जशपुर, 21 अप्रैल 2026। कृषि विज्ञान केंद्र, जशपुर में “उर्वरकों की वैकल्पिक व्यवस्था” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस अवसर पर पारंपरिक पर्व अकती तिहार भी उत्साहपूर्वक मनाया गया, जिससे कार्यक्रम में कृषि और सांस्कृतिक परंपराओं का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
कार्यक्रम में भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष श्री नरेश कुमार यादव ने कहा कि रसायन मुक्त, गौ आधारित जैविक एवं प्राकृतिक खेती आज समय की आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य के लिए वैचारिक रूप से इस दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है।
प्रशिक्षण के दौरान वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में जैविक एवं प्राकृतिक खेती के विभिन्न उपायों की जानकारी दी। इसमें गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद, जीवामृत, बीजामृत तथा नीम आधारित उत्पादों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और खेती की लागत कम करने के व्यावहारिक तरीकों को भी विस्तार से समझाया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग से न केवल उत्पादन लागत में कमी आती है, बल्कि भूमि की गुणवत्ता में सुधार होता है और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित किसानों ने अकती तिहार के अवसर पर बेहतर खेती और समृद्धि की कामना की तथा प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को अपने खेतों में अपनाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर श्रीमती संतोषी भारद्वाज (जनपद सदस्य, पत्थलगांव), कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ श्री प्रदीप कुजूर, अनीता लकड़ा, डॉ. छत्रपाल, डॉ. नागेन्द्र सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।




















