जशपुर: गौ तस्करी के खिलाफ जशपुर पुलिस की कार्रवाई में दो पिकअप वाहनों से ले जाए जा रहे 08 नग गौवंशों को सकुशल बरामद किया गया। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है, जबकि एक आरोपी पिकअप वाहन छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल दोनों पिकअप वाहन भी जब्त किए हैं।
रात में चांपा टोली के पास हुई कार्रवाई
21 सितंबर 2026 की रात्रि पुलिस को सूचना मिली थी कि कुनकुरी की ओर से दो पिकअप वाहनों में गौवंशों को ठूंस-ठूंसकर भरकर जशपुर होते हुए झारखंड ले जाया जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने के बाद डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देश, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार पाटनवार के मार्गदर्शन तथा एसडीओपी जशपुर निमितेश सिंह के नेतृत्व में कार्रवाई की गई।
रात्रि करीब 12 से 01 बजे के बीच चांपा टोली जशपुर के पास हाईवे पर नाकाबंदी कर संदिग्ध वाहनों की जांच की जा रही थी। इस दौरान गौ सेवक भी पुलिस के साथ मौजूद थे।
इसी दौरान JH 07M 9843 नंबर की पिकअप को रोककर जांच की गई। वाहन में चार नग गौवंश मिले। वाहन में बैठे दो संदिग्धों ने अपना नाम आर्यन उम्र 20 वर्ष, निवासी आगडीह महुआ टोली और राकेश राम उम्र 28 वर्ष, निवासी पैकु, थाना सिटी कोतवाली जशपुर बताया। गौवंशों के संबंध में वैध दस्तावेज नहीं दिखाए जाने पर दोनों को हिरासत में लिया गया।
दूसरे वाहन में भी मिले चार गौवंश
कार्रवाई के दौरान पीछे आ रहे CG 13BB 8096 नंबर के दूसरे पिकअप वाहन को देखकर उसका चालक वाहन छोड़कर अंधेरे एवं जंगल का फायदा उठाकर फरार हो गया। वाहन की तलाशी लेने पर उसमें भी चार नग गौवंश मिले। पुलिस ने दोनों वाहनों से कुल 08 गौवंशों को सकुशल बरामद किया।
दो आरोपियों को भेजा गया जेल, अन्य की तलाश जारी
पुलिस ने मामले में छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 4, 6, 10 एवं पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 के तहत अपराध दर्ज किया है।
विवेचना के दौरान आरोपियों से पूछताछ में अपराध स्वीकार करने तथा पर्याप्त सबूत मिलने के बाद आर्यन और राकेश राम को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों की निशानदेही पर मामले से जुड़े अन्य आरोपियों को भी चिन्हित कर लिया है। फरार आरोपियों की लगातार पतासाजी की जा रही है।
कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक मोर ध्वज देशमुख, पीएसआई जितेंद्र, पीएसआई लक्ष्मी मरकाम, प्रधान आरक्षक विशाल गुप्ता, आरक्षक राम प्रताप यादव एवं नगर सैनिक थानेश्वर देशमुख की महत्वपूर्ण भूमिका रही।