सुरक्षित श्रम, सामाजिक सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, सम्मानजनक रोजगार और डिजिटल सेवाओं के व्यापक विस्तार से बदल रही श्रमिकों की तस्वीर

रायपुर, 21 अगस्त 2026। राष्ट्र निर्माण और राज्य के विकास में श्रमिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उद्योगों की उत्पादन क्षमता हो, सड़कों और भवनों का निर्माण हो, अधोसंरचना विकास हो या फिर असंगठित क्षेत्र की अर्थव्यवस्था—हर क्षेत्र में श्रमिकों की मेहनत और सहभागिता विकास की मजबूत नींव तैयार करती है। ऐसे में श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा, सामाजिक संरक्षण और समग्र विकास के बिना विकसित एवं समृद्ध राज्य की कल्पना अधूरी है।

इसी सोच को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ शासन का श्रम विभाग श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार और उन्हें व्यापक सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के निर्देशन में श्रमिकों के हितों की रक्षा, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से विभागीय सेवाओं को अधिक सरल, सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं।

राज्य सरकार के लगभग ढाई वर्ष के कार्यकाल में श्रम विभाग द्वारा किए गए कार्य श्रमिक हितैषी सोच और संवेदनशील प्रशासन की दिशा को रेखांकित करते हैं। प्रशासनिक ढांचे के विस्तार से लेकर श्रम कानूनों में समयानुकूल बदलाव, लाखों श्रमिकों के पंजीयन, कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार, आवास सहायता में वृद्धि, महिला श्रमिकों के स्वरोजगार, बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य परीक्षण, सस्ती भोजन व्यवस्था और डिजिटल सेवाओं तक—श्रमिक कल्याण को व्यापक स्वरूप देने का प्रयास किया गया है।


प्रशासनिक ढांचे का विस्तार, सेवाओं की बेहतर पहुंच

श्रमिकों तक योजनाओं और विभागीय सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था आवश्यक है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा श्रमिकों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रशासनिक ढांचे का विस्तार किया है।

राज्य में पांच नए जिलों में श्रम पदाधिकारी कार्यालय स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही पांच श्रम पदाधिकारी कार्यालयों को उन्नत करते हुए सहायक श्रमायुक्त कार्यालय के रूप में विकसित किया गया है।

इस विस्तार के बाद प्रदेश में अब 10 सहायक श्रमायुक्त कार्यालय और 23 श्रम पदाधिकारी कार्यालय, अर्थात कुल 33 श्रम कार्यालय संचालित हो रहे हैं।

प्रशासनिक कार्यालयों की संख्या बढ़ने का सीधा लाभ श्रमिकों और नियोजकों दोनों को मिलने की उम्मीद है। पहले जिन श्रमिकों को पंजीयन, योजनाओं की जानकारी, आवेदन, शिकायत या अन्य विभागीय कार्यों के लिए दूरस्थ कार्यालयों तक जाना पड़ता था, अब उनके लिए सेवाओं की पहुंच अपेक्षाकृत आसान होगी। स्थानीय स्तर पर विभागीय मौजूदगी बढ़ने से श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण और कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी संचालन को नई गति मिलने की संभावना है।


समय के अनुरूप श्रम कानूनों में सुधार

बदलते औद्योगिक और आर्थिक परिवेश में श्रम कानूनों और नियमों को समय के अनुरूप बनाना भी महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ सरकार ने औद्योगिक विकास और श्रमिक हितों के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से श्रम कानूनों और नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं।

छत्तीसगढ़ कारखाना नियम, 1962 में संशोधन करते हुए निर्धारित सुरक्षा प्रावधानों के साथ महिलाओं के रोजगार के अवसरों का विस्तार किया गया है। इसका उद्देश्य कार्यस्थल पर सुरक्षा और आवश्यक मानकों को सुनिश्चित करते हुए महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

वहीं छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना नियम, 2021 में संशोधन के माध्यम से श्रम पहचान पंजीयन प्रमाण-पत्र अब 24 घंटे के भीतर जारी किए जाने का प्रावधान किया गया है।

यह बदलाव उद्योगों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और नियोजकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कम समय में प्रमाण-पत्र जारी होने से प्रक्रियागत देरी कम होगी और कारोबार से जुड़े आवश्यक अनुपालनों को आसान बनाया जा सकेगा। इससे राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।


56.83 लाख से अधिक श्रमिक सामाजिक सुरक्षा के दायरे में

छत्तीसगढ़ में श्रमिक कल्याण की योजनाओं का आधार व्यापक पंजीयन व्यवस्था है। संगठित, निर्माण और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने के लिए श्रम विभाग के अंतर्गत अलग-अलग मंडलों के माध्यम से कार्य किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल तथा असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के माध्यम से अब तक लगभग 56.83 लाख संगठित, निर्माण एवं असंगठित श्रमिकों का पंजीयन किया जा चुका है।

यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि बड़ी संख्या में श्रमिकों को विभागीय व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया गया है। पंजीयन के माध्यम से पात्र श्रमिकों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सुविधाओं तक पहुंच का आधार मिलता है।


3.48 लाख श्रमिकों को मिला योजनाओं का लाभ, 173.32 करोड़ रुपये से अधिक खर्च

वर्ष 2026 में 30 जून तक विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से लगभग 3.48 लाख श्रमिकों को लाभ प्रदान किया गया।

इन श्रमिकों को बीमा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कौशल उन्नयन सहित विभिन्न प्रकार की सुविधाओं से लाभान्वित किया गया। इन योजनाओं के संचालन और हितग्राहियों को लाभ पहुंचाने पर लगभग 173.32 करोड़ रुपये व्यय किए गए।

यह राशि केवल आर्थिक सहायता का आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह श्रमिकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों को योजनाओं से जोड़ने के प्रयास को भी दर्शाती है। श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं और कौशल विकास तक कई जरूरतों को कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से संबोधित करने की व्यवस्था की गई है।


निर्माण श्रमिकों को बड़ी राहत: आवास सहायता राशि बढ़ी

अपने घर के सपने को साकार करने में मिलेगी अतिरिक्त मदद

निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों के लिए स्थायी आवास जीवन की सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक है। सीमित आय और अनियमित रोजगार के कारण कई श्रमिक परिवारों के लिए स्वयं का घर बनाना या खरीदना चुनौतीपूर्ण होता है।

इसे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के अंतर्गत आवास निर्माण अथवा घर खरीदने के लिए दी जाने वाली सहायता राशि में वृद्धि की गई है।

अब पात्र निर्माण श्रमिकों को मिलने वाली सहायता एक लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दी गई है।

सहायता राशि में 50 हजार रुपये की वृद्धि निर्माण श्रमिक परिवारों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक सहयोग के रूप में देखी जा रही है। यह निर्णय उन श्रमिकों के लिए राहतकारी हो सकता है जो अपने परिवार के लिए स्थायी आवास की व्यवस्था करने का प्रयास कर रहे हैं।


महिला श्रमिकों के लिए स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए अवसर

महिला श्रमिकों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में भी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों एवं उनके समूहों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए मिलने वाली सहायता राशि भी एक लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दी गई है।

इस बढ़ी हुई सहायता से महिला श्रमिकों और उनके समूहों के लिए स्वरोजगार के अवसर तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है। ई-रिक्शा आधारित स्वरोजगार के माध्यम से महिलाएं नियमित आय का साधन विकसित कर सकती हैं और आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

योजना का उद्देश्य केवल एक वाहन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि महिला श्रमिकों को आजीविका और स्वावलंबन के नए विकल्पों से जोड़ना भी है।


शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई पहल

श्रमिक कल्याण को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रखते हुए सरकार ने श्रमिक परिवारों के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी नई योजनाओं और पहलों को आगे बढ़ाया है।

श्रमिकों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ निर्माण श्रमिकों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था भी की जा रही है।


अटल कैरियर निर्माण योजना: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी होगी आसान

श्रमिक परिवारों के बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अटल कैरियर निर्माण योजना प्रारंभ की गई है।

इस योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए महंगी साबित होती है। गुणवत्तापूर्ण कोचिंग संस्थानों तक पहुंच, अध्ययन सामग्री और अन्य आवश्यक संसाधनों का खर्च कई प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए बाधा बन सकता है।

ऐसे में श्रमिक परिवारों के बच्चों को निःशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराने की यह पहल उन्हें उच्च शिक्षा और पेशेवर करियर के अवसरों तक पहुंचाने में सहायक हो सकती है।


मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक स्वास्थ्य परीक्षण योजना: बीमारियों की समय पर पहचान पर जोर

निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिक अक्सर कठिन और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में काम करते हैं। लगातार शारीरिक श्रम, धूल, गर्मी और अन्य कार्य परिस्थितियों का असर स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

इसे देखते हुए मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक स्वास्थ्य परीक्षण योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य संभावित बीमारियों की प्रारंभिक पहचान, समय पर उपचार और श्रमिकों में स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

नियमित स्वास्थ्य परीक्षण से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की शुरुआती अवस्था में जानकारी मिलने की संभावना बढ़ती है, जिससे समय पर चिकित्सकीय परामर्श और उपचार की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।


