जशपुर जिले में जल संरक्षण के प्रभावी कदम ,सोक पिट, WAT, कंटूर ट्रेंच, आजीविका डबरी, नवा तरिया एवं 5% मॉडल से सशक्त हो रहा जल प्रबंधन

जशपुर, 07 जून 2026: जशपुर जिले में कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अभिषेक कुमार के निर्देशन में जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए  विभिन्न नवाचार आधारित कार्यों को प्राथमिकता के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है। मनरेगा एवं जनभागीदारी के माध्यम से सोक पिट, WAT (Water Absorption Trench), कंटूर ट्रेंच, आजीविका डबरी, नवा तरिया तथा 5% मॉडल जैसे संरचनाओं का निर्माण कर वर्षा जल संचय हेतु उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे है।
जिले में वर्षा जल के अधिकतम संचयन और भू-जल पुनर्भरण के उद्देश्य से घरों, संस्थानों एवं सार्वजनिक स्थलों पर सोक पिट का निर्माण कराया जा रहा है। इससे उपयोग किए गए पानी का पुनर्भरण संभव होगा साथ ही  जलभराव की समस्या में कमी आएगी। पहाड़ी एवं ढलान वाले क्षेत्रों में WAT (वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच) तथा कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया जा रहा है। ये संरचनाएं वर्षा जल के बहाव को नियंत्रित कर मिट्टी के कटाव को रोकने के साथ-साथ जल को भूमि में समाहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आजीविका डबरी का निर्माण किया जा रहा है। इन डबरियों में वर्षा जल संग्रहित होने से किसानों को रबी एवं ग्रीष्मकालीन फसलों की सिंचाई में सहायता मिलेगी साथ ही सब्जी उत्पादन, मछली पालन से उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। जिले में 495 आजीविका डबरी निर्माणाधीन है।
जल संरक्षण के क्षेत्र में नवा तरिया अभियान भी महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। नए तालाबों के निर्माण और पुराने जलाशयों के जीर्णोद्धार से जल भंडारण क्षमता में वृद्धि हुई है तथा पशुपालन, कृषि और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है।
इसके साथ ही जिले में 5 प्रतिशत मॉडल के तहत प्रत्येक ग्राम में कुल भौगोलिक क्षेत्र के कम से कम 5 प्रतिशत भाग को जल संरक्षण संरचनाओं से आच्छादित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस मॉडल के माध्यम से वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा जल उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में व्यापक कार्य किए जा रहे हैं।
कलेक्टर रोहित व्यास ने सभी विभागों एवं ग्रामीण समुदायों से जल संरक्षण कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल शासकीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि जन आंदोलन है। सामूहिक प्रयासों से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
जशपुर जिले में जल संरक्षण के ये प्रयास न केवल जल संकट के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, बल्कि कृषि उत्पादन, ग्रामीण आजीविका और पर्यावरण संरक्षण को भी नई मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

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