विशेष लेख
डॉ. दानेश्वरी संभाकर, उप संचालक
रायपुर, 21 अगस्त 2026। किसी भी राज्य के विकास की वास्तविक पहचान केवल उसकी सड़कों, भवनों, उद्योगों और आर्थिक आंकड़ों से नहीं होती, बल्कि इस बात से भी होती है कि उस राज्य की महिलाएं कितनी सुरक्षित, शिक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त हैं। महिलाओं की सामाजिक स्थिति, आर्थिक भागीदारी और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी सहभागिता किसी भी समाज की प्रगति का महत्वपूर्ण पैमाना होती है।
जब एक महिला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनती है, तो उसका प्रभाव केवल उसके व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहता। एक आत्मनिर्भर महिला परिवार को मजबूती देती है, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भूमिका निभाती है, समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाती है और विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करती है। यही कारण है कि महिला सशक्तिकरण को अब केवल कल्याणकारी योजनाओं के दायरे में नहीं, बल्कि समावेशी विकास और सुशासन के महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखा जा रहा है।
इसी सोच को केंद्र में रखकर छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला सशक्तिकरण को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। वर्ष 2026 को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मनाते हुए प्रदेश सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, जिन्हें प्रदेश की जनता आत्मीयता से “विष्णु भैया” के नाम से भी संबोधित करती है, के नेतृत्व में महिला केंद्रित योजनाओं और कार्यक्रमों को नई गति मिली है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित विभिन्न योजनाएं आज लाखों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में कार्य कर रही हैं।
आर्थिक सहायता से लेकर स्वरोजगार तक, स्वयं सहायता समूहों से लेकर लखपति दीदी बनाने के अभियान तक, महिला सुरक्षा से लेकर बेटियों के भविष्य तक और पोषण से लेकर कौशल विकास तक—छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की एक ऐसी व्यापक तस्वीर उभर रही है, जिसमें महिलाएं केवल योजनाओं की हितग्राही नहीं, बल्कि विकास की सक्रिय सहभागी और आर्थिक प्रगति की महत्वपूर्ण शक्ति बन रही हैं।
महतारी वंदन योजना : आर्थिक स्वतंत्रता का मजबूत आधार
छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की चर्चा जब होती है तो महतारी वंदन योजना सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के अनुसार, यह योजना महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का एक सशक्त माध्यम बन चुकी है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 10 मार्च 2024 को प्रारंभ की गई महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रदेश की 66 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है।
यह प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता महिलाओं को नियमित रूप से उपलब्ध हो रही है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं के साथ-साथ परिवार की जरूरतों में भी योगदान कर पा रही हैं। महिलाओं के नाम पर सीधे बैंक खाते में राशि पहुंचने से वित्तीय समावेशन और आर्थिक निर्णयों में उनकी भागीदारी को भी बल मिल रहा है।
अब तक योजना की 30 किस्तों के माध्यम से 19 हजार 444 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है।
योजना के निरंतर संचालन और व्यापक लाभ के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
महतारी वंदन योजना केवल मासिक आर्थिक सहायता तक सीमित पहल नहीं है। यह महिलाओं के आर्थिक आत्मविश्वास को मजबूत करने का प्रयास है। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं को छोटे लेकिन महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय लेने की क्षमता मिलती है और उनकी व्यक्तिगत तथा पारिवारिक आर्थिक भागीदारी भी बढ़ती है।
बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने की नई पहल : रानी दुर्गावती योजना
महिला सशक्तिकरण की मजबूत नींव बेटियों के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य से जुड़ी होती है। इसी दिशा में राज्य सरकार रानी दुर्गावती योजना प्रारंभ कर रही है।
इस योजना के तहत बालिका के 18 वर्ष पूर्ण होने पर 1 लाख 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने का प्रावधान है।
बेटियों के भविष्य को आर्थिक आधार देने वाली इस योजना के लिए वर्ष 2026-27 के बजट में 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