उत्कृष्ट शिक्षा से श्रमिक परिवारों के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की ओर

श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना संचालित की जा रही है।

इस योजना के तहत पात्र निर्माण श्रमिकों के प्रथम दो बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है।

योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक परिस्थितियां प्रतिभाशाली बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में बाधा न बनें। आवासीय विद्यालयों में शिक्षा की सुविधा मिलने से बच्चों को पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप वित्तीय वर्ष 2026-27 से इस योजना के अंतर्गत लाभान्वित बच्चों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है।

लाभार्थियों की संख्या दोगुनी होने से अधिक श्रमिक परिवारों के बच्चों को इस योजना से जुड़ने का अवसर मिलेगा। यह पहल शिक्षा को सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना: सिर्फ 5 रुपये में गरम और पौष्टिक भोजन

दैनिक श्रम करने वाले मजदूरों के लिए सस्ता और पौष्टिक भोजन एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना संचालित की जा रही है।

योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण, संगठित एवं असंगठित श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में गरम और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

वर्तमान में प्रदेश के 18 जिलों में 39 भोजन केंद्र संचालित हैं।

कम लागत में भोजन उपलब्ध होने से कामकाजी श्रमिकों को राहत मिलती है और उनकी दैनिक आवश्यकताओं पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिल सकती है। श्रमिक कल्याण की योजनाओं में यह पहल पोषण और राहत दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।


डिजिटल सेवाओं से बढ़ी पारदर्शिता और आसान हुई पहुंच

डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ श्रम विभाग ने भी सेवाओं को मोबाइल और ऑनलाइन माध्यमों से अधिक सुगम बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

श्रम विभाग द्वारा विकसित ‘ई-श्रम साथी मोबाइल एप’ श्रमिकों और नियोजकों के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में उभरा है।

इस एप के माध्यम से स्वयं पंजीयन, श्रमिक और नियोजक के बीच सीधा संपर्क तथा रोजगार संबंधी जानकारी तक पहुंच को आसान बनाने का प्रयास किया गया है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सेवाओं को सरल बनाने से श्रमिकों को कार्यालयों के चक्कर कम लगाने, जानकारी तक त्वरित पहुंच बनाने और विभिन्न प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी तरीके से पूरा करने में सुविधा मिल सकती है।

डिजिटल माध्यम रोजगार से संबंधित जानकारी और संपर्क के नए अवसर भी उपलब्ध करा रहा है। विभागीय सेवाओं को तकनीक से जोड़ने की यह पहल श्रमिकों को आधुनिक सेवा व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


मॉडल लेबर चौक फेसिलिटेशन सेंटर: श्रमिकों को मिलेगा सम्मानजनक वातावरण

काम की तलाश में श्रमिक अक्सर शहरों और कस्बों के विभिन्न श्रम चौकों पर पहुंचते हैं। ऐसे स्थानों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी श्रमिकों के लिए लंबे समय से एक चुनौती रही है।

इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा मॉडल लेबर चौक फेसिलिटेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं।

इन केंद्रों पर श्रमिकों के पंजीयन, विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवेदन, भोजन, पेयजल, विश्राम तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

इन केंद्रों का उद्देश्य केवल प्रशासनिक सेवाएं देना नहीं, बल्कि श्रमिकों के लिए अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण तैयार करना भी है।


सामाजिक सुरक्षा को मिला नया विस्तार

श्रमिक परिवारों के लिए सबसे कठिन परिस्थितियों में आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना श्रम कल्याण व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दुर्घटना, मृत्यु या दिव्यांगता जैसी परिस्थितियों में परिवार की आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।

इसी उद्देश्य से निर्माण और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए विभिन्न सहायता योजनाएं संचालित की जा रही हैं।


निर्माण श्रमिक की मृत्यु और दिव्यांगता पर आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के अंतर्गत विभिन्न परिस्थितियों में सहायता राशि प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।

योजना के तहत—

  • सामान्य मृत्यु की स्थिति में श्रमिक के आश्रितों को 1 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाती है।
  • कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु होने पर आश्रितों को 5 लाख रुपये की सहायता दी जाती है।
  • स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 2.50 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाती है।

इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा के दायरे को और व्यापक बनाते हुए अपंजीकृत निर्माण श्रमिकों के लिए भी सहायता का प्रावधान किया गया है।

यदि किसी अपंजीकृत निर्माण श्रमिक की कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु होती है, तो उसके आश्रितों को भी 1 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

यह व्यवस्था विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि असंगठित और निर्माण क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे श्रमिक भी हो सकते हैं जो किसी कारण से पंजीयन व्यवस्था से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं।


