जशपुर: बगीचा विकासखंड के दुर्गम वनांचल में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल कैलाश गुफा धाम में श्रावण मास के दौरान आयोजित होने वाला वार्षिक श्रावण मेला पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ संचालित हो रहा है। यहां प्रतिदिन जशपुर सहित छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा एवं अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में कांवरियों और श्रद्धालुओं की टोली भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंच रही है। धार्मिक आस्था के इस केंद्र में श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ-साथ स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मेले का संचालन ग्राम पंचायत सारूढ़ाब, सोनगेरसा एवं गायबुड़ा द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। पंचायतों ने श्रद्धालुओं को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। स्वच्छता दीदियों की टीम प्रतिदिन मेला परिसर, मंदिर मार्ग, विश्राम स्थल एवं आसपास के क्षेत्रों की साफ-सफाई कर रही है। साथ ही सूखा एवं गीला कचरा अलग-अलग एकत्रित कर उसका उचित निस्तारण भी किया जा रहा है, जिससे मेला परिसर स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त बना हुआ है।

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए पंचायतों द्वारा साफ-सफाई के साथ पेयजल, कचरा संग्रहण, सार्वजनिक स्थानों की नियमित सफाई और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि धार्मिक आयोजन के साथ स्वच्छता बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, इसलिए लोगों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
एसडीएम बगीचा ने जारी किया अनुमति आदेश
कैलाश गुफा श्रावण मेला के आयोजन के लिए अनुविभागीय दंडाधिकारी (राजस्व) बगीचा ने आदेश जारी कर 30 जुलाई 2026 से 28 अगस्त 2026 तक मेला आयोजित करने की अनुमति प्रदान की है। आदेश के अनुसार ग्राम पंचायत सारूढ़ाब द्वारा प्रस्तुत आवेदन एवं ग्राम पंचायत सारूढ़ाब, सोनगेरसा और गायबुड़ा के प्रस्ताव के आधार पर मेला आयोजन की अनुमति दी गई है।
जारी आदेश की प्रतिलिपि कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी जशपुर, पुलिस अधीक्षक जशपुर, तहसीलदार बगीचा, अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस), संबंधित ग्राम पंचायतों तथा थाना प्रभारी बगीचा एवं चौकी प्रभारी पंडरापाठ को आवश्यक कार्यवाही एवं सूचना के लिए भेजी गई है, ताकि मेले के दौरान कानून व्यवस्था, सुरक्षा और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित हो सकें।
श्रावण मास में आयोजित होने वाला कैलाश गुफा मेला क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। प्रशासन, पंचायतों और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से इस वर्ष भी श्रद्धालुओं को सुरक्षित, व्यवस्थित और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