यह पहल बालिकाओं के भविष्य को लेकर परिवारों में आर्थिक सुरक्षा की भावना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बेटियों की शिक्षा, उनके भविष्य और आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने वाली योजनाएं सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
मातृत्व और बच्चों की सुरक्षा के लिए बजट में विशेष प्रावधान
महिला और बाल विकास से जुड़े कार्यक्रमों में मातृत्व सुरक्षा और बच्चों के संरक्षण को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
वर्ष 2026-27 के बजट में प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए 120 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इसके साथ ही बच्चों के संरक्षण और देखभाल से जुड़े कार्यक्रमों के लिए संचालित मिशन वात्सल्य हेतु 80 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
महिलाओं और बच्चों के जीवन की शुरुआती अवस्था में स्वास्थ्य, पोषण और संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए मातृत्व और बाल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं के लिए बजटीय प्रावधान सामाजिक विकास की व्यापक सोच का हिस्सा हैं।
पोषण और स्वास्थ्य पर बड़ा निवेश, आंगनबाड़ी व्यवस्था को नई मजबूती
महिला एवं बाल विकास की व्यवस्था में आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और माताओं तक पोषण एवं अन्य आवश्यक सेवाएं पहुंचाने में इन केंद्रों की बड़ी भूमिका होती है।
राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में आंगनबाड़ी संचालन के लिए 800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
इसके अलावा पूरक पोषण आहार के लिए 650 करोड़ रुपये तथा कुपोषण मुक्ति एवं पोषण योजनाओं के लिए 235 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
यह बजटीय प्रावधान महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण को मजबूत करने की दिशा में सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है।
आंगनबाड़ी सेवाओं के विस्तार के लिए नए केंद्रों के निर्माण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में 250 नए आंगनबाड़ी केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में अभिसरण के माध्यम से 500 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए 42 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
नए केंद्रों के निर्माण से सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और पोषण तथा बाल विकास कार्यक्रमों को अधिक व्यापक बनाने की दिशा में मदद मिलेगी।
महतारी सदन : महिलाओं के लिए प्रशिक्षण, आजीविका और सामाजिक गतिविधियों का नया केंद्र
महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना पर्याप्त नहीं है। उनके लिए ऐसा सामाजिक और संस्थागत वातावरण भी आवश्यक है, जहां वे संगठित होकर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें, आजीविका के अवसर तलाश सकें और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
इसी उद्देश्य से प्रदेश में महतारी सदन स्थापित किए जा रहे हैं।
अब तक राज्य में 368 महतारी सदनों को स्वीकृति मिल चुकी है, जिनमें से 137 महतारी सदनों का निर्माण पूर्ण हो चुका है।
वर्ष 2026-27 में 250 नए महतारी सदनों के निर्माण के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, आजीविका गतिविधियों और सामाजिक कार्यक्रमों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। भविष्य में ये केंद्र स्थानीय स्तर पर महिलाओं के सामूहिक सशक्तिकरण और आर्थिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण मंच के रूप में विकसित हो सकते हैं।
महिला सुरक्षा के लिए 33 जिलों में 34 सखी वन-स्टॉप सेंटर
महिला सशक्तिकरण का सबसे महत्वपूर्ण आधार महिलाओं की सुरक्षा है। यदि महिलाओं को सुरक्षित वातावरण नहीं मिलता तो उनकी सामाजिक और आर्थिक भागीदारी प्रभावित होती है।
महिलाओं के लिए त्वरित और समन्वित सहायता व्यवस्था उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी 33 जिलों में 34 सखी वन-स्टॉप सेंटर संचालित किए जा रहे हैं।
इन केंद्रों में घरेलू हिंसा, उत्पीड़न अथवा किसी संकटपूर्ण स्थिति का सामना कर रही महिलाओं को एक ही स्थान पर विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
सखी वन-स्टॉप सेंटरों के माध्यम से महिलाओं को—
- कानूनी सहायता,
- चिकित्सकीय सुविधा,
- मनोवैज्ञानिक परामर्श,
- अस्थायी आश्रय
जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
महिला हेल्पलाइन 181 और आपातकालीन सेवा 112 के साथ समन्वय कर त्वरित सहायता व्यवस्था भी संचालित की जा रही है।
महिला सुरक्षा की व्यवस्था को तकनीकी और प्रशासनिक रूप से अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। सखी वन-स्टॉप सेंटरों के संचालन के लिए डिजिटल एसओपी लागू करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है।
