ट, कविता पोस्टर, अभ्यास पुस्तिकाएं तथा कविता-कहानी संग्रह शामिल हैं। इन सभी सामग्रियों की अंतिम अकादमिक समीक्षा 7 जुलाई 2026 को DIET के विशेषज्ञों द्वारा पूरी कर ली गई है।
20 सदस्यीय जिला स्रोत समूह को मिला प्रशिक्षण
कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए 20 सदस्यीय जिला स्रोत समूह (DRG) का गठन किया गया है। इस समूह का 8 से 11 जुलाई 2026 तक DIET जशपुर में चार दिवसीय प्रशिक्षण एवं कार्यशाला आयोजित की गई।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बहुभाषी शिक्षा की अवधारणा, सादरी भाषा में विकसित शिक्षण सामग्री के प्रभावी उपयोग, गतिविधि आधारित शिक्षण और कक्षा संचालन की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
बच्चों के सीखने का अनुभव बदलेगा
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर DIET के प्राचार्य एम.जेड.यू. सिद्दीकी ने कहा कि ‘नींव’ कार्यक्रम जशपुर के बच्चों के सीखने के अनुभव को नई दिशा देगा और उन्हें अपनी मातृभाषा में सीखने का आत्मविश्वास प्रदान करेगा। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से विद्यालयों में इस कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
जिला प्रशासन का मानना है कि यह पहल जशपुर में प्राथमिक शिक्षा को अधिक समावेशी, गुणवत्तापूर्ण और बच्चों के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।