जशपुरनगर, 02 जून 2026। खरीफ सीजन 2026 की तैयारियों के बीच जशपुर जिले के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। कृषि विभाग ने दावा किया है कि जिले में खाद एवं बीज का पर्याप्त भंडारण कर लिया गया है और किसानों को उर्वरकों की किसी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। विभाग द्वारा रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, जैव उर्वरक एवं हरी खाद के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे खेती की लागत कम होने के साथ मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहे।
कृषि विभाग के अनुसार सहकारी क्षेत्र में निर्धारित 19,150 मीट्रिक टन उर्वरक लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 7,756 मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 40 प्रतिशत है। इनमें से 1,186.12 मीट्रिक टन उर्वरकों का किसानों द्वारा उठाव किया जा चुका है, जबकि वर्तमान में 6,569.83 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध हैं।
विभाग ने बताया कि सहकारी समितियों में गत वर्ष की खपत के आधार पर 80 प्रतिशत यूरिया और 60 प्रतिशत डीएपी का भंडारण कराया जा रहा है। शेष आवश्यकता नैनो यूरिया, नैनो डीएपी तथा अन्य वैकल्पिक एनपीके उर्वरकों के माध्यम से पूरी की जाएगी। किसानों को उनकी आवश्यकता एवं वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुरूप उर्वरकों का वितरण किया जाएगा।
नैनो उर्वरकों की उपलब्धता भी जिले में सुनिश्चित की गई है। वर्तमान में 4,128 लीटर नैनो यूरिया और 3,468 लीटर नैनो डीएपी सहित कुल 7,596 लीटर नैनो उर्वरकों का भंडारण किया गया है। इनमें से 135 लीटर का वितरण हो चुका है, जबकि 7,463 लीटर नैनो उर्वरक अभी उपलब्ध हैं।
कृषि विभाग द्वारा किसानों को जैविक एवं हरी खाद अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। चयनित किसानों को प्रति एकड़ 8 किलोग्राम ढेंचा बीज और 4 किलोग्राम मूंग बीज वितरित किए जा रहे हैं। वहीं कृषि विज्ञान केंद्र डुमरबहार और शासकीय कृषि प्रक्षेत्र सुसडेगा में नील हरित काई (ब्लू ग्रीन एल्गी) उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जो प्राकृतिक रूप से नत्रजन स्थिरीकरण कर फसलों को पोषण प्रदान करती है।
उर्वरकों की गुणवत्ता और उपलब्धता पर निगरानी के लिए कृषि विभाग लगातार निरीक्षण कर रहा है। खरीफ वर्ष 2026 में अब तक जिले के 75 उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण किया गया है। अनियमितता पाए जाने पर 38 विक्रय केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरकों के भंडारण, वितरण और विक्रय में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने किसानों से केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही खाद-उर्वरक खरीदने तथा किसी भी शिकायत की स्थिति में तत्काल कृषि विभाग को सूचित करने की अपील की है।