डिजिटल एसओपी के माध्यम से सेवा संचालन को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है।
स्वयं सहायता समूहों से बाजार तक : महिलाओं की आर्थिक प्रगति को नई गति
महिलाओं की वास्तविक आर्थिक आत्मनिर्भरता तब मजबूत होती है जब उन्हें केवल प्रशिक्षण या सहायता ही नहीं, बल्कि अपने उत्पादों और सेवाओं के लिए बाजार भी उपलब्ध हो।
इसी उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में महिला स्वयं सहायता समूहों को उत्पादन और विपणन की व्यवस्था से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
राज्य सरकार 200 करोड़ रुपये की लागत से यूनिटी मॉल का निर्माण कर रही है। इस मॉल के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की जा रही है।
स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने का यह प्रयास महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उत्कृष्ट महिलाओं को युवा रत्न सम्मान, सफल उद्यमियों को अध्ययन भ्रमण का अवसर
महिलाओं की उपलब्धियों को पहचान देने और अन्य महिलाओं को प्रेरित करने के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को प्रतिवर्ष युवा रत्न सम्मान प्रदान किया जाएगा।
इसके साथ ही लखपति दीदी भ्रमण योजना के माध्यम से सफल महिला उद्यमियों को देश और विदेश में अध्ययन भ्रमण का अवसर उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है।
ऐसे भ्रमण के माध्यम से महिला उद्यमियों को नए उद्यम मॉडल, बाजार व्यवस्था, उत्पादन तकनीक और सफल व्यावसायिक गतिविधियों को समझने का अवसर मिल सकता है। इसका लाभ वे अपने स्थानीय व्यवसाय और स्वयं सहायता समूहों के विकास में उपयोग कर सकती हैं।
बिहान मिशन : 2.92 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं 31.65 लाख महिलाएं
ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में बिहान मिशन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
प्रदेश में बिहान मिशन के अंतर्गत अब तक 2.92 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है।
इन समूहों से 31.65 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं।
महिला स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा दी है। सामूहिक बचत, बैंकिंग, ऋण, उत्पादन और विपणन के माध्यम से महिलाएं अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी योगदान दे रही हैं।
स्वयं सहायता समूहों की यह व्यापक संरचना महिलाओं को व्यक्तिगत स्तर से आगे बढ़कर सामूहिक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित कर रही है।
लखपति दीदी अभियान : 10 लाख 43 हजार से अधिक महिलाओं ने हासिल की नई पहचान
प्रधानमंत्री के तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है।
प्रदेश में अब तक 10 लाख 43 हजार से अधिक लखपति दीदी तैयार की जा चुकी हैं।
लखपति दीदी अभियान का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को ऐसी आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना है, जिनसे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो और वे आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन सकें।
प्रदेश में रेडी-टू-ईट निर्माण, कृषि आधारित उद्यम, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और हस्तशिल्प जैसी गतिविधियों ने महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के नए अवसर तैयार किए हैं।
इन गतिविधियों से महिलाएं स्थानीय संसाधनों और अपनी पारंपरिक क्षमताओं को आर्थिक अवसरों में बदल रही हैं।
महिला निर्माण श्रमिकों के लिए सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की अनेक योजनाएं
निर्माण क्षेत्र में कार्यरत महिला श्रमिकों को विशेष सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को जीवन के अलग-अलग चरणों में आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना और उन्हें स्वरोजगार तथा आत्मनिर्भरता के अवसरों से जोड़ना है।
मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना
इस योजना के तहत पात्र बेटियों को 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना
महिला हितग्राहियों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए इस योजना के तहत 7,900 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है।
सिलाई मशीन आधारित कार्य महिलाओं के लिए घर अथवा स्थानीय स्तर पर आय का साधन तैयार करने में सहायक हो सकता है।
दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना
महिला श्रमिकों को आजीविका और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।
इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आय का नियमित साधन विकसित करने में सहयोग देना है।
मिनीमाता महतारी जतन योजना
गर्भवती महिला श्रमिकों को आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मिनीमाता महतारी जतन योजना संचालित की जा रही है।
इस योजना के अंतर्गत पात्र गर्भवती महिला श्रमिकों को 20 हजार रुपये की सहायता प्रदान की जाती है।
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना : 24 हजार से अधिक बालिकाओं का हुआ सामूहिक विवाह
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना संचालित की जा रही है।
इस योजना के अंतर्गत अब तक 24 हजार से अधिक बालिकाओं का सामूहिक विवाह कराया जा चुका है।
प्रत्येक जोड़े के विवाह के लिए राज्य सरकार की ओर से 50 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
यह योजना सामाजिक सहयोग और आर्थिक सहायता के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को समर्थन उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रही है।
महिला समृद्धि योजना : 42,878 महिला समूहों को 129.46 करोड़ रुपये का रियायती ऋण
महिला उद्यमिता और समूह आधारित आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए महिला समृद्धि योजना के अंतर्गत महिला स्वयं सहायता समूहों को रियायती ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
अब तक 42,878 महिला समूहों को 129.46 करोड़ रुपये का रियायती ऋण प्रदान किया गया है।
ऋण के माध्यम से महिला समूह उत्पादन, सेवा और अन्य आर्थिक गतिविधियों का विस्तार कर सकते हैं। समूह आधारित ऋण व्यवस्था महिलाओं को सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियां संचालित करने और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करती है।
महतारी शक्ति ऋण योजना : बिना जमानत 25 हजार रुपये तक का ऋण
महिलाओं को छोटे स्वरोजगार और उद्यम शुरू करने के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में महतारी शक्ति ऋण योजना संचालित की जा रही है।
इस योजना के माध्यम से महिलाओं को बिना जमानत 25 हजार रुपये तक का ऋण स्वरोजगार के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।
छोटे व्यवसाय या स्वरोजगार गतिविधियों की शुरुआत में सीमित पूंजी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बिना जमानत ऋण की सुविधा उन महिलाओं के लिए उपयोगी हो सकती है, जिन्हें पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से ऋण प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से 38 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ
महिलाओं के जीवन में घरेलू सुविधाओं और स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है।
प्रदेश में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से 38 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं।
इस योजना ने बड़ी संख्या में परिवारों को स्वच्छ ईंधन की सुविधा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सुशिक्षा योजना : 2 लाख 18 हजार 139 छात्राओं को प्रतिमाह 500 रुपये की सहायता
बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए सुशिक्षा योजना के माध्यम से छात्राओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
योजना के तहत 2 लाख 18 हजार 139 छात्राओं को प्रतिमाह 500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है।
शिक्षा के लिए मिलने वाली नियमित सहायता छात्राओं और उनके परिवारों को शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग प्रदान कर सकती है। बेटियों की शिक्षा पर निवेश भविष्य में सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत आधार तैयार करता है।
शुचिता योजना : किशोरियों के स्वास्थ्य और मासिक स्वच्छता पर विशेष ध्यान
किशोरियों के स्वास्थ्य और मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए शुचिता योजना संचालित की जा रही है।
योजना के तहत प्रदेश के 2 हजार विद्यालयों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें स्थापित की गई हैं।
इसके साथ ही लाखों किशोरियों को मासिक स्वच्छता सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ी आवश्यक सुविधाएं और जागरूकता किशोरियों के स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और शिक्षा की निरंतरता के लिए महत्वपूर्ण हैं। शुचिता योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
स्थानीय से वैश्विक पहचान तक : महिला समूहों के उत्पाद बना रहे नई पहचान
छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं। महिला समूहों और आदिवासी महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं।
आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित जशप्योर ब्रांड “वोकल फॉर लोकल” अभियान का एक सफल उदाहरण बनकर उभरा है।