असंगठित क्षेत्र के पंजीकृत श्रमिकों के आश्रितों को भी सहायता

असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों के लिए भी मृत्यु और दिव्यांगता की स्थिति में आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई है।

पंजीकृत श्रमिक की मृत्यु होने पर उसके आश्रितों को 1 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है।

वहीं दिव्यांगता की स्थिति में 50 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान है।

असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है, क्योंकि ऐसे श्रमिकों के पास अक्सर औपचारिक सामाजिक सुरक्षा के सीमित विकल्प उपलब्ध होते हैं।


सुरक्षित कार्यस्थल की दिशा में लगातार प्रयास

श्रमिकों के जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा केवल दुर्घटना के बाद सहायता देने तक सीमित नहीं हो सकती। कार्यस्थलों पर दुर्घटनाओं की रोकथाम और सुरक्षा मानकों का पालन भी उतना ही आवश्यक है।

इसी दिशा में राज्य के विभिन्न कारखानों में श्रमिकों को उनके कार्य की प्रकृति और आवश्यकता के अनुरूप वरिष्ठ अधिकारियों एवं सुरक्षा अधिकारियों द्वारा नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

प्रशिक्षण के माध्यम से श्रमिकों को कार्यस्थल पर अपनाई जाने वाली आवश्यक सुरक्षा सावधानियों और सुरक्षित कार्य पद्धतियों के प्रति जागरूक किया जाता है।

इससे कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने, संभावित दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने और सुरक्षित कार्य संस्कृति विकसित करने में मदद मिल सकती है। सुरक्षित कार्यस्थल का सकारात्मक प्रभाव श्रमिकों की कार्यक्षमता और उत्पादन व्यवस्था पर भी पड़ता है।


श्रमिक कल्याण की नई पहचान बनाता छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में श्रम विभाग द्वारा किए जा रहे व्यापक सुधार यह दर्शाते हैं कि श्रमिकों के कल्याण को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

एक ओर प्रशासनिक ढांचे का विस्तार कर श्रमिकों तक विभागीय पहुंच मजबूत की जा रही है, वहीं दूसरी ओर श्रम कानूनों में समयानुकूल बदलाव कर प्रक्रियाओं को आधुनिक और सरल बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।

56.83 लाख से अधिक श्रमिकों के पंजीयन के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा का दायरा व्यापक हुआ है। वर्ष 2026 में 30 जून तक 3.48 लाख श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदान करते हुए करीब 173.32 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं।

निर्माण श्रमिकों के लिए आवास सहायता राशि बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये करना, महिला श्रमिकों के लिए दीदी ई-रिक्शा सहायता राशि में वृद्धि, बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग और उत्कृष्ट आवासीय शिक्षा की व्यवस्था, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, 5 रुपये में पौष्टिक भोजन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और मॉडल लेबर चौक जैसी पहलें श्रमिक कल्याण को बहुआयामी स्वरूप देती हैं।

सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में सामान्य मृत्यु, कार्यस्थल दुर्घटना और दिव्यांगता की परिस्थितियों में आर्थिक सहायता की व्यवस्था श्रमिक परिवारों को कठिन समय में सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ विभागीय प्रक्रियाओं को श्रमिकों और नियोजकों के लिए अधिक आसान और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं सुरक्षित कार्यस्थल के लिए प्रशिक्षण और सुरक्षा मानकों पर जोर दिया जा रहा है।


निष्कर्ष: योजनाओं के लाभार्थी नहीं, विकास यात्रा के सहभागी

छत्तीसगढ़ में श्रमिक कल्याण से जुड़ी इन पहलों का व्यापक संदेश यह है कि श्रमिकों को केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि राज्य की विकास यात्रा के महत्वपूर्ण सहभागी के रूप में देखा जा रहा है।

प्रशासनिक पहुंच, सामाजिक सुरक्षा, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन, स्वरोजगार, डिजिटल सेवाएं और सम्मानजनक कार्य वातावरण—इन सभी क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयास श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में केंद्रित हैं।

श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता देने वाली नीतियां किसी भी राज्य के समावेशी विकास की मजबूत आधारशिला होती हैं। छत्तीसगढ़ में श्रम विभाग द्वारा किए जा रहे ये प्रयास श्रमिकों के सशक्तिकरण को नई दिशा देने के साथ राज्य को अधिक समावेशी, संवेदनशील और श्रमिक हितैषी विकास की ओर आगे बढ़ाने की क्षमता रखते हैं।

श्रमिकों का सम्मान, उनकी सुरक्षा और उनके परिवारों का उज्ज्वल भविष्य—यही किसी विकसित और सशक्त समाज की वास्तविक पहचान है।

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