यह ब्रांड स्थानीय और पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक बाजार से जोड़ते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।
स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और महिला श्रम को बाजार से जोड़ने का यह मॉडल महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रहा है।
सखी साड़ी और मिलेट कैफे जैसी पहलें बढ़ा रहीं महिलाओं की आय
महिला स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए सखी साड़ी और मिलेट कैफे जैसी पहलें भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
ऐसे प्रयासों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को पहचान और बाजार मिल रहा है, वहीं महिलाओं के लिए आय के नए स्रोत तैयार हो रहे हैं।
मिलेट आधारित खाद्य उत्पादों से लेकर वस्त्र और स्थानीय हस्तनिर्मित उत्पादों तक महिलाओं की भागीदारी स्थानीय अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा ला रही है।
महतारी गौरव वर्ष : योजनाओं से आगे सामाजिक परिवर्तन का व्यापक अभियान
वर्ष 2026 को महतारी गौरव वर्ष के रूप में मनाना केवल एक प्रतीकात्मक पहल नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के योगदान, सम्मान और सशक्तिकरण को केंद्र में रखने का व्यापक प्रयास है।
महिला सशक्तिकरण की अवधारणा अब केवल किसी एक योजना या आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रह गई है। यह एक ऐसे व्यापक सामाजिक परिवर्तन का रूप ले रही है जिसमें महिलाओं को—
- आर्थिक सहायता,
- सामाजिक सुरक्षा,
- गुणवत्तापूर्ण पोषण,
- बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं,
- मातृत्व सुरक्षा,
- शिक्षा के अवसर,
- कौशल विकास,
- स्वरोजगार,
- बाजार तक पहुंच,
- वित्तीय सहायता,
- सुरक्षित वातावरण,
- कानूनी सहायता और
- सम्मानजनक जीवन
की दिशा में विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों से जोड़ा जा रहा है।
इन प्रयासों का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि महिला सशक्तिकरण को परिवार और समाज के विकास से सीधे जोड़ा गया है। एक महिला की आर्थिक प्रगति केवल उसकी व्यक्तिगत आय नहीं बढ़ाती, बल्कि पूरे परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है।
आत्मनिर्भर नारी से समृद्ध छत्तीसगढ़ की ओर
छत्तीसगढ़ की बदलती तस्वीर में आज महिलाएं विकास की निष्क्रिय हितग्राही नहीं, बल्कि सक्रिय सहभागी के रूप में सामने आ रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाओं का संगठित होना, 10 लाख से अधिक महिलाओं का लखपति दीदी के रूप में उभरना, स्थानीय उत्पादों का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचना तथा महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता और स्वरोजगार से जोड़ना इस परिवर्तन के महत्वपूर्ण संकेत हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण से जुड़े कार्यक्रमों को व्यापक स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
66 लाख से अधिक महिलाओं तक महतारी वंदन योजना की पहुंच, महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 31.65 लाख से अधिक महिलाएं, 10 लाख 43 हजार से अधिक लखपति दीदी, महिला सुरक्षा के लिए सभी 33 जिलों में संचालित 34 सखी वन-स्टॉप सेंटर, महतारी सदनों का विस्तार और बेटियों के भविष्य, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा स्वरोजगार के लिए नई पहलें—ये सभी प्रयास महिला सशक्तिकरण की व्यापक दिशा को स्पष्ट करते हैं।
महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ उन्हें सुरक्षित, शिक्षित और आत्मविश्वासी बनाना विकसित छत्तीसगढ़ की यात्रा का महत्वपूर्ण आधार है।
आज छत्तीसगढ़ की महिलाएं आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता के साथ आगे बढ़ रही हैं। वे खेती और पशुपालन से लेकर खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, स्वरोजगार, छोटे उद्यम और आधुनिक बाजारों तक अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।
आत्मनिर्भर नारी ही सशक्त परिवार की आधारशिला है और सशक्त परिवारों से ही समृद्ध समाज तथा विकसित राज्य का निर्माण होता है।
मुख्यमंत्री “विष्णु भैया” के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण की यह नई यात्रा छत्तीसगढ़ को “सुशासन से समृद्धि” की दिशा में निरंतर आगे बढ़ा रही है। आर्थिक आत्मनिर्भरता, सामाजिक सुरक्षा, सम्मान और समान अवसरों के साथ आगे बढ़ती छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज एक नए और समृद्ध प्रदेश के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
आत्मनिर्भर नारी, सशक्त परिवार और समृद्ध छत्तीसगढ़—यही महिला सशक्तिकरण के इस नए अध्याय की सबसे बड़ी पहचान बन रही